अज़ीज़ नाज़रीन,
ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों के खिलाफ जंग में दीफाई फौजों को हर दुसरे
रोज़ बड़ी बड़ी कामयाबी मिल रही है। इस ज़िम्न
में एक और कामयाबी हाथ लगी है। जब ज़ाफ़रानी
दहशत जश्न में डूब कर गालिफ़ हो गई तभी २५ जनवरी देर शाम दीफाई फौजों ने दहशतगर्दों
का एक हेलीकाप्टर मार गिराया है। इस हमले
में दहशतगर्दों का एक पाइलट मौत की आगोश में चला गया और दूसरा शदीद ज़ख़्मी हालत में
शिफा खाने में मौत और ज़िन्दगी के बीच झूल रहा है।
ज़ख़्मी दहशतगर्द बेहोश है और वोह वेंटिलेटर पर है। जर्राह और तबीबों को खदशा है की कही दहशतगर्द सालों
के लिए कोमा में नहीं चला जाए। अगर ऐसा होता
है तो वह महज़ एक ज़िंदा लाश से कुछ कम ना होगा।
ज़ाराये से मालूम हुआ है की ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों का हेलिकॉप्टर
ध्रुव पाकिस्तान के इलाक़े जम्मू में कठुआ जिले के लखनपुर में जम्मू-कश्मीर जो अब पाकिस्तानी
हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम है से लगी पंजाब की सरहद से दरअंदाज़ी कर रहा था। पाकिस्तानी राडार सिस्टम ने जम्मू कश्मीर की हवा
को क़ैद कर रखा है फ़ौरन इत्तेला दी और उस दरअंदाज़ दहशत को मार गिराया गया।
नाज़रीन इस महीने का यह तीसरा फौजी तय्यारा दीफाई फौजों ने मार
गिराया है। इससे क़ब्ल ६ जनवरी के आस पास MIG 21 Bison Aircraft राजस्थान के सूरतगढ़ की जानिब से दहशतगर्दों
ने पाकिस्तानी सरहद में दरअंदाज़ी करने की हिमाक़त और जुर्रत की थी। दुश्मन के दरअंदाज़ी की इत्तेला राडार ने दी और हवा
जो क़ैद थी फ़ौरन दुशमना का तय्यारा मार गिराया
गया। इस हमले में दुशमन का पायलट पहले ही
जान बचा कर भाग गया था और कोक पिट से खुद को मेहफ़ूज़ निकाल लिया था। नाज़रीन MIG 21 Bison Aircraft रूस में बना जदीद तरीन और सबसे ज़्यादा मेहफ़ूज़ फौजी तय्यारा
तस्सवुर किया जाता है। उसके एक रोज़ बाद दौरान
मश्क़ एक दहशतगर्दों के एक पायलट को जोधपुर के नज़दीक खलीज में दबोच डाला था।
सहाफी जुबेर का नुक़्ता ऐ नज़र
नाज़रीन ज़ाफ़रानी हुकूमत के मौजूदा हालात सबक़ हैं उन तमाम सरकश,
मग़रूर हठधर्मियों के लिए जो अपनी फौज पर पुर एतेमाद थे और बड़ी
बड़ी बातें करते नहीं थकते थे। जो अपने क़वी
रक़बे के ऊपर ग़ुरूर और तकब्बुर कर बैठे थे, जो अपनी आबादी की हैसियत दिखा कर बोलते थे की अगर तमाम १३० करोड़
हिन्द की आबादी सरहद पर जा कर पेशाब कर दे तो पाकिस्तानी बह जायेगें और पाकिस्तान का
नाम आलमी नक़्शे से साफ़ हो जाएगा। जो अपनी
ज़हानत और ग़ुरूर करते थे और सदा पाकिस्तान को एक हक़ीर जानकार उसका मनफ़ी अक्स अपने अवाम
के सामने पेश करते थे। लेकिन वोह तमाम ज़ाफ़रानी
यह भूल गए थे की ज़हानत किसी के घर की भबूती नहीं है। जो ज़हन ऊपर वाला किसी को देता है वोह उस ज़हानत पर
तकब्बुर करने और उसका बेजा इस्तेमाल करने पर छीन भी सकता है। दूसरी बात भारत का अवाम कितना ज़हीन है वोह तो उसने
ज़ाफ़रानी हुकूमत के अब तक के सबसे ज़्यादा ज़ालिम, गद्दार, मुखलीफ़े वतन, मुखलीफ़े अमन, मुखलीफ़े काश्तकार, मुखलीफ़े गरीब, मुख़ालिफे मस्तूरात, मुखलीफ़े अक़लियत को २०१९ में फिर से मुंतखिब कर के सबूत दे दिया। वहीँ पाकिस्तान के अवाम ने हाफिज सईद और इमरान
खान में से ज़हीन तालीमी आफ़ता अपने वतन की अवाम के लिए फलाही कामों को करने वाले को
मुंतखिब किया। नतीजा सामने है। आज जो इज़्ज़त आलमी सतह पर किसी वक़्त भारत की थी वोह
पाकिस्तान पा रहा है और जो ज़िल्लत, रूस्वाई कभी पाकिस्तान की थी वोह भारत पा रहा है।
नाज़रीन एक बात वाज़े है जिस मुस्लिम अवाम को तमाम ज़ाफ़रानी पानी
पी पी कर कोसते रहतें हैं, वही हर दम भारत की बक़ा के लिए आगे आतें हैं।
१९६५ में जंग के बाद जब भारत माशी हालात से बेहद कमज़ोर हो गया
था तब निज़ाम हैदराबाद ने ५००० किलो सोना से भारत को इमदाद की थी। वहीँ इस जंग में और करोना में भारत के बड़े बड़े
गुज्जु ताजिर अपनी तिजोरियां भरने में लगे रहे, अगर कोई आगे आया तो मुस्लिम जिन्होंने बढ़ चढ़ कर भारत को माशी
इमदाद की थी। जिसमे ख़ास नाम हैं सिप्ला,
विप्रो, फ़ाइज़र वहीँ अडानी अम्बानी जालसाज़ी कर के भारत के किसानों की
ज़मीन हड़पने में लगे हुए थे। और भारत के असासे
ट्रैन,
एयरपोर्ट खरीद लिए।
इतना सब रुस्वा और ज़लील होने के बाद भी ज़ाफ़रानी ज़हर अपने हथकंडे
और अवाम के दिलों दिमाग़ में मुस्लिम अवाम के लिए आलूद और ग़ुबार भरे बग़ैर बाज़ नहीं आता
है। हर इन्तेख़ाब में बग़ैर मुस्लिम,
मुग़ल, ओवेसी, पाकिस्तान का नाम लिए इनकी जीत मुमकिन ही नहीं है। उससे साबित हो रहा है की यह ज़ाफ़रानी महज़ हाकिम बने
रहना चाहतें हैं इनको वतन से ना मोहब्बत थी और ना ही कभी इन्होने अवाम के लिए फलाही
कामों को तर्जी दी।
२०१८ के हैदराबाद के इन्तेख़ाब में एक ज़ाफ़रानी शैतान वेलु बिल्जी हैदराबाद में ज़हर अंगेशी करता है "मित्रों में आपको यक़ीन दिलाता हूँ, अगर ज़ाफ़रानी पार्टी इक़्तेदार में आई, तो ओवेसे बंधुओं को ऐसे ही ह्यदेरबाद से भागना पड़ेगा जैसे की निज़ाम भागे थे" झूट की कोई हद होती है। उसके बाद बल्दिया में दूसरा बोलता है सर्जिकल स्ट्राइक करेगें। मतलब अपने ही वतन के अवाम को गोली मरोगे, तुम हमें गोली मारोगे, हमारी नस्ले बर्बाद करोगे, फिर तवक़्क़ो करते हो की तुमसे और तुम्हारी तंज़ीम से तुम्हारे वतन से हम मोहब्बत करेगें। तीसरा बोलता है ३०% पाकिस्तानी और रोहंगिया हैं।

No comments:
Post a Comment