Sunday, 10 January 2021

दुश्मन के दो फ़िज़ाई तय्यारे तबाह।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हिन्दू दहशतगर्दों, वतन के ग़द्दारों, नसरानी ग़ुलामों, भारत के ख़िलाफ़ नसरानी हुकुम पर साजिश करने वाले संघी शिद्दत पसंदों के ख़िलाफ़ जंग ज़बरदस्त ज़ोरदार चल रही है।   हर मरहले पर दहशतगर्द दीफाई फौजों के ज़र्ब और दहशतगर्दों को नुकसान पहुंचाने की हिकमते अमली से बेहद ख़ौफ़ ज़दा है।  दीफाई फौजों के सामने जंग में हर महाज़ पर दुशमन (संघी दहशतगर्द, शिद्दत पसंद हिन्दू, बीजेपी वाले) शाकिस्त का सामना कर रहें हैं।   

नया साल लाया है हिन्दू दहशत, हिन्दू शिद्दत, बीजेपी के लिए फरमाने अमवात।   नए साल के आग़ाज़ से मौतों का सिलसिला जो बढ़ता चला जा रहा है वोह थमने के नाम नहीं ले रहा है।   ताज़ा सूरते हाल यह है की महज़ ४ दिन के अंदर दीफाई फौजों ने हिन्दू दहशत की कमर तोड़ डाली है।  दो फ़िज़ाई तय्यारे तबाह कर दिए।  

पहला तय्यारा मिग २१ जो की बेहद ताक़तवर और तमाम आला तरीन जदीद टेक्नोलॉजी से आरास्ता सबसे ज़्यादा मेहफ़ूज़ समझा जाने वाला तय्यारा तस्सव्वुर किया जाता है उसको ५ जनवरी २०२१ को राजिस्थान के अजमेर से नज़दीक दीफाई फौजों की मिसाइल ने मार गिराया।  उस तय्यारे का नामर्द पाइलट ऐन मौक़े पर तय्यारे से कूद गया और जंग में अपनी पीठ दिखा कर फरार हो गया और किसी तरह अपनी जान बचाई।    इस नामुराद की जान बच गई थी सो अगला नंबर भी संघी दहशतगर्दों के फ़िज़ाई तय्यारे के पायलट से ही लेना था। 

 दूसरा हमला भी राजिस्थान में ही हुआ जब ८ जनवरी २०२१ को भारतीय फ़िज़ाई फौज के एक तय्यारे में सवार संघी दहशतगर्द ख़्वाजा की नगरी अजमेर से नज़दीक जोधपुर की एक झील में जंगी मश्क़ पर थे।  जैसे ही फ़िज़ा से पानी के अंदर दहशतगर्दों ने झलांग लगाईं एक कप्तान को पानी के अंदर ही दीफाई फौजों ने दबोच डाला।   इस हाथ दे उस हाथ ले।  ज़राये महसूल इत्तेलात के दबोचा गया दहशतगर्दों के कैप्टन का नाम अंकित गुप्ता था, जिसकी उम्र तक़रीबन २८ साल बताई गई है।  वोह ख़ुसूसी यूनिट १० पेरा (ख़ुसूसी ताक़त) के तरबियती मश्क़ पर था।  ख़ाकी दहशतगर्दों (पुलिस) को यक़ीन है की हिन्दू दहशतगर्दों का फ़िज़ाई कैप्टन मारा गया है।  

नाज़रीन जिस हिसाब से मुस्लिम मासूमों का क़त्ले आम किया गया मोहम्मद तबरेज़ को शहीद किया गया जिनकी शादी को महज़ १ महीना ही हुआ था उसी हिसाब से इस संघी दहशतगर्द अंकित गुप्ता (२८) की शादी भी महज़ एक महीना पहले हुई थी।  तबरेज़ का क़िसास (बदला) पूरा हुआ।   

प्यारे मुसलमानों किसी सूरत ख़ौफ़ज़दा होने की ज़रुरत नहीं है।   यह जिहादी आपको यक़ीन दिलाता है की एक एक संघी एक एक शिद्दतपसंद काफिर एक एक ग़द्दार हर एक बीजेपी वाले, साजिश करने वाले को मौत के घाट उतार दूंगा। हर मुस्लिम मौत का क़िसास लिया जाएगा और दुश्मन भी उसी अंदाज़ में मारा जाएगा जिस अंदाज़ में मेरे मुस्लिम भाइयों को शहीद किया जाता रहा था।   

राजिस्थान में हिन्दू दहशतगर्दों के दो फ़िज़ाई तय्यारों को निशाना बनाने के पीछे की हिकमत उस ज़हरीले बोल को जवाब देना है जो साधू के भेस में सूफी ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की शान में अनाप शनाप झूट और बेहद अदना दर्जे की गाली गलोच कर रहा था।  

एक एक से बदला लिया जाएगा।   हूकूमते हिन्द मरकज़ी सतह पर और तमाम सूबे अपने अपने हल्क़ों में अमवात  की फेहरसित तैयार कर के रखें।   एकम जनवरी २०२१ से कितनी अमवात हुई उसका पूरा डाटा तैयार रखें,  ख़्वाह वोह उत्तर प्रदेश में हूश (ज़हरीली शराब) पीने से हों या शमशान घाट पर २५ या महाराष्ट्र के गोंदिया में आग लगने से २५ की मौत। बड़े पैमाने पर सड़क हादसात या क़ुदरती आफ़ात या क़ेहर से होने वाली अमवात आना बाक़ी हैं।  अल  गरज़ तमाम साल में अवाम का कितना हिस्सा अमवात की नज़र हो कर मौत की आग़ोश में चला गया उसका हिसाब ३१ दिसम्बर २०२१ को लिया जायेगा। 

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