अज़ीज़ नाज़रीन,
आज दो मुद्दों को ले कर आप हज़रात के सामने हाज़िर हुआ हूँ। दोनों ही मुद्दे हर हक़ पसंद इन्साफ की बात करने वालों को सुकून फ़राहम करेगें। और दोनों ही मुद्दों में हर ईमान वाले की जीत नज़र आ रही है।
पहला मुद्दा
यह मुद्दा बड़े बड़े बोल से मुनसलिक है, जिसको बोलने के लिए और ग़ुरूर-तकब्बुर करने के लिए मालिके कायनात ने सख़्त मनाही की है। ऐसा कहतें हैं जो जितना बड़ा बड़ा बोल बोलता है बारी इलाहा उसको उतना ही पस्ती में ग़र्क़ाब करता है। काफिर शिद्दत पसंदों, संघी दहशतगर्दों, मीडिया के लंगूर-लँगूरनियों और भातरीय जनखा पार्टी के वज़ीरों, नुमाइंदों और कारकूनों के पाकिस्तान, इस्लाम और मुसलमानों की निस्बत से बड़े बड़े बोल हर बार उनके सामने ही आतें हैं। हर वक़्त यह काफिर शिद्दत पसंद, लंगूर-लँगूरनियाँ रूसवा ज़लील और बेइज़्ज़त होतें हैं। हर बार इनको ज़बरदस्त तरीक़े से धो डाला जाता है फिर भी अपनी हरामकारी से बाज़ नहीं आते हैं। कुत्ते की दुम की तरह, टेड़ी ही रहती है।
२०१४ से पेश्तर और उसके बाद अभी तक इन काफिर शिद्दत पसंदों,
बीजेपी वालों, लंगूर-लँगूरनियों की हर उस मुद्दे पर रूस्वाई हुई है जिसमे की
वोह पाकिस्तान, इस्लाम
या मुस्लिम क़ौम को जोड़ देतें थे। चाहे वोह
बाबरी मुद्दा हो, चाहे वोह गौ हत्या हो, चाहे वोह गौ तस्करी हो, चाहे वोह पाकिस्तान के मुजाहिद की सादगी पर मज़ाक़ करने, चाहे वोह पाकिस्तान को
भिकारी,
मुफ़लिस, और इमरान को कटोरा बाज़ बोल कर मखौल उड़ाने की बात हो,
चाहे वोह लव जिहाद हो, चाहे वह तब्लीग़ी जमात हो, चाहे वह उस हर्राफ़ नर्स का झूठा बयान हो,
की पेंट उतार दी, मेरे सामने थूक लगाया, गंदे गंदे इशारे (मस्टरबेशन) किया,
मास मदिरा मांगी। अब
इन काफिर शिद्दत पसंदों का तमाम झूट फरेब साजिश बेनाकाब हो चुकी है।
२००२ में गोधरा ट्रैन आतिश से ले कर पठानकोट, और उरी से कर पुलवामा तमाम जगह बस ज़ाफ़रानी शिद्दत ही नज़र आ रही
है। इस ज़िम्न में एक और रूस्वाई इन ज़ालिमों
के सर चढ़ कर बोलने लगी है।
नाज़रीन जिस पाकिस्तान को सदा भिकारी बोलते थे आज उससे भी बत्तरीन
हालात भारत के हैं, और वही पाकिस्तान आज तमाम आलम में भारत से आगे निकल रहा है। और जिस इमरान की सादगी का मज़ाक़ बनाते थे फिर वही
चीज़ मोदी पर भी लागू हुई। और मोदी को तो कोई
भी मुल्क अपने होटल में रुकने ही नहीं देते थे, वोह एयरपोर्ट पर ही हग लेता था और नहा धो कर वही से सेर सपाटे
को निकल जाता था। इस मुद्दे पर अंग्रेज़ी में
एक मज़मून लिखा है।
अब असल मुद्दे पर आतें हैं। भारत ने अपने ही मुल्क पर पुलवामा का हमला किया
और इलज़ाम पाकिस्तान के ऊपर लगा दिया। फिर
नाकाम सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमे भारत के दो फौजी तय्यारे पाकिस्तान ने तबाह कर दिए और एक पाइलेट अभिनन्दन
को गिरफ्तार कर लिया।
अब यहाँ पर भारत के शिद्दत पसंद काफिरों, बीजेपी वालों और लंगूर-लँगूरनियों से पूछना चाहता हूँ। १. अगर जैसा अभिनन्दन के साथ हुआ वैसा ही हाल अगर भारत में होता तो क्या तमाम हमदर्दी लंगूर-लँगूरनियों की शिद्दत पसंद काफिरों और बीजेपी वालों की उस पाकिस्तानी फौजी के साथ होती, क्या उसको भारतीय दरिंदा, ज़ालिम, क़साई, दहशतगर्द आदमख़ोर (इंसान का मास ख़ाने और खून पीने वाले) समाज मौत के घाट नहीं उतार देता। जब भारत के खुद के अवाम को सिर्फ मज़हब और ज़ात की वजह से मौत नसीब होती है तो क्या उस पाकिस्तानी के साथ भी वही नहीं होता जो मुस्लिम, दलित और सिख अवाम के साथ हो रहा है। २. फिर जब पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म इमरान खान ने दरियादिली दिखाई और भारत के ज़ाफ़रानी हाकिमों की तमाम हरामख़ोरी, बदबख़्ती, नपुंसकता को नज़रअंदाज़ करते हुए जंग के ख़तरात को फ़ौत किया और अभिनन्दन को वापिस भारत को सौंप दिया, तब लंगूर-लँगूरनियों और शिद्दत पसंद काफिरों संघी दहशतगर्दों बीजेपी वालों के क्या तास्सुरात थे। डर गया पाकिस्तान, ख़ौफ़ज़दा हैं इमरान, मोदी का ख़ौफ़ पाकिस्तान की फौज पर हावी रहा।
अब तक़रीबन वही हालात भारत के साथ बने हैं, जब ९ जनवरी को भारत ने चीन के इलाक़े लद्दाख़ में दरअंदाज़ी (घुसपैठ) करते हुए चुशुल सेक्टर में गुरूंग हिल के पास से एक चीनी फौजी को अगवाह कर लिया था। चीन ने लगाईं सख़्त लताड़, और अपनी फौजें चीन के इलाक़े अरुणाचल से भारत की सरहद पर लगा दी, फिर क्या था ख़ौफ़ इतना बढ़ गया, बग़ैर किसी शर्त के वापिस करना पड़ा चीनी ब्रेव हार्ट फौजी को, अब इस क़िस्म की बेइज़्ज़ती को कोई भी मीडिया मोदी की बेइज़्ज़ती नहीं बताएगा या भारत ख़ौफ़ज़दा है नहीं बोलेगा, बल्कि इसको बोला जा रहा है भारत ने दिखाई दरिया दिली, बड़ा दिल कर के वापिस किया चीनी फौजी। अरे क्या बकवास है, और इसी को कहतें हैं मुँह से हगना और पीछे से खाना या थूक कर चाट जाना। मोदी भक्त लंगूर और लँगूरनियाँ हर मुद्दे पर ऐसा ही कर रहें हैं। जब भारतीय फौज दुनियां की सबसे ताक़तवर फौजों में चौथे नंबर पर है, भारत के पास जदीद हथियारों की भरमार है, जो भारत के सियसतदाँ बीजेपी वाले, संघी, शिद्दत पसंद काफिर, मीडिया के लंगूर-लँगूरनियाँ चीन को धमकी देते नहीं थकते अब भारत १९६१-६२ वाला नहीं है तो फिर इस क़िस्म की दरियादिली को ख़ौफ़ नहीं कहा जाएगा तो क्या कहा जाएगा। फिर इस क़िस्म की दरिया दिली की कोई माक़ूल वजह होना चाहिए। चीन ने आज लद्दाख़, अरुणाचल, नागालैंड, सिक्किम पर क़ब्ज़ा कर रखा है और साहब हैं की दरियादिली दिखा रहें हैं। सीन क्या है बोस, कही ख़ौफ़ तो तारी नहीं है तुम पर जो तुम पाकिस्तान के लिए झूट फरेब फैलाते थे। फिर अभिनन्दन पकिस्तान के मुजाहिदे अज़ाम ने छोड़ा तो वोह दरियादिली नहीं थी, बुज़दिली थी, मोदी से डर गए इमरान, पाकिस्तान घबरा रहा है अब वही बात चीन के साथ है तो दरियादिली है। मोदी पिछवाड़े से छोड़ेगा तो भी लंगूर लँगूरनियाँ, भक्त बोलेगें हूँ......... क्या खुसबू है।
दूसरा मुद्दा
पाकिस्तानी रण बांकुरों जांबाज़ फौजों ने एक भारतीय दहशतगर्द
और दरअंदाज़ को मौत के घाट उतार दिया है। यह
संघी दरअंदाज़ निशांत शर्मा ४ रोज़ क़ब्ल सरहद से पाकिस्तान के अख़नूर सेक्टर में ग़ैर क़ानूनी
तरीक़े से दाख़िल होने की कोशिश में था। फ़ौरन
पाकिस्तानी जांबाज़ हरकत में आये और उसको उसके ही खून से निलहा दिया। उस दहशतगर्द को भारतीय साथी ज़ख़्मी हालत में तिब्बी इमदाद
फ़राहम करने के लिए उधमपुर के कमाल शिफ़ा ख़ाने ले गए, जहाँ दौरान इलाज वोह पाकिस्तानी ज़ख्मों की ताप नहीं सेह सका
और ज़न्खा बरोज़ इतवार मौत की आग़ोश में चला गया। संघी दहशतगर्द निशांत शर्मा भारत के ज़ेरे इंतज़ाम सूबे उत्तर प्रदेश के सहारंगपुर
का रहने वाला बताया जाता है। जैसे ही उसको
पाकिस्तान ने मौत के घाट उतार दिया है यह खबर सहारंगपुर पहुंची उसके एहले ख़ाना में
मातम मच गया। रोना पीटना और छाती कूटना शुरू
हो गया।
संघी दहशत को फ़रोग़ देने वाले निशांत शर्मा के बाप का नाम जोगेंद्र
शर्मा है जिसके तीन बेटों में से दो निशांत शर्मा (पाकिस्तान ने मौत के घाट उतारा गया)
और शुभम शर्मा संघी दहशत को फ़रोग़ देतें हैं।
निशांत शर्मा की जम्मू में तैनाती थी और उस ने पाकिस्तान को हक़ीर जान कर उसकी
जानिब लाल आँख दिखाने, गन्दी नियत से उसकी सरज़मीं अख़नूर सेक्टर में दरअंदाज़ी करने की गलती और जुर्रत कर
बैठा सो नतीजा भोगा और हो गया जहन्नुम रसीद।
संघी बाप का अब बचा है दूसरा बेटा शुभम शर्मा जो पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले सूबे
उत्तर प्रदेश की सरहद से लगे मेरठ में तैनात है।
शुरू हुई भिखारियों को भीक देने की क़ावायत
संघी दहशतगर्द को पाकिस्तान ने खून से लाल कर के मौत के घाट
उतार देने के बाद शुरू हुई भीक बांटने की क़वायत।
जिस हिकमते अमली के लिए यह संघी फौज में जातें हैं,
ताके हर चीज़ इनको भीक में मिल जाए और ज़िन्दगी भर एक परभक्षी
के जैसे सस्ती चीज़ों पर ज़िंदा रहें। भारत
के ज़ेरे इंतज़ाम सूबे उत्तर प्रदेश के वज़ीरे दहशत ने मौत के घाट उतारे गए दहशतगर्द के
एहले ख़ाना में से एक फर्द को ज़ाफ़रानी दहशत में शामिल करने का एलान करने के साथ साथ
५० लाख की भीख उसकी अगर बीवी है तो उसको नहीं तो उसके किसी क़रीबी रिश्तेदार को देने का
एलान किया है।
वज़ीरे दहशत ने ज़िल्हे के किसी गली या नुक्कड़ को उसका नाम दिया जाएगा ऐसा भी एलान किया है। अब देखने वाली बात यही दिलचस्प होगी की मारे गए दहशतगर्द की लुगाई या एहले ख़ाना की औरतें कही उसी गली या नुक्कड़ में बैठ कर धंधा शुरू नहीं कर दें। क्योंकी उसका ख़सम या सगे वाला तो रज़ाई में सोने के क़ाबिल भी नहीं बचा बल्कि मौत की आग़ोश में चला गया है।
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