Tuesday, 18 April 2023

आला ज़र्फ़ शख्सियत थे माज़ी MP अतीक़ अहमद

अज़ीज़ नाज़रीन,    

अतीक़ अहमद एक निहायत ही नेक नाज़ुक दिल हर दिल अज़ीज़  १ बार के ऐवान ऐ पार्लिअमान और ७ बार राकूने असेंबली थे।  आज उनको माफिया डॉन बाहुबली और जितने भी अदना अलक़ाब से बोला जा रहा है होंगे वोह डॉन इस्लाम दुश्मनों, हुकूमत और ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियों के लिए लेकिन उम्मा के लिए वोह एक निहायत ही नेक दिल हर मुफ़लिस (फ़क़ीर-भिकारी) की मदद करने वाले इंसान थे। 

हर हिन्दू तेहवार (गणपति, दुर्गा, रामनवमी, लव रात्रि) दूसरों की भीक चैरिटी पर बनता है।  अगर अतीक़ माफियां थे तो उनके दिए हुए २-२, ३-३ लाख के चंदे पर अपने पंडाल काहे को सजा रखे थे।  जब तक पैसा मिलता रहा अच्छे थे जहाँ उन्होंने हाथ खेचे की माफिया हो गए।  ठीक है अभी तक जितना भी चन्दा दिया गया है भाई अतीक़ की जानिब से उसको यह दुर्गा पंडाल वाले रामनवमी वाले गणपती वाले और चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियाँ जिन्होंने चन्दा वसूला है वापिस करें।   एक डॉन का पैसा पसंद है लेकिन उसके बड़े बड़े कारनामे पसंद नहीं हैं। 

उन्होंने तालीम को हमेशा तरजीह दी है।  जो शख्स अपनी क़ौम के बच्चो को तालीम का दरस दे रहा है वोह कैसे अपनी खुद की औलाद को क़ातिल बनाने की तरग़ीब करेगा।  उनका उनके भाई का उनके फ़रज़न्द का क़तल सिर्फ़ और सिर्फ़ ज़ाफ़रानी हुकूमत की दहशत और अक्सरियत अवाम के दिलों दिमाग में एक अमीर मुस्लिम के लिए भरा हुआ ज़हर और मुसलमानों से नफरत है।  

भाई अतीक़ को ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियाँ माफिया डॉन बाहुबली बोल कर उनकी अज़मत और विक़ार को अदना कर दिया लेकिन असदुद्दीन ओवेसी उनके अंदर क्या बुराई है वोह तो बार एट लॉ हैं जो डिग्री जिन्नाह साहब और मिस्टर गाँधी की थी।  लेकिन ओवेसी जी का नाम आते ही चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियों को मिर्गी का दौरा पड़ने लगता है।  उनकी तंज़ीम के ऊपर सवाल उनकी मुस्लिम हक़ में बात करने के ऊपर सवाल यहाँ तक की अगर वतन से वफादारी के दस्तूर और क़ानून की बाते करतें हैं ऐसे चुभते हुए सवाल जो मोदी इन्तेज़ामियाँ और ज़ाफ़रानी कीड़ों की धज्जियाँ उड़ातें हैं तो लंगूर लँगूरनियों की जल भून के काली हो जाती है। 

जब चीन ने दिसम्बर २०२२ को मज़ीद भारत की १००० किलोमीटर ज़मीन को जंग कर के फतह कर ली थी और भारत के कुछ २२ फौजी ढेर कर दिए थे उस मुद्दे पर जब मोदी को घेरना शुरू किया तो चिड़ियाघर में खलबली मच गई और लंगूर लँगूरनियाँ दर्द से तिलमिला उठे।  एक लंगूर है ज़ाफ़रानी संघी वोह तो असदुद्दीन पर ही एंटी नेशनल होने का इलज़ाम लगा बैठा और फौज से किनाराकश हुए तमाम अफसर मोदी की बांसुरी बजा रहे थे और असदुद्दीन के ऊपर तनक़ीद कर रहे थे।  एक तो उस हद तक तजाऊस कर बैठा की असदुद्दीन ऐवान पार्लिअमान को कुत्ते तक से शबी दे दी।  जब एक तालीमी आफ़ता बर्रिस्टर की यह हालत है तो अतीक़ भाई को चिड़ियाघर के लंगूर बाहुबली डॉन माफिया गुंडा कुछ भी बोलेगें तो उसका हाथ या जुबां पकड़ने वाला कोई नहीं होगा।  कियोंके ताक़त देखी जाती है।

अमित शाह तड़ी पार है मस्तूरातों की जासूसी करने वाला दरिंदा योगी के ऊपर ऐसे ऐसे संगीन जुर्म दर्ज हैं जिनकी सज़ा फांसी से ले कर उम्र क़ैद तक है।  लेकिन है मजाल के किसी भी बीजेपी वाले या संघी यहाँ तक के नाथूराम तक को दहशतगर्द दरिंदा जल्लाद बोल दिया जाए।  जिस किसी लंगूर या लँगूरनी ने ऐसे किसी भी अलफ़ाज़ का इस्तेमाल किया की होगा उसका एनकाउंटर। 

हाँ इन सब में एक बोहोत ही आला ज़ात हक़ पसंद सहाफ़ी हैं अर्पिता आर्य बोहोत ही शाहिस्ता और हक़ बयानी से बात करने वाली ख़ातून हैं।  यहाँ तक की जो ज़मीर फ़रोश सईद अंसारी जैसे लंगूर हैं वोह भी बस हुकूमत की मुँह में लो लो लो करते रहतें हैं हक़ बयानी से इतने घबराते हैं की कहीं अगला एनकाउंटर उनका ही नहीं हो जाए।    

हमें ना ही हुकूमत से कोई मतलब है ना ही भारत से और ना ही भारत की सालमियत से, होंगे अतीक़ भाई हुकूमत के लिए डॉन और माफिया लेकिन उम्मत के लिए किसी ग़मगुसार से कम ना थे।  फिर यह तो जंग है हक़ बनाम नाहक़ हिन्दू बनाम इस्लाम।  हिन्दू बनाम मुस्लिम जंग ना होती तो उनको शहीद करने के बाद दहशतगर्द अपने आक़ा का नारा नहीं लगाते।  जय जय ......

जितने भी लंगूर लँगूरनियाँ हैं वोह सब हिन्दू दहशतगर्दों से मिले हुए हैं।  में तो कहता हूँ किसी भी मुस्लिम को इन ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के लंगूर और लँगूरनियों को किसी भी क़िस्म की कोई इंटरव्यू या अपना तब्सिरा नहीं देना चाहिए। 

२०१५ के दिल्ली हादसे के बाद आये थे मेरे पास कई लंगूर जूते मरे के ज़लील कर के भगाया।  कियोंके ८ अगस्त २०१५ को ही सारा मंज़र साफ़ हो गया था जो नंगा नाच इन लंगूर लँगूरनियों ने मचाया था सब ज़ाहिर हो गया था।  उसके बाद सर सर बोल के इंटरव्यू लेने आये जूते मार के धक्के दे कर भगाया।  एक अलफ़ाज़ का इंटरविव नहीं दिया।  सिर्फ़ एक मुसलमान रिपोर्टर को जिसको ATS ने भेजा था  उसको दिया इंटरव्यू। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...