Thursday, 13 April 2023

भारत में फिर से दिफ़ाई हमला, एक हिंदी फौजी हलाक।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

आज़ाद ममलेकत ख़ालिस्तान में जहाँ गुजिश्ता रोज़ क़ाबिज़ भारीतय फौजी छावनी पर हमले में ४ भारतीय फौजी ढेर हुए थे वहीँ आज फिर से एक फौजी गोलीबारी में ढेर हुआ है।  भारतीय क़ाबिज़ फौज के अफसर ने कहा है की कुछ घंटों पहले हुए ४ फ़ौजिओं की हलाकत से यह कल वाले फ़ौजिओं से अलहदा है। 

फौज के एक बयान में कहा गया है कि बरोज़ बुध शाम बठिंडा मिलिट्री स्टेशन पर हमले के कुछ ही घंटों के बाद एक फौजी ने खुद को गोली मार ली थी।

“फौजी अपने सर्विस हथियार के साथ संतरी ड्यूटी पर था। सिपाही के पास से एक ही हथियार और उस हथियार के कारतूस का डिब्बा मिला है।'

मारा गया फौजी ११ अप्रैल को छुट्टी से लौटा था और गोली मार ली उसको फ़ौजी शिफ़ाख़ाने ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

आज़ाद ममलेकत ख़ालिस्तान में १९८४ का दौर आहिस्ता आहिस्ता लौट रहा है।  जब संत भिंड़रवाल को शहीद करने के लिए तब की हुकूमत हिन्द ने सिख मज़हब का मक्का और अज़ीम इबादत गाह गोल्डन टेम्पल को गलीज़ और नापाक किया था।   और इबादत गाह में भारतीय फौज के दहशतगर्द जदीद हथियारों के साथ दाखिल हुए और कई सिख अवाम को शहीद कर दिया कई की लाशों की बेहुरमती की।  भारत की उस दहशत का जवाब तहरीक ख़ालिस्तान से आग़ाज़ हुआ।  जो गुजिश्ता कुछ सालों से तक़रीबन दब ही गया था और ख़ालिस्तान भारत का हिस्सा तसव्वुर किया जाने लगा था। 

लेकिन २०१९ के बाद ख़ास भाई मूसावाला की शहादत ने उस ख़ित्ते को फिर से आज़ादी की राह पर गामज़न कर दिया है।  भाई मूसावाला के क़तल की छींटे दरिंदा सिफ़त बाहुबली माफिया अमित शाह के ऊपर गिरे थे।  लेकिन मरकज़ में दहशतगर्दों ने कमान संभाल रखी है तो उस ज़ालिम तक पहुंच पाना फिलहाल खालिस्तानी जंगजूओं को क़ासिर लग रहा है। 

लेकिन यह बात ते है कश्मीर की आज़ादी के बाद तहरीक ख़ालिस्तान का आग़ाज़ फिर से हो चूका है।  अब इसमें देखना यह होगा कितने भारत के दहशतगर्द हलाक होते हैं और कितनी ख़ूंरेज़ी होती है। 

पेश कर्दा सहाफ़ी ज़ुबेर

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