Sunday, 16 April 2023

पुलिस योगी इन्तेज़ामियाँ और मीडिया की मिली भगत से जाम ऐ शहादत।

अज़ीज़ नाज़रीन

क़ौम और मिल्लत के रहबर और ग़रीबों में गमगुसार भाई अतीक़ और भाई अशरफ़ को योगी इन्तेज़ामियाँ, पुलिस और ज़ाफ़रानी मीडिया की मिली भगत और निगरानी में हिन्दू दहशतगर्दों ने शहीद किया और उन्होंने जामे शहादत नोश किया।  लेकिन जंग में इससे मुसलमानों के हौसलों को ज़र्रा भर शाकिस्त नहीं है।  इन दोनों फरिश्तों का मर्तबा तो अब और बुलंद और आला हो गया है।  जहाँ मुस्लिम उम्मा और मुजाहिद काफ़िरों से हर जंग लड़ते वक़्त यह ख़्वाहिश करता है की उसको शहादत नसीब हो लेकिन वोह शहादत हर ख़ासो आम को नसीब नहीं होती है बल्कि अल्लाह के उन बन्दों को नसीब होती है जिनको अल्लाह रोज़ा ऐ जज़ा में इनामात की झड़ी लगाने वाला होता है।  यह मर्तबा फरिश्तों को भी नसीब नहीं होता है। 

यह जंग हस्बे मामूल जारी रहेगी।  जब एक मोमीन इस्लाम के लिए जंग का आग़ाज़ करता है तो उसको हर दम यही ख़्वाहिश होती है की उसको जंग में शहादत नसीब हो।  लेकिन इन दोनों मुजाहिदों की शहादत से एक बात वाज़े हो गई इन की शहादत में योगी इन्तेज़ामियाँ पुलिस और मीडिया ने नुमाया किरदार अदा किया है।  और यह महज़ तीन दहशतगर्दों का काम नहीं है बल्कि इसके पीछे की ज़ेहनियत और रस्म अल ख़त कोई और है।  कुछ सवालात जो ज़ाफ़रानी इन्तेज़ामियाँ से पूछना लाज़मी हैं। 

१.        जब इतनी हाई प्रोफाइल इंसान को इलाज़ के लिए ले जाया जा रहा था तो पुलिस ने पूरे हिफ़ाज़ती इक़दाम क्यों नहीं किये थे। 

२.          अतीक़ और अशरफ़ दोनों ही तीन दिन क़ब्ल बोल चुके थे उनको गोली मारी जाएगी तो जेल में ही उनके इलाज़ के इंतज़ाम कियो नहीं किये गए

३.          मीडिया को हर जगह अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए माइक मुँह में घुसाने की क्या ज़रुरत है और पुलिस ने मीडिया को क्यों आने दिया

क्या योगी और पुलिस के पास इंटिलीजिएंस रिपोर्ट नहीं थी की भाई अतीक़ और भाई अशरफ़ की जान को हिन्दू दहशतगर्दों से ख़तरा है।  मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ तो योगी के पास बड़ी बड़ी झूठी सच्ची इंटिलीजिएंस रिपोर्ट आ जाती है।  पी.ऑफ.आई. के ख़िलाफ़ तो बड़ी रिपोर्ट है जबकी अभी तक एक भी नुमाइंदा पी.आफ.आई.का किसी भी ऐसी दहशतगर्दाना मामलात में नहीं पकड़ा गया।  

योगी तो भय मुक्त उत्तर प्रदेश या जुर्म फ्री उत्तर प्रदेश बनाना की बात करता है अरे कैसे बनाएगा जब पुलिस की निगरानी में एक क़ैदी मेहफ़ूज़ नहीं है तो आम अवाम की क्या बात करता है तू योगी।  यह पुलिस की ज़िम्मेदारी थी क़ैदी को मेहफ़ूज़ लाना ले जाना।  एक तरफ तो मीडिया उनका किरदार का क़तल कर रही है उनके ख़िलाफ़ अदना दर्जे की तहरीर की जा रही है डॉन माफिया बाहुबली दूसरी तरफ उनके मुँह में माइक घुसा कर उनके तास्सुरात जानने की कोशिश की जा रही है। 

या तो वोह बाहुबली और डॉन नहीं है या फिर मीडिया ने जान बूझ कर उनको सड़क पर रोका और दहशतगर्दों को मौक़ा फ़राहम किया की उनको गोली मारी जाए।  हो सकता है मीडिया का कोई नुमाइंदा भी इन देशतगर्दों से मिला होगा और उसने पूरा ख़ाका दहशतगर्दों को समझा दिया होगा इस जगह पर भाई अतीक़ का क़ाफ़िला आ कर रूकेगा इस जगह पर हम उनको इंटरव्यू के लिए घेर लेंगे और जब वोह रूकेगें तुम हमला कर देना।  पुलिस को भी मिला लिया था।  नहीं तो जैसे ही दहशतगर्द ने उनके सर पर पिस्तौल रखी थी फ़ौरन अतीक़ को नीचे झुका देना था लेकिन पुलिस वाले खुद ही भाग गए।  मतलब पूरा खुला मैदान दिया करो हमला।     

ख़ैर ख़ून ख़राबा तो ज़ाफ़रानी दहशत में चलता रहेगा और यह जंग है।  लेकिन अब भारत के ज़ाफ़रानी इन्तेज़ामियाँ, ज़ाफ़रानी मीडिया और अवाम को खुद देखना होगा जो पाकिस्तान अफगानिस्तान के ऊपर झूठी सच्ची इलज़ाम तराशी करते थे पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान को बदनाम करते थे जिहादी तालिबानी  तुम्हारे देश अमन पसंद महान भारत में क्या हो रहा है।   एक क़ैदी पुलिस हिफाज़त में भी मेहफ़ूज़ नहीं है।  

पेशकश सहाफ़ी ज़ुबेर 

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...