Wednesday, 19 April 2023

ज़ाफ़रानी मीडिया के जानवरों की दहशत को मेहफ़ूज़ करने की साजिश।

अज़ीज़ नाज़रीन,   

हर दिल अज़ीज़ और भारत के माज़ी रकूने पार्लिअमान जनाब अतीक़ अहमद और उनके बरादर जनाब अशरफ़ की शाहदत पर ज़ाफ़रानी चिड़िया घर के खूंखार जानवर (लंगूर-लँगूरनियाँ) सियसतदान शहीद जनाब अतीक़ अहमद और उनके भाई शहीद जनाब अशरफ़ की किरदार कूशी इसलिए कर रहें हैं ताके दहशतगर्दों को बचा लिया जाए।  कियोंकी अदलिया के नज़दीक, अवाम के नज़दीक किसी भी शख्स का मनफ़ी किरदार पेश कर दिया तो उसको मारने वाले के हक़ में अदालत भी नरम रुख अपानती है।  ठीक है मक़तूल का किरदार भी मशकूक था उसको अगर क़ातिल ने क़तल किया तो कोई बड़ा जुर्म नहीं किया वैसे भी तो वोह एक मुजरिम ही था। 

ऐसा कर के चिड़ियाघर के खूंखार ख़ूनी जानवर (लंगूर और लँगूरनियाँ) मुस्लिम शहीद की किरदार कूशी कर के ना सिर्फ़ हिन्दू दहशतगर्दों को मेहफ़ूज़ कर रहें हैं बल्कि जो चिड़ियाघर के इन ख़ूनी दरिंदों हैवानों ने साजिश रची है और जो दो लंगूर मिले हुए थे इन दहशतगर्दों से उन दोनों को भी मेहफ़ूज़ बचाना चाहतें हैं।   

जितने भी किरदार अब निकल निकल कर चिड़ियाघर के दरिंदों के पास आ रहें हैं अभी तक किस बिल में पोशीदा थे।  शहीद अतीक़ और अशरफ़ तो गुजिश्ता कई साल से जेल में बंद थे तब कियों नहीं मुँह खोला।फिर चिड़ियाघर के खूंखार जानवरों लंगूर और लँगूरनियों के पास जाने के पीछे क्या वजह है।  अगर इन्साफ चाहिए तो अदलिया में कियों नहीं गए पुलिस के पास शिकायत कियों नहीं की।  तो क्या यह समझा जाए की यह दहशतगर्दों के हामी चिड़ियाघर (मीडिया) के लंगूर और लँगूरनियाँ अदलिया से ज़्यादा क़ुव्वत और ताक़त रखतें हैं जो अवाम बजाये अदालत में जाने के पुलिस के पास अपनी फर्याद देने के लंगूर और लँगूरनियों के पास जा रहा है। अगर ऐसा है तो भी बोहोत ग़लत है, और उससे तो अब साधू की इन्तेज़ामियाँ पुलिस अदलिया के ऊपर और भी सवालियां निशाँ लगेगें।  मतलब दहशत के राज में पुलिस, अदलिया इन्तेज़ामियाँ सब को ताले लगा कर फैसला बंदूक से दशहतगर्द कर देंगें बाद में उसकी तहक़ीक़ात और क्या सही क्या गलत है उसका फैसला चिड़ियाघर (मीडिया) के लंगूर और लँगूरनियाँ कर देंगें।    

मगर ऐसा कर के यह लंगूर और लँगूरनियाँ अपने ही वतन भारत की इज़्ज़त वक़ार की धज्जिया उड़ा रहे हैं।  बिगड़ती हुए क़ानून की तरतीब का मज़ाक़ बना रहें हैं।  तभी ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर (मीडिया) के खूंखार जानवर लंगूर और लँगूरनियाँ अदालत के नाम पर इन्साफ़ का झूठा फ़रेबी तमाम बरहना नाच कर रहें हैं और आलम में भारत की थू थू के मुर्तकिब हो रहें हैं।  दरअसल ज़ाफ़रानी चिड़ियघर "आज तक" और "ज़ी न्यूज़" के १-१ लंगूर और पुलिस वाले दहशतगर्दों से मिले हुए थे।  दहशतगर्दों को प्रेस के आई डी भी इन्ही लोगों ने मुहैया करवाए थे।  तभी आज तक और ज़ी ही खूब बेवा आह ज़ारी (विधवा विलाप) कर रहें हैं। इज़्ज़तमाब सूबे शुमाल की हाई कोर्ट को इस बात का इदराक लेना चाहिए और चिड़ियाघर के जानवरों को हलाकशुदा किसी भी मुसलमान की इज़्ज़त रेज़ी करने का हक़ नहीं देना चाहिए।  दूसरी बात अभी भी कई केसेस उनके ऊपर ज़ेरे ग़ौर हैं हैं क्या इससे अदलियां की ज़ेहनियत मुतस्सिब नहीं कर रहें हैं। चिड़ियाघर के जानवरों की मनफ़ी टेलीकास्टिंग क़ब्ल अज़ अदल ही अदलियां के दिल दिमाग़ को मशकूक कर के ज़हर भरने का काम कर रहीं हैं।  अदालत के ज़हन में शक और शुबह वस्वसे के बीज बोये जा रहें हैं।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...