Monday, 17 April 2023

योगी इन्तेज़ामियाँ बेईमान साबित हुई।

अज़ीज़ नाज़रीन

किसी भी शख़्स का किरदार हुकूमत, अवाम, चरिन्द परिन्द और वतन पर नुमाया असर करता है।   अगर हाकिम ओबाश, अय्याश हरामख़ोर दरिंदा फ़िर्क़ापरस्त होगा तो हर शै के अंदर ज़ालिम और दरिंदा सिफ़त आ जाएगी।  अतीक़ और अशरफ़ की शहादत की निस्बत से योगी इन्तेज़ामियाँ बेईमान तो साबित हुई ही बल्कि अमानत में ख़यानत करने वाली भी साबित हो गई।  अदालते उज़्मा ने एक क़ैदी की हिफाज़त की दरख़्वास्त मुस्तरद कर दी यह बोल कर की आप सूबे की इन्तेज़ामियाँ की हिफ़ाज़त में हैं। आपको मज़ीद तहफ़्फ़ुज़ की हाजत नहीं है।  मतलब अदालते उज़्मा ने अपनी अमानत योगी इन्तेज़माइयाँ को दी थी।  और योगी ने क्या किया सिर्फ और सिर्फ मज़हब की बुनयाद पर दो क़ैदियों को हलाक करवा दिया।  उन दोनों को जो तहफ़्फ़ुज़ घेरा दिया था वोह बड़ा ही कैज़ुअल था।  मतलब योगी की नियत अमानत को देख कर ग़लीज़ और गन्दी हो गई।  वोह भी अगर अमानत किसी मोमीन की हो तो योगी जैसे दरिंदे ज़ालिम फ़िर्क़ापरस्त की नियत तो पहले ख़राब होगी।  

जिस हाकिम के ज़हन में इतना ज़हर भरा हो की एवान में खड़ा हो कर यह बोले की मट्टी  में मिला देंगें, नस्लें बर्बाद कर देंगें, रगड़ कर रख देंगें।  उससे अमानत में ख़यानत तो क्या हर ज़ुल्म गुनाह की तवक़्क़ो है।  ऐसे दरिंदों क़ानून की धज्जियाँ उड़ाने वालों दस्तूर का मज़ाक़ बनाने वालों को हिन्दू अक्सरियत अपना रहबर मानती है।  मरकज़ पर एक ज़ालिम दरिंदा क़ातिल तानाशाह बैठा है और सूबों में अपने नुमाइंदे बिठा रखे हैं।  तभी तो जानवरों से ले कर इंसानों में ज़ालिमाना ख़ून पीने की सिफ़त आती जा रही है।  जिस गाये को पूजतें हैं हिन्दू अपनी वालेदा मानते हैं वोह भी क़तल जैसे संगीन जुर्म कर रही है।  जबकी हमारे ख़ानदान में २००० तक एक निहायत शरीफ़ आला ज़ात इंसान के लिए कहावत मशहूर थी "अल्लाह मियां की गाये हैबकरी नहीं जबकी बकरी सुन्नत है लेकिन कहावत बनाई बड़े बूढ़ों ने गाये के नाम पर।  और आज गाये ही दहशत फैला रही है जो उसको अपनी वालेदा मानते हैं रोटी खिलाते हैं उसका ही क़त्ले आम कर रही है। 

नाज़रीन योगी हुआ या दरिंदा अमित शाह मोदी और इनके पैरोकार संघी बीजेपी वाले शिद्दत पसंद (रेडिकल) हिन्दू यह सब वतन के ग़द्दार हैं।  अंग्रेज़ों के ग़ुलाम और भारत को तक़सीम करने की इन लोगों ने मग़रिबी मुमालिकों से सुपारी ली हुई है। इन लोगों के हर नारे में वतन से गद्दारी की बू आती है।  बेटी बचाओ बेटी छुपाओ अब समझ में आया कियोंके उनको बेटियों के साथ ज़िना बिल जब्र गिरहो गरदाना ज़िना करना था।  बोहोत हुआ नारी पर अत्याचार……….  फिर शुरू हुआ ख़वातीनों पर शिद्दत और ज़ुल्म।  

वैसे ही योगी ने जब कहा था मट्टी में मिला देंगें और उसके इस बेहूदा तबसिरे पर संघी खुशियां मना रहे थे लेकिन मट्टी में मिलाने से उसका मतलब भारत की इज़्ज़त, विक़ार अज़मत को मट्टी में मिला देंगें से था।  क़ानून की बालादस्ती को मट्टी में मिला देंगे से था।  दस्तूर की धज्जियाँ उड़ा कर उसको मट्टी में मिला देंगें से था।  और संघी आधी अक़ल आधी चड्डी उसके इस पैगाम को आम करते रहे।  हर नाज़ेबा ख़िलाफ़ दस्तूर ख़िलाफ़े क़ानून अमल पर उस दहशतगर्द की हौसला अफ़ज़ाई करते रहे।  जिसके नतीजे में भारत की अज़मत और इज़्ज़त आलमी बरादरी में अदना से अदना होती गई।  आज कोई भी आलमी बरादरी भारत के किसी भी नुमाइंदों को इज़्ज़त से नहीं देखता है।  मग़रिबी मुमालिक तालीमी आफ़ता अवाम इन्साफ पसंद मुल्क को और हाकिम को पसंद करते हैं।  आज रूस ने जंग लड़ी लेकिन तमाम आलम में सुपर पावर की थू थू हो रही है।  वैसा ही भारत का हाल है।  जो हाकिम अपने ही अवाम का क़त्लो ग़ारत करता है ख़ास मज़हब की नस्ल कूशी करता है उसको आलमी बरादरी अलग थलग डाल देंतें हैं। 

भले ही ज़ाफ़रानी मीडिया के चिड़ियाघर के ग़ुलाम लंगूर और लँगूरनियाँ भारत के बारे में क़सीदे कस्ते रहें मोदी की इज़्ज़त अफ़ज़ाई के बारे में झूटी सच्ची कहानी बोलते रहें लेकिन हक़ीक़त से यह लोग भी ला -आशना  नहीं हैं।  जिस अरब वर्ल्ड में कभी भारत की अज़मत थी सऊदी, दुबाई ईरान पाकिस्तान  वोह आज भारत से काफी झिटक गए हैं।  पहले कश्मीर पर रूस्वाई और ज़लालत हुई और अब पूरे भारत के हालात पर हो रही है।  उसके ऊपर लाशों पर जश्न बनाना।

२०१५ तक इस्लामिक स्टेट के दहशतगर्द जब भी किसी को क़तल करते थे तो उसके आस पास घेरा बना कर रक़्स करते थे।  नाचते थे फिर वही हालात अब भारत में हो गए हैं और भारत का मीडिया मोदी इंतेज़ामिया अपने आपको दुनियां का सबसे बड़ा जमूरियत बोलता है।  जम्हूरियत की वालेदा।भारत के हिन्दू सक़ाफ़त के बारे में मोअज़्ज़िब तहज़ीब वाले अवाम ऐसे क़सीदे लिखे जातें हैं  अगर लाशों पर जश्न बनानां हिन्दू तहज़ीब है तो यह सक़ाफ़त उनके मज़हबी और अक़ीदे की रिवायात होगी जो दहशतगर्दों जैसी है। 

अवाम ने इनको मुंतखिब किया और अपने मुस्तक़बिल की अमानत इनको दी अदलिया ने एक मुजरिम की अमानत इनको दी दोनों ही अमानत में ख़यानत कर डाला और नियत इतनी ख़राब हो गई की वतन के असासों पर डाका डाल दिया दूसरा इंसानी क़त्ल कर दिया। 

इंसान इतना बड़ा अमीन होना चाहिए की दुश्मन भी अपना सामान बेझिझक उसके पास रखे।  दुश्मनी अपनी जगह है लेकिन वोह इंसान अमानतदार है अमानत में ख़यानत नहीं करेगा।  जो हमारे नबी का उस्वा हसना था।  नबी के सबसे ज़्यादा दुश्मन ज़ालिम तरीन अपनी अमानत उनके पास रखवाते और बे खबर हो जाते।  मुहम्मद के पास हमारा माल है सल्ललाहो अलैहे वस्सलम मतलब मेहफ़ूज़ है लोग बोलते अरे तुम तो उनके बोहोत बड़े दुश्मन हो तो जवाब आता हाँ दुश्मनी है लेकिन उनका किरदार सादेक़ूल अमीन है आज तक अमानत में ख़यानत नहीं की।

जब आप को हिजरत का हुकुम हुआ आपके पास जिन जिन यहूदियों की अमानत थी आपने हज़रते अली को सौपी और बोला यह अमानत उस शख़्स को मेहफ़ूज़ पहुंचा देना। 

और अपने आपको साधू कहने वाला शख़्स अदालते उज़्मा की अमानत मेहफ़ूज़ नहीं रख सका।  बेशर्म अपने आपको साधू कहता है

ज़ालिम दरिंदा शैतान की नस्लों के अतीक़ और अशरफ़ की शहादत पर कुछ ट्ववीट्स के जवाब।  

क़तल को बेशर्म बीजेपी का दरिंदा #सुरेशकुमारखन्ना आसमानी फैसला बोलता है तो वोह नहीं था आसमानी फैसला यह है।   मौत का नंगा नाच।  कल खारघर १६ अप्रैल २०२३ को नई बंबई में बाहुबली माफिया अमित शाह का इवेंट में दिल फट जाने से १२ लोगों की मौत हो गई और १०० से ज़्यादा हॉस्पिटल में भर्ती हैं कुछ की हालात नाज़ुक है। 

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, "जब राक्षसों का संहार होता है तब पृथ्वी का भार कम होता है।"  #कैलाशविजयवर्गीय अभी तो १२ राक्षस कुम्भकर्ण को सुंनने गए थे उनका वध हो गया अभी असली कट्टरपंथी रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण का संहार होना बाक़ी है।  गिनती चालो रखो

पाप-पुण्य का हिसाब इसी जन्म में होता है #स्वतंत्रदेवसिंह हो गया १२ काफिरों के पाप और पुण्य का हिसाब इसी जनम में।  

माफियाओं गुंडों दरिंदों जल्लादों आतंकवादिओं को सुनने जाओगे तो मौत तुम्हारा पीछा करेगी।  जैसी करनी वैसी भरनी वैसे जहाँ जहाँ यह मरदूत मनहूस बाहुबली दरिंदा माफिया आतंकवादी अमित शाह गया है उस ख़ित्ते में काफिरों का काल बन कर गया है और मौते साथ ले कर गया है।  #केरला

जला के राख कर देंगें, गिनती चालू रहेगी।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

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