अज़ीज़ नाज़रीन
जिस हिसाब से ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के खूँखार, पेशावर, शातिर मज़हबी कशीदगी फैलाने वाले लंगूर लँगूरनियाँ साबिक़ रकूने पार्लियमान अतीक़ अहमद के किरदार कूशी कर रहें हैं उसके पीछे बोहोत गहरी साजिश है। चिड़ियाघर के ज़ालिम जल्लाद लंगूर लँगूरनियाँ हुकूमत को तो बचा ही रहें हैं बल्कि एक ऐसे दरिंदे राजू पाल और उमेश पाल को भी ढेर होने के बाद बचा रहें हैं जो ख़ुद एक मुजरिम और गुनाहगार था। राजू पाल जो कभी अतीक़ एहमद का दाहिना बाज़ू हुआ करता था। लेकिन जैसा हर वक़्त में कहता हूँ हर संघी, बेजीपी वाला रेडिकल हिन्दू गले लग कर ग़द्दारी करता है पीठ में खंजर घोंपता है वही हाल राजू पाल का था।
उसने शहीद अतीक़ अहमद से ग़द्दारी कर के ख़ुद उनके मुख़ालिफ़ इन्तेख़ाब में खड़ा हो गया। लेकिन शहीद अतीक़ ने उसको धुल चटा दी और एक ही झटके एक ही वार में चारों खाने चित कर दिया। फिर उसने शहीद अशरफ़ के ख़िलाफ़ इन्तेख़ाब में हिस्सा लिया बावजूद अशरफ़ जी के जेल में रहते हुए राजू पाल यहाँ पर भी बुरी तरह हारा। जब दो दो जगह हार गया तो उस हार की ज़लालत का बदला अब चिडयाघर के दरिंदे मुँह से दहशत फ़ैलाने वाले लंगूर और लँगूरनियाँ कर रहें हैं। सिर्फ़ और सिर्फ़ यह अना का मामला है।
कैसे एक मुस्लिम संघी क़ाफ़िर से जीत गया अब हम उसको बर्बाद कर देंगें। फिर जिस हिसाब से चिड़ियाघर के लंगूर और लँगूरनियाँ पूरे कुनबे को तबाह करने के पीछे लगें हैं उसके पीछे भी इनका मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ बदला लेना है ना की इन्साफ़ की पैरवी करना है। जो ज़ाहिर हो रहा है।
अगर अतीक़ माफिया थे तो आज जिस अम्बानी समूह के बारे में यह लंगूर लँगूरनियाँ बड़े बड़े क़सीदे कस्ते हैं वोह कौन है। अंटालिया किस ज़मीन पर बना है। उस दरिंदे माफिया डॉन मुकेश अम्बानी ने अरबों रूपये की वक़्फ़ की ज़मीन हुकूमत से ग़ैर क़ानूनी तरीके से हड़प ली और उसके ऊपर अपनी तिजारत शुरू की बंगला बनाया। इस बात का ज़िक्र २०१२ के बाद अंग्रेज़ी के कई मज़मूनों में कर चूका हूँ। क्या बात है की मुकेश अम्बानी पर कोई हिकमत नहीं होती है। जबकि वक़्फ़ क़ानून के हिसाब से किसी भी इंसान को यह हक़ नहीं है की वक़्फ़ के किसी भी असासे की ख़रीद फ़रोख़्त कर सके। एक नहीं मुकेश अम्बानी उसकी लुगाई नीता मुकेश का बाप धीरू भाई उनके फ्राड और जालसाज़ी के क़िस्से क्या किसी डॉन और माफिया से कम हैं। क्या मीडिया मुकेश अम्बानी की ज़मीन और उसके जालसाज़ी के बारे में कभी कोई खबर चलाएगा। मुकेश का बाप धीरू कैसे ख़लीज मुमालिकों को करोड़ों रूपये का चूना लगा कर भारत भाग आया था। जैसे की बी.आर. ओडीपी, उर्फ़ बी. आर. शेट्टी।
अगर मीडिया के लंगूर और लँगूरनियों ने हुकूमत की सांठ गाँठ से मुकेश को दी गई करोड़ों की वक़्फ़ की ज़मीन और दिगर जालसाज़ी के कारनामे टीवी पर दिखाए तो होगा दुसरे ही रोज़ उस रिपोर्टर का एनकाउंटर। एक जगह नहीं हज़ारों जगह हुकूमत को बैंकों को इन ताजिरों ने चूना लगाया है। इनकम टैक्स, हवाला और बड़े बड़े कारनामे कर के बैठे हैं। है कोई माई का लाल जो इन सफ़ेद पॉश डॉनों के ऊपर कारवाही कर सके। कियोंके इनके साथ हुकूमत है बीजेपी वाले हैं संघ का तहफ़्फ़ुज़ घेरा है। अगर अतीक़ भी अपने हथियार डाल कर बीजेपी के सामने सरेंडर कर देतें तो वोह फ़ौरन पाक साफ़ हो जाते। बीजेपी एक ऐसी वाशिंग मशीन है जिसके अंदर जाते ही बड़े बड़े माफिया डॉन बाहुबली पाक हो जातें हैं।
अतीक़ और उनके भाई उनके अहल ऐ ख़ाना को जो ईज़ा दी जा रही है वोह महज़ उनके बीजेपी से किसी क़िस्म का कोई रिश्ता और ताल्लुक़ नहीं रखने की बुनयाद पर दी जा रही है।
नाज़रीन आपको तब्लीग़ जमात याद है और कोविद -१९ रजत शर्मा से ले कर तो तमाम अवामी चिड़ियाघर के लंगूर-लँगूरनियों ने कैसी दहशत फ़ैलाई थी। मौलाना साद साहब के विक़ार और अज़मत को ऐसे ही मटियामेल करने की कोशिस की थी। ऐसी ही अरे तुरे बदज़ुबानी से उनको मुखातिब किया जाता था यहाँ तक की उनको आतंकी तक क़रार दे दिया था। दरअसल यह मीडिया नहीं बल्कि हिन्दू आतंकिओं की बोली बोलने वाले उनकी ही बरादरी के आतंकी हैं। संघी आतंकी अस्लेह से मुस्लिम अवाम पर हमला करतें हैं और चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियाँ ज़ुबान से मुसलमानों के ख़िलाफ़ दहशत फैलाते हैं। उनके किरदार का क़तल करतें हैं बाक़ी का काम संघी दहशतगर्द और पुलिस पूरा कर देती है । इस मुस्लिम किरदार कूशी में ज़ाफ़रानी लंगूर लँगूरनियाँ तो हैं ही बल्कि मिल्लत के वोह गद्दार मुनाफ़िक़ भी शामिल हैं जो पैसों के लिए अपने मज़हबी भाई के किरदार का क़तल कर रहें हैं और जो असली माफियां हैं डॉन हैं बाहुबली हैं जिनको हुकूमत का तहफ़्फ़ुज़ हासिल है उनके ख़िलाफ़ बोलने की हिम्मत नहीं है।
नोट:
१. इस सहाफ़ी की तमाम उम्मत से गुज़ारिश है की संघियों, बीजेपी वालों और रेडिकल काफ़िरों का क़तल करने के बाद हुकूमत को चूना लगाने के बाद हरगिज़ हरगिज़ पुलिस के हाथ ना लगें। या तो अपनी मज़हबी मश्क इतना बढ़ा लें की पुलिस तुमको देख ही नहीं पाए तुम मौजूद रह कर भी गायब रहो या मुल्क छोड़ कर पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, दुबाई या किसी और मुल्क में पनाह पज़ीर हो जाएँ।
२. में सलाम करता हूँ ज़ाकिर नायक, मुजाहिद दाऊद भाई, छोटा शकील, नदीम सैफी और मक़बूल फ़िदा हुसैन को जिनका नाम आतें ही लंगूर लँगूरनियों के साथ साथ हुकूमत, क़ाफ़िर शिद्दत की जल भून के काली हो जाती है और अपने सर के बाल पकड़ के नोचने लगते हैं।
हाय हम नपुंसक साबित हुए।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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