Sunday, 1 September 2019

ज़लालत तेरा मुक़्क़दर, और बर्बादी तेरे वतन का नसीब बन जाएगा.

एवरीथिंग वाज़ प्लांड, फस गया मोदी पत्रकार (आचार्या) जुबेर के चक्रविहू में.  मोदी और बीजेपी को क्या लगता है एवान में ३०३ सीट्स उनकी मक़बूलियत के सबब मिली हैं.  गलत, उनको ये सीट्स मिली नहीं हैं बल्कि दी गई हैं.  और इस बात को साबित करने के लिए दी गई हैं की तुम पूरी तरह से इक़्तेदार में थे तुम्हारे महाज़ के पास कमो बेश तीन चौथाई से भी ज़ाइद एवान पार्लियमान थे फिर भी तुम अपने दिल की या मन मानी नहीं कर पाए.  उसमे दिखाना मक़सद था जिस ताक़त और क़ुव्वत के ज़ोर पे तुम अपने अना को क़ायम रखने का जज़्बा और ग़ुरूर रखते हो अगर मालिके हक़ीक़े चाहे तो बावजूद तमाम उसत, ताक़त के तुम को धुल में मिला सकता है. 

जिस तरह से इंतेखाबात से क़ब्ल इस सहाफी ने तजज़िया और एनालिसिस किया था जो की सच्चाई, उसके सर्वे और जांच पड़ताल के सबब सही थी.  बीजेपी को २०० के क़रीब और महाज़ को २२० से २३० सीटस तक का ताज़िया था.  लेकिन उसको गलत ठहराने के लिए जो हिमाक़त और जालसाज़ी  बीजेपी ने की उसमे अब वो खुद फस गई.  उनको फील वक़त लगा होगा की हम जंग जीत गए लेकिन तभी ना ही जंग ख़तम हुई थी और ना ही दिफ़ाई फ़ौजिओं ने हथियार डाले थे और ना ही अपनी हार तस्लीम की थी.  बिल आख़िर हुआ वही जो होना था या होना चाहिए था.  मोदी की हार

ऐसा ही ट्रिपल तलाक़ मुद्दे पे ज़लील हुआ है ये मोदी, बीजेपी और शिद्दत पसंद.  इस सहाफी ने इश्तेआल अंगेज़ी भरे मज़मून लिख कर उस मुद्दे को मज़ीद गर्म कर दिया था.  फिर बाक़िया काम पूरा किया ज़ाफ़रानी सहाफियों ने और शिद्दत पसंद हिन्दू तंज़ीम और तमाम बीजेपी के नुमाइंदों ने जिसके नतीजे में वो मुद्दा बन गया और बन गया मोदी, बीजेपी, ज़ाफ़रानी मीडिया और ज़ाफ़रानी ज़ेहनियत के लिए विक़ार और अना को क़याम रखने का सवाल.  फिर उन लोगों ने ज़बरदस्त मुहिम चला डाली और उस मुद्दे पे जंग जैसे हालात पैदा कर दिए और उस मुद्दे पे ज़ाफ़रानी शिद्दत पसंदों की गुफ्तू होने लगी अब तो किसी भी हालत में हमें इस बिल को पास करना ही होगा चाहे हमारी आधी कूव्वत इसमें सर्फ़ क्यों न हो जाए और हमारी तवज्जो वतन के हर मसाइल से क्यों न हट जाए लेकिन हम पहली नशिस्त पे ट्रिपल तलाक़ बिल पास कर के रहेंगे.  लेकिन ऐसा कहतें हैं ना, बेवकूफ दोस्त से अच्छा अक़लमंद दुश्मन होता है.  और मोदी जी बेवकूफ दोस्त साबित हुए उन्होंने एक छोटे से बिल के पीछे अपनी आधी कूव्वत और ताक़त बर्बाद कर दी और अपने खुद की अवाम पे तव्वज्जो और वतन के फलाही तरक़्क़ी याति कामों से हटा के सिर्फ ट्रिपल तलाक़ तक महदूत कर ली.  क्या हासिल हुआ इतना वतन को बर्बाद कर के, कुछ भी हासिल नहीं हुआ.  अब उस बिल पे सुप्रीम कोर्ट ने बेन लगा दिया और वो मुद्दा फिर से सुप्रीम कोर्ट में ज़ेरे ग़ौर है.

कश्मीर पे सिर्फ एक मज़मून ने मोदी की तक़दीर ही बदल डाली.  और वो बादशाह से दहशतगर्दों में शुमार होने लगा.  सिर्फ एक मज़मून गज़वा ऐ हिन्द को लेकर लिखा था और कर बैठे मोदी जी और उसका जाहिल चाणक्य भारतीय तारीख़ की सबसे बड़ी नादानी.  जिस कश्मीर को आईनी हुक़ूक़ हासिल थे और हुकूमते हिन्द के आइन ने एक ख़ास दर्जा दिया हुआ था उसको पामाल कर दिया.  अब इस जाहिल अनपढ़ आज के नए भारत के चाणक्य ने कश्मीर की दफा ३७० मंसूख करने और उसका खुदमुख्तारी का दर्जा ख़त्म करने की हिकमत इख्तियार की वो गैर जानिबदार और गैर क़ानूनी हिकमत थी.  बग़ैर कश्मीर के अवाम से राब्ता कायम किये जो दफा ३७० पिछले ७० सालों से मौजूद थी उसको महज़ ७ मिनिट में मंसूख कर दिया गया.  दूसरी बात ये दफा तमाम मुख़ालेफ़ीन को भरोसे में ले कर नहीं मंसूख किया बल्कि महज़ दो लोगों ने मिल के भारत का सर (कश्मीर) क़लम कर दिया.   और एक ही झटके में वो सर जो कभी भारत के साथ जुड़ा हुआ था उसको महज़ ७ मिनट में तन से जुदा कर दिया.

जिस कश्मीर को मोदी ने अपनी दहशत, बंदूक, सियासी क़ुव्वत और ताक़त के ज़ोर पे हथियाना चाहा अब वो मुद्दा अलामी बरादरी की पेशे नज़र हो गया.  मोदी लाख दावा करता रहे की कश्मीर पे उसकी हिकमत काम कर गई लेकिन तमाम आलम में जिस अंदाज़ में हिन्दू दहशतगर्द मासूम अवाम का एक-४७ से क़त्ल व ग़ारत कर रहे हैं उससे आलमी बरादरी बे ख़बर नहीं है.   बरोज़ हफ्ते (सनीचर) आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इस्लामिक कन्ट्रीज ने अपने क़रारदार में सख़्ती से दोहराया है और कहा है कश्मीर भारत का लाज़मी हिस्सा नहीं है बरक्स वो एक मुतनाज़ा हिस्सा है.  करारदार में जम्मू कश्मीर तनाज़िया की बेन अक़वामी सतह की हैसियत को तस्लीम किया  है. ओ.आई.सी .के जनरल सेक्ट्रेटिएट ने अक़वामे मुत्तहिदा में इस बात की तस्दीक़ की है. और कहा के कश्मीर को एक आलमी तनज़िया मानते हैं जब तक कश्मीरी अवाम को अक़वामे मुत्तहिदा की जानिब से उसकी निगरानी में अवाम की राये शुमारी नहीं हो जाती है. जिस अंदाज़ में दहशतगर्द अवाम को बन्दूक और अस्लेह के ज़ोर पे जब्र और तशद्दू कर रहे हैं उसपे भी सख़्त तशवीश और इज़हारे मज़म्मत पेश की गई.    

एक बात ये सहाफी साफगोई से मन्ज़रे आम करना चाहता है और नाज़रीन आप लोगों को कहना चाहता है की एक अनपढ़, जाहिल,  कितना भी ज़हानत का दावा करे लेकिन उसके अमल और वक़्त उसके ज़हीन या जाहिल होने का सबूत पेश कर देतें हैं.   दूसरी बात जिस चाणक्य के ऊपर मोदी जैसा दहशतगर्द और शैतानी अमलियत का मरकज़ पोंगा रहा था तो ये चाणक्य सम्राट चन्द्रगुप्त के दौर का नहीं है बल्कि एक ना इन्साफ, जालसाज़, धोखेबाज़, ज़ानी, मजमूई खुनी, दहशतगर्द ज़ेहनियत तानाशाह के नए भारत का चाणक्य है उसके पास उतना ही दिमाग होगा जितना के राजा के ज़हन में दहशत है. 

मोदी का सफ़ेद फुग्गा (गुब्बारा) जिसमे बे इन्तहा गन्दा मवाद ज़ाफ़रानी सहाफिओं, शिद्दत पसंदों ने भरा था ऐवान के अंदर जाते ही पंचर हो गया होगा तभी अमित शाह और पाकिस्तानी बेगम जैसे ग़ैर ज़रूरी ना जाइज़ अनासिर ऐवान से पैदा हो कर निकले.  फिर इन लोगों की पैदाइश ही जब ना जाइज़ हिकमत इख़्तियार कर के की गई थी तो ऐसी ना जाइज़ पैदावार जाइज़ काम कैसे कर सकतें हैं.  उनका हर  अमल अवाम के लिए दुशवारी और तकलीफकुन साबित होता है.   आज भारत की जी.डी.पी. २०१२- १३ में जहाँ १० थी वो धीरे धीरे ८ हुई फिर अब गिर के ५ पे आ गई.  तमाम बड़ी बड़ी कम्पनीज बंद हो गई.  कोई नई कंपनी भारत के अंदुरनी हालात के देखते हुए पैसा लगाने को तैयार नहीं है.  जितनी भी हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम बड़ी बैंक थी वो या तो एक दूसरे के साथ मर्ज हो गई या बंद हो गई. 

मोदी इंतेज़ामिया के हालात इतने बिगड़ गए की उसने रिज़र्व बैंक के पैसे को निकालना शुरू कर दिया वो पैसा जो के बुरे वक़्त का साथी होता है.  अवाम और ज़ाफ़रानी मीडिया इस बात को हलके में ले रहा है लेकिन ये सहाफी देख सकता है की भारत के अच्छे दिन नहीं बल्कि सख़्त बुरे दिन शुरू हो गए हैं.  जब किसी मुल्क़ में हालात साज़गार होतें हैं रोज़गार होता है ऐसी सूरत में हुकमत का काम काज चलता रहता है.  लेकिन अगर रिज़र्व बैंक के पैसे को निकाला मतलब बहार की इनकम बंद हो गई है और अब बुरे वक़्त में रखा हुआ पैसा इस्तेमाल करने की नौबत आ पहुंची.  कितने दिन तक रिज़र्व बैंक से पैसे निकाल के इस्तेमाल करोगे जब हुकूमत की आमदनी ही नहीं है तो रिज़र्व बैंक भी कब तक देगा.  उसमे पैसा भी तो सरकार ही जमा करती है. 

भारत के नसीब में इतनी बर्बादी काफी नहीं थी उसपे आसमानी आफ़ात और बलियात से भारत को पिछेल ५ सालों में सबसे ज़्यादा दो चार होना पड़ा है.  फिर भी अगर ज़ाफ़रानी सहाफिओं को अपने वतन की बर्बादी नहीं दिख रही है और वो ट्रिपल तलाक़, हिन्दू मुस्लिम के बाद अगर वो पाकिस्तान इमरान खान के पीछे भागेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब मुल्क़ से कोड़ी कोड़ी ख़त्म हो जायेगी और अवाम राम राज के जो सपने देख रहा है वो साकार होंगे और उस वक़्त पहुंच जायेगे जहँ पैसा नाम नहीं होता था और चीज़ों के बदले काम होता है.  गाये के बदले अनाज और अनाज के बदले पानी.  

ये ही इस नए भारत का नसीब होगा और सच्चाई भी.

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