राहुल श्रीवास्तव की रिपोर्ट
नई दिल्ली,
01 सितंबर
2019, अपडेटेड
18:48 IST
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) कलेक्शन के मोर्चे पर मोदी सरकार को एक बार फिर
झटका लगा है. अगस्त महीने में जीएसटी कलेक्शन फिर 1 लाख करोड़ रुपये ने नीचे रहा है.
राजस्व विभाग (Department of Revenue) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में
कुल 98,203 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ है.
राजस्व विभाग की मानें जीएसटी के जरिये अगस्त में कुल 98,203 करोड़ रुपये मिले
हैं, जिसमें 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सिर्फ इंपोर्ट से मिली है.
जीएसटी
में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा
आंकड़ों के मुताबिक कुल
जीएसटी कलेक्शन 98,203 करोड़ रुपये में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा है. 98 हजार
करोड़ में से 17,733 करोड़ से अधिक की राशि केंद्र सरकार की है, जबकि 24,239 करोड़
राशि राज्यों को मिली है, जबकि 48,958 करोड़ रुपये आईजीएसटी से मिले हैं.
वहीं राजस्व विभाग के मुताबिक जुलाई से लेकर 31 अगस्त 2019 तक कुल 75.80 लाख
लोगों ने जीएसटीआर 3बी के तहत रिटर्न भरा है. जिससे केंद्र सरकार को करीब 40 हजार करोड़
रुपये राजस्व मिला है.
पिछले
अगस्त की तुलना में 4.51% का इजाफा
मालूम हो कि वस्तुओं और
सेवा के ऊपर लगने वाले कर के दो हिस्से होते हैं, जिनमें से एक हिस्सा केंद्र और दूसरा
राज्य सरकार के पास जाता है. इससे पहले पिछले साल अगस्त महीने में कुल 93,960 करोड़
रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था. पिछले साल के अगस्त महीने की तुलना में इस साल जीएसटी
कलेक्शन में 4.51 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
गौरतलब है कि जुलाई-2019 में यह राशि 1,02,083 करोड़ रुपये रही थी. जून में
यह राशि 99,939 करोड़ रुपये रही थी. इस तरह से जून और जुलाई की तुलना में अगस्त में
गिरावट दर्ज की गई है.
जीडीपी
के मोर्चे पर भी बड़ा झटका
गौरतलब है कि आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को जीएसटी के पहले जीडीपी का झटका
लगा. देश की विकास दर में गिरावट दर्ज हुई है. पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकास
दर 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी हो गई. अगर सालाना आधार पर तुलना करें तो करीब 3 फीसदी
की गिरावट है. एक साल पहले इसी तिमाही में जीडीपी की दर 8 फीसदी थी.
सहाफी जुबेर का तज़िया
अनपढ़, जाहिल गवाँर और अक़लमंद ज़हीन तालीम अफ़्ता दोनों के लिए हुए फैसलों को वक़त साबित कर देता है की कौन अनपढ़ है और जाहिल और कौन ज़हीन.
किस का फैसला सही था और किस का ग़लत. मोदी ने जितने भी फैसले लिये उन सभी के तवील अंदेशी नताइज
तबाह कुन साबित हुए और भयानक आने लगे. हाल ही में जी.डी.पी. के बाद जी.अस.टी. का कलेक्शन इस तरह से ज़बरदस्त तरीके से गिरना हुकूमत के लिए किसी हार्ट अटैक और झटके से कम नहीं है.
ज़रकार बंदी (नोट बंदी): नोट बंदी में मोदी का कहना था की इससे दहशत पे लगाम लगेगी, क्या ख़ाक लगाम लगी बल्कि नोट बंदी उसके खुद की कौम के छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए दहशत बन गई कई कारोबार बंद हो गए, अवाम का रोज़गार नौकरी जाती रही.
ट्रिपल तलाक़: क़ानून बनाया था उसपे दलील दी थी की वो मुस्लिम मस्तूरात को तहफ़्फ़ुज़ दे रहा है.
जबकी उसके क़ानून के नताइज तहफ़्फ़ुज़ वाले नहीं थे बल्कि मुस्लिम मस्तुरातों को तबाह करने वाले हैं.
और अब वो बिल फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.
दफा
३७०: कश्मीर के आईनी हुक़ूक़ का क़त्ल किया और दफा ३७० मंसूख़ की लेकिन बोहोत ही ग़ैर कानूनी और आईनी खिलाफवर्जी कर के, ना तो पाकिस्तान, ना कश्मीर के अवाम और ना ही भारत के ऐवान के रकने पार्लिअमान को भरोसे में लिया गया.
मुख़ालिफ़ों की जमात को तो छोड़ दो खुद अपनी तंज़ीम के राकुनों को नहीं बताया गया महज़ दो लोगों ने फैसला कर लिया.
दूसरी बात पार्लियामेंट का इजलास ख़तम होने के महज़ दो दिन पहले इतना बड़ा फैसला बगैर अजेंडे में शामिल किये कैसे ले लिया.
अब वो मसला अधर में लटका है.
NRC:
जिस NRC के नाम पे अमित शाह जैसा जाहिल बोहोत ही पोंगा रहा था उसमे ८ लाख के करीब तो हिन्दू ही नहीं हैं मतलब वो सब घुसपैठिये हैं. जहाँ ४५ लाख लोगों को बाहरी बताया था फाइनल लिस्ट आने पे महज़ वो १८ लाख रह गए उसमे भी ८ लाख तो हिन्दू ही हैं. इस लिस्ट में और कमी आएगी जिन लोगों ने फॉरेन ट्रिब्यूनल में अर्ज़ी दी है उनका नाम भी NRC लिस्ट में शामिल हो जाएगा. कुल मिला के आखिर तक पहुंचने पे सिर्फ १ या २ लाख लोग ही बचेंगे जिनका नाम NRC में नहीं होगा और वो सभी हिन्दू ही होंगे. फिर उन सबका क्या करेगा दहशतगर्द
एरिया कमेंडेन्ट. क्या उन सबको मौत के घाट उतारेगा अमित शाह और उसके दहशतगर्द.
फिर क्या उसका वीडियो वायरल करगें के किस तरह से AK - ४७ से एक लाइन में खड़ा कर के हिन्दू दहशतगर्दों ने अपने ही मज़हब के लोगो को मौत के घाट उतार दिया. वैसे भी हिन्दू आतंकी तो ज़ालिम और हैवानी ज़ेहनियत के होते ही हैं. अब तो इन दहशतगर्दों का असर बच्चो पे भी इतना पढ़ने लगा है.
अगर उनके सामने मोदी या अमित इतना बोल दो तो सिहर उठते हैं और ख़ौफ़ज़दा अपनी मम्मी के आँचल में छुप जातें हैं.
हर उस बात का नतीजा उल्टा हुआ है जसको मोदी बोलता था की देश हित में किया हुआ फैसला है. चाहे वो ट्रिपल तलाक़ पे क़ानून बनाना हो आर्टिकल ३७० मंसूख करना हो, जी.अस.टी. NRC हो सभी के दूरंदेश नताईज तबाहकुन
मिल रहे हैं.
भारत को अगर किसी ने सबसे ज़्यादा तबाह किया है तो वो है मोदी और उसके जाहिल चमचे जिनको सिर्फ तलवारबाज़ी आती है दहशत फैलाने, खून खराबे के ऊपर उनसे बात करवा लो देखो कैसी बड़ी बड़ी बातें करतें हैं. हम एक एक मुसलमान को ख़तम कर डालेगें, हम भारत को हिन्दू राष्ट्र बनायेगे. लेकिन अगर तुम अपने खुद के २५ करोड़ अवाम को ख़तम करोगे तो वो भी तो तुम अपने देश का ही नुकसान कर रहे हो.
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