Sunday, 15 September 2019

बर्रे सग़ीर आ पंहुचा जंग के मोहने पर.

अज़ीज़ नाज़रीन,
आज जिस मुद्दे पे आप हज़रात के रू बरू आया हूँ वो हिंदुस्तान पाकिस्तान के दरमियान पैदा कशीदगी के ऊपर है.  आज के मौजूदा सूरते हाल में ये बात वाज़े हो चुकी है की कश्मीर मुद्दा सिर्फ और सिर्फ जंग के ज़रिये ही हल होगा.  और जिस अंदाज़ में आलमी बरादरी कश्मीरी अवाम पे हिन्दू जब्र, ज़ुल्म और ज़ाफ़रानी हुकूमत की दहशत के ख़िलाफ़ ख़ामोशी इख़्तेयार की हुई है उससे साफ़ तोर पे मसला ऐ कश्मीर जंग से हल होने की जानिब इशारा हो रहा है.  वज़ीरे आज़म इमरान ख़ान की जंग टालने और कश्मीर मसला बात चीत के ज़रिये पुर अमन हिकमत से हल करने की हर मुमकिन कोशिश ना काम साबित हो गई.

फिर भी जंग का आगाज़ पकिस्तान नहीं करेगा बरक़्स उसके ऊपर हिंदुस्तान की जानिब से जंग मुस्सलद की जायेगी.  नाज़रीन इस सहाफी ने अपने एक मज़मून  अब हम भी जंग ही चाहते हैं. में इस बात को साफ़ गोई से मंज़रे आम किया है जो भी जंग करने में ताजाऊस करेगा वही ख़सारे में रहेगा और हार उसी की जानिब मुतवज्जो होगी.

इस जंग से और जोहरी जंग (Atomic War) से पाकिस्तानी और किसी भी मुस्लिम को क़त्तई ख़ाइफ़ होने की ज़रुरत नहीं है.  इस जंग में वही मारे जायेगे जो काफिरों के हम क़दम होंगे और वो मुनाफ़िक़ों के गिरोह से होंगे.  इस जंग में हर उस इंसान को अमान होंगी जो ज़ेरे सब्ज़ परचम होगा, ख़्वाहा वो एक हिन्दू ही क्यों ना हो या बालानाथ मंदिर के पुजारी ही क्यों ना हों.  वही दूसरी तरफ हर वो मुसलमान मारा जाएगा जो काफिरों के साथ ज़ेरे ज़ाफ़रानी परचम ज़ेहनी या ज़ाहिरी जंग में शामिल होगा.   जब तूफाने नूह में एक कमज़ोर बुढ़िया बच सकती है और उस तूफ़ान की ज़द में नहीं आ सकी तो आज के दौर में कुफ्र और इस्लाम की इस जंग में कैसे एक मुसलमान उस जंग की तपिश में आ सकता है जो हक़ और बातिन; ज़ालिम और मज़लूम;  इन्साफ और ना इन्साफ; काफिर और मोमिन के माबेन होने वाली है.  विडिओ देखिये.      
एक और मज़मून गज़वा ऐ हिन्द के आगाज़ होने का पूरा इमकान. में इस ग़ज़वे की निस्बत से जंग शुरू होने की मुमकिना वक़्त और महीने से आगाही की है.  जैसा की अपने हर मज़मूनों में ये सहाफी इस बात को मंज़रे आम करता रहता है की भारतीय हुक्काम और फौजी बेड़ा अपने आपको बोहोत ही कवि और ताक़तवर तस्सव्वुर कर के ग़फ़लत में जंग का आगाज़ करेगें और वही हो रहा है.  दूसरी बात जो हर वक़्त ये सहाफी कहता है की जब हिन्दू दहशतगर्दों के सख़्त बुरे दिन शुरू होंगे उनकी अक़्ल के ऊपर पत्थर डाल कर उसको ख़पत कर दी जायेगी.  हुन्दुस्तानी हुक्काम की सोचने समझने की कुव्वत और ताक़त छीन ली जायेगी, और वो एहमकों की तरह फैसले लेना शुरू कर देंगे.
 
संघ परिवार की सियासी जमात बीजेपी ने २०१९ के इंतेखाबात में जालसाज़ी और फरेब के ज़रिये ३१३ पार्लिअमानी सीटस जीतने की मंसूबा बंदी की थी.  फिर उस इन्तेख़ाब को ज़ाफ़रानी शिद्दत पसंद सहाफिओं ने धर्म युद्ध का नाम दे दिया और इश्तेआल अंगेज़ी भरी ख़बरें शाया करना शुरू कर दी. लेकिन उस मालिके हक़ीक़ी को तो कुछ और ही मंज़ूर था ना ही बीजेपी को ३१३ मिले और ना ही उसके महाज़ को बरक्स वो हो गए ३६५.  जिस तरह से ३१३ काबिज़ हुए थे और हर रोज़ के एक बुत ३६५ को एक एक कर के चूर चूर कर दिया गया वही सब अब होगा.  इस ३६५ शैतानों में से कोई भी इतनी कुव्वत और उसत नहीं रखता है की वो इस्लाम बनाम कुफ्र की इस जंग में ना सिर्फ हिस्सेदार बने बल्कि फतह हासिल करे.

फिर जिस तरह से मालिके हक़ीक़ी ने इन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की ३१३ की हिकमत को ३६५ में तब्दील कर दिया उसी तरह से इनकी अक़ल को ख़पत कर के इनको पहला हमला करने पे मजबूर कर दिया जाएगा.  इनके पास और कोई दूसरा रास्ता ही नहीं होगा.  उसके बाद दिफ़ाई फौजें अपना दिफ़ा ना सिर्फ बखूबी करेंगी बल्कि  हिन्दू दहशतगर्दों के ऊपर काबिज़ और ग़ालिब होंगीं.  फिल वक़्त हिंदुस्तानी फ़ौजिओं  को अपनी जीत नज़र आएगी लेकिन वो उतनी ही दूर होंगी जैसे की रेगिस्तान में पानी तलाशते हुए इंसान को धूप में दिखता हुआ पानी का अक्स.  और इस सराब को पाने के लिए जैसे जैसे हिन्दू फौजी आगे की जानिब बढ़ते जायेगी दिफ़ाई फौजी उनको हलाक करते जायेगे.  हत्ता की वो लाहौर के नज़दीक तक पहुंच जायेगें लेकिन जंग फतह करने में क़ासिर रहेंगे  बिल आख़िर जंग में हार का बाइस बनेगें.

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