Friday, 13 September 2019

एहले हूनूद हूजूमी दहशत का अगला निशाना

ये सहाफी अपने कई मज़मूनों में इस बात का खत्शा और इज़हारे फ़िक्र ज़ाहिर कर चूका है की ज़ाफ़रानी हुकूमत की नाहीली, निकम्मे और सुस्त रवैये की सज़ा मुसलमानों के बाद एहले हूनूद को चुकानी पड़ेगी.  ये सहाफी बिलकुल सवाल पूछेगा बॉलीवुड की नचौड़ी और दहशतगर्दों का मुहाफ़िज़ शिद्दत पसंद अशोक पंडित से, हिन्दू अवाम पे बढ़ते हुए हूजूमी तशद्दुत के मुआमलात पे अब उनका क्या कहना है.   हुकूमत तो हूजूमी दहशत के खिलाफ कोई ख़ैर ख़्वाहा हिकमते अमली इख़्तेयार करने को तैयार नहीं है क्योंकि इस दहशत में हलाक़ होने वाले तक़रीबन सभी मक़तूल मुसलमान हैं.  एहले हूनूद की हलाकत के बढ़ते हुए वाक़ेयात के बाद क्या अभी भी ये लोग समझतें हैं की हूजूमी दहशत पे अलहदा क़ानून बनाने की कोई ज़रुरत नहीं है.  क्या ये लोग अभी भी अपनी बात पे मुस्तहकम हैं और दानिशमंदों के ज़ाफ़रानी वज़ीरे आज़म को लिखे हुए खत की मज़्ज़म्मत और तनक़ीद करतें हैं.
दिल्ली के साहिल सिंह की हूजूमी दहशत में हलाकत के बाद, एक ७० साला पंडित ब्रह्मिन को हुजूम ने मार गिराया है.  पुलिस ने बताया की बरोज़ जुमेरात सूबे उत्तर प्रदेश के पनहाई गावं में इस हिन्दू मज़हबी रहनुमा के ऊपर २० से ४० अफ़राद के हुजूम ने बच्चा चोरी के इलज़ाम में हमला कर के उसको पीट पीट के हलाक कर दिया.   
बक़ौल मानिकपुर स्टेशन हाउस अफसर (अस.एच.ओ.) के.के. मिश्रा के, मक़तूल राम भरोसे शाहजहांपुर से था, और एक मंदिर में रहता था.  उसने पड़ोस के गांव पनहाई में क़दम रखा तो अवाम में एक अफवाह फ़ैल गई की अतराफ़ में एक बच्चा चोर घूम रहा है.  अवाम के दिलों दिमाग में जो आलूद भरा गया था उसके तहत और उसके पैरहन की वजह से उसके ऊपर शक व शुबाहा हुआ.  फिर जब उससे सवाल जवाब का सिलसिला शुरू हुआ और उससे इस गांव में आने की वजह पूछी तो हुजूम में से कई अफ़राद बेचैन हो गए और उसको पीटना शुरू कर दिया.  इस तरह उसको ३० मिनिट तक पीट पीट के हलाक कर डाला.
राम को नज़दीकी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया जहाँ से उसको कावेरी के ज़िले हॉस्पिटल के सुपुर्द कर दिया.  लेकिन वो हॉस्पिटल में पहुंचने से पहले ही फ़ौत हो चूका था.  पुलिस ने अज़्म किया है की वो इस हमले में शामिल लोगों की पहचान कर रही है और जल्द अज़ जल्द उन सभी की गिरफ्तारी होगी. पुलिस सी.सी टीवी फुटेज भी खंगाल रही है या किसी ने इस हमले की फ़ूटेजे या वीडियो वग़ैरा बनाई होगी तो उससे भी राब्ता क़ायम किया जाएगा.  फिल वक़्त हमने गुमनाम हमलावरों के खिलाफ (FIR) दर्ज कर ली है. पुलिस अफसर ने मज़ीद इस हमले के बाद कहा. 

यूं तो लचिस्तान के मुख़्तलिफ़ हलकों से हजूमी दहशत की ख़बरे आम हैं.  लेकिन सूबे उत्तर प्रदेश में बच्चा चोरी के इस तरह के हमलों के अक़्स ख़ासे नुमाया हैं.  गुजिस्ता एक पखवाड़े कानपुर और बुंदेलखंड में किसी एकेले फर्द पे २० से ज़ाइद हजूमी दहशत के मामलात दर्ज किये गए हैं.  राम मंदिरों और मठों में कई सालों से रहता था.  पुलिस ने बताया.
सहाफी जुबेर का तजज़िया शायद ही कभी ग़लत होता है.
दिसम्बर २०१८ के बाद से यूं तो कई हिन्दू भी हूजूमी दहशत के शिकार हुए हैं.  लेकिन जो कुछ ख़ास वाक़ियात हर आम हिन्दुस्तानी के ज़ेहन में दहशत पैदा कर के हलाक़ कर रहें हैं उनमे से एक है दिल्ली के साहिल सींग की हूजूमी दहशत से हलाकत.  और अब ये पंडित की हलाकत.  में आलूद, ज़हर और मवाद की अक्सरियत महसूस कर सकता हूँ  जो हिन्दू दहशतगर्दों को उनके तरबियती इदारों शाखों में मुसलमानों के खिलाफ भरा जाता है, जिसको कई दफा ज़ाफ़रानी हुकूमत से इन जैसे अनासिरों को इख़्तियार में करने को कहा है नहीं तो आपको भी इन लोगों की तपिश सहना पड़ेगी. 
में पुर एतेमाद था देर सवेर ये इंसानी हुजूम इंतेज़ामिया के लिए तकलीफ का सबब रहेगा.  ये लोग कोई आम हिन्दुस्तानी नहीं हैं बरक्स ये ख़ास लोग हैं जो अपने तरबियती इदारों में ज़हर, नफरत और तास्सुब के दरिया में तरबियत की डुबकी ले कर आम अवाम के दरमियान आएं हैं.  अगर इन लोगों को कोई मुसलमान हलाक करने के लिए नहीं मिलेगा तो ये लोग अपने खुद के लोगों को हलाक करना शुरू कर देंगे.  इस तरीक़े के हालात या उसूल नशे के आदी इंसान की नज़रिये पे आधारित है.  अगर कोई शख्स किसी चीज़ का आदी हो जाता है फिर अगर उसको वो नहीं मिलती तो उसको पाने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार रहता है.

फिर से एक बार मेरे कई नज़रियात और अनालिसिस से ये साबित हो गया की किस तरह से ज़हर और नफरत ने इन नशे के आदी दहशतगर्दों के ज़हन पे क़ब्ज़ा कर लिया है और क़त्ल करने का आदी बना दिया की अब इनको आला किस्म की हिन्दू को भी हलाक करने से कोई गुरेज़ नहीं है.
ये सहाफी तो हर मुद्दे पे ज़ाफ़रानी हुकमरानों को रौशनी दिखाता था और आगाही देता था लेकिन ये लोग तो उस रौशनी को ही बंद कर देतें हैं जो रहा गुज़र होती है.  मेरे सख्त तन्क़ीदी लेकिन सबक आमोज़ मज़मूनों से ज़ाफ़रानी हुक्काम सबक़ तो ना ले सके बरक्स उन्होंने मेरा हिंदी ब्लॉग https://zuberjournalist.blogspot.com/  ही ब्लॉक कर डाला.

हमारे समाज के एक कहावत है "सीख बा को दीजिये, जा को सीख सुहाए.  ना दीजियो सीख बांदरा को बया का घर भी जाए."
See in English

Hindus are now the target of Mob.

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