Thursday, 5 September 2019

हुजूमी दहशत से अब एहले हुनुद भी ख़ाइफ़

अज़ीज़ नाज़रीन,

आपको याद होगा हुजुमी दहशत के खिलाफ जब बॉलीवुड की नचौड़ी और देशतगर्दों का मुहाफ़िज़ पंडित ने मोदी को लिखे गए दानिशमंदों के एक एहतेजाजी ख़त के ऊपर मज़्ज़म्मती ख़त लिखा था. उसके ऊपर इस सहाफी ने सख़्त अलफ़ाज़ में इन दहशतगर्दों के मुहाफ़िज़ और मज़्ज़म्मती ख़त लिखने वालों को लताड़ा था.  अपने मज़मून में इस सहाफी ने साफ़ अलफ़ाज़ में लिखा था अभी हूजूमी दहशत में हलाक़ होने वाले सिर्फ मुस्लिम और दलित हैं इसलिए बॉलीवुड की नचौड़ी और दहशतगर्द पंडित मज़्ज़म्मत कर रहे हैं.  लेकिन जब अक्सरियत तपका ऐसे हमलो से मुत्तासिर होना शुरू होगा तब ये लोग खुद घर से बहार आएंगे और कहेंगें की कुछ तो गलत हो रहा है.  एक और मज़मून में मेने इस बात को साफ़ गोई से मन्ज़रे आम किया है अभी अवाम हजूमी दहशत मचाने में अभी लुत्फ़ अन्दोज़ हो रहा है क्योंकि हलाक़ होने वाले मुस्लिम हैं लेकिन अगर इसको नहीं रोका गया तो जल्द ही उसकी तपिश अक्सरियत तपके को महसूस होगी. 

नाज़रीन पिछले दो एक महीनों में जिस अंदाज़ में हुजूम ने बिहार, झारखंड, ओर्रिसा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरयाणा, राजिस्थान में ख़ुद ही अक्सरियत तपके से ताल्लुक़ रखने वाले अफ़राद को मुस्लिम के मुग़ालते में हलाक़ कर दिया उससे अक्सरियत तपका ख़ासा परेशान और शदीद ग़मगीन है.

हाल ही में दिल्ली का रहने वाला साहिल बना हूजूमी दहशत का अगला शिकार.   यूं तो साहिल आला किस्म का हिन्दू और ज़ात का ठाकुर था, लेकिन उसको मुस्लिम समझ के ग़फलत में पंडितों की बस्ती से गुजरने पे हुजूम ने हलाक़ कर दिया.  हिन्दू मज़हब में ब्राह्मण या पंडित सबसे आला किस्म की हिन्दू ज़ात होती है.  उसके बाद सब उससे अदना होतें हैं.  शूद्र या जिसको अछूत तस्सव्वुर कर के आला किस्म के हिन्दू उनका इसतेसाल करतें हैं, वो निहायत ही अदना किस्म के हिन्दू तस्सव्वुर किये जातें हैं.  उनको समाज में कुछ इख़्तियार हासिल नहीं होते बरक्स वो एक जानवर की हैसियत से आला हिन्दू ज़ात का हर ज़ुल्म, बर्बरियत अपना मुक्क़द्दर तस्लीम कर के बर्दाशत करतें हैं.  आला ज़ात के हिन्दू उनकी बेहेन बेटिओं को जिन्सी ग़ुलाम की हैसियत से अपने हरम की ज़ीनत बना के रखतें हैं.  ऐसा करने के लिए उनको पूरा मज़हबी और समाजी इख़्तयार हासिल होतें हैं.   और ये  समाज का वही तपका हैं जो हूजूमी दहशत के खिलाफ मोदी को लिखे गए दानिशमंदों के ख़त के ख़िलाफ़ एहतेजाजी ख़त लिखते हैं.   भले ही खुद नचोड़ों के खानदान से ताल्लुक़ रखते होंगे दहशत को फरोग देने वालों में से होंगे लेकिन अगर किसी दानिशमंद ने ज़ुल्म और शिद्दतपसंदी के खिलाफ मोहीम शुरू की हैं तो इन जैसे आला ज़ात के समाजी कीड़ों का फ़र्ज़ हो जाता है की उस मोहीम को तबाह कर दिया जाए नेस्तनाबूत कर ख़त्म कर दिया जाए.  ताके शूद्र हमारे पैरों की ज़ीनत बना रहे और उनकी बेहेन बेटियां हमारी नफ़्सानी और जिन्सी ना जाइज़ ख्वाहिशात को पूरा करती रहें.

साहिल ठाकुर सिर्फ इस भयानक नफरत और हुजूम की दहशत का अगला का शिकार बना  क्योंकि वो पंडितों की गली में चला गया था.  और उसको मुस्लिम तस्सुवर कर के हुजूम उसके ऊपर हमलारेज़ हो गई.  नाज़रीन आपको मालूम होगा और इस सहाफी ने अपने कई मज़मूनों में इस बात को कलमबंद किया हैं की गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, कठुआ, हरयाणा, राजिस्थान में मुस्लिम बच्चिओं पे हिन्दू शिद्दत पसंद गिरोह गर्दना ज़िना करते वक़्त उन हिन्दू दरिंदों से रेहम की भीख मांगती हुई, अपनी इज़्ज़त की अमान मांगती हुई उस अकेली मजबूर बच्ची को ये बोलते थे की हम तुम पे तशद्दुत और ज़िना बिल जब्र कर रहें हैं क्योंकि तुम मुस्लिम हो और गाये  का गोश्त ख़ाते   हो.  उसी शिद्दत और ज़हर का अब मज़ा खुद हिन्दू चख रहें हैं.  साहिल ठाकुर को हुजूम ने ये कह कर हलाक़ कर दिया के ये पंडितों की गली हैं और तुझ जैसे मुस्लिम की जुर्रत कैसे हुई के पंडितों की गली में घुस जाए.  अब उन दहशतगर्दों को क्या पता था की जिस साहिल को वो मुस्लिम समझ के पीट रहें हैं वो असल में आला ज़ात का हिन्दू ठाकुर हैं. 

साहिल पिटाई के बाद अपनी वालेदा संगीता सिंह की आगोश में आ कर गिर गया और कहने लगा उन्होंने मुझको गलत इंसान समझ के मारा और दम तोड़ दिया.  संगीता सिंह के तीन बच्चे हैं बेटी अंजलि सिंह, मक़तूल साहिल सिंह और बेटा आदित्य सिंह. उसकी वालेदा का अपने एकलौते कमाने वाले फर्द और घर के सबसे बड़े बेटे साहिल की इस बेदर्द हलाकत के सबब रौ रौ के बूरा हाल हैं.  साहिल के वालिद अलील हैं और घर चलाने की तमाम ज़िम्मेदारी साहिल के कन्धों पे थी.    अब जब पता चला की साहिल मुस्लिम नहीं बल्कि एक ठाकुर हिन्दू हैं तो शुरू हो गया तशवीश और नदामती, ताज़ियाती पैग़ामात का सिलसिला.  

जैसा की इस सहाफी ने अपने गुजिश्ता तमाम मज़मूनों में इज़हार किया है, की जिस बेरहमी से तुम लोग मुस्लिम अवाम को मार रहे हो जब तुम अपनों को मारोगे तब तुमको इस दर्द का इल्म होगा.  फिर जब अवाम को पता चला की साहिल सिंह मुस्लिम नहीं हिन्दू था तो कहने लगे जो कुछ भी हुआ गलत हुआ और ऐसा नहीं होना चाहिए था.

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