अज़ीज़ नाज़रीन,
"भगवा लव ट्रैप" के जाल में फंस कर एक और मुस्लिम से हिन्दू बनी ख़ातून ने खुदकशी कर ली है। मुरादाबाद की रहने वाली २२ साला सना की शादी रेहान से हो गयी थी। इसी बीच सना "भगवा लव ट्रेप" का शिकार हो गई और ससुराल के पास साजिश के साथ आ कर रहने वाले अजय के साथ ट्रेप में आ गई। उसने अपने शोहर रेहान से तलाक़ ले लिया और मज़हब तब्दील कर मुर्तद हो कर अजय के साथ फेरे ले लिए। और वोह सना से सोनाम और मुसलमान से काफ़िर हो गई। लेकिन शादी के दो महीने के अंदर ही उस मुर्तद को दिन में चाँद तारे नज़र आने लगे। जब उसके साथ बा एक वक़्त १०-१० और १२-१२ काफ़िर ज़िना करते उसकी आँखों पर से जादू का पर्दा हटा तो उसने महज़ दो महीने के अंदर ही खुदकशी कर ली।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के मुग़लपुरा का गोकुलदास मोहल्ला आज कल साजिश की नई इबारत लिख रहा है। यह रहने वाली शन्नो बेगम को पुलिस ने फोन पर बताया की उसकी बेटी सना उर्फ़ सोनाम ने फांसी लगा कर अपनी तल्ख़ ज़िन्दगी को ख़तम कर लिया है। शन्नो बेगम के मानो जिस्म से जान ही निकल गयी। वोह फुट फुट कर रोने लगी।
वहीँ मुसलमान से हिन्दू हुई सोनम की मुस्लिम माँ शन्नो बेगम ने कहा की उनकी बेटी खुदकशी नहीं कर सकती उसका बेरहमी से क़तल किया गया है। मुसलमान से हिन्दू हुई सोनम के मुस्लिम भाई उस्मान ने भी यही इलज़ाम लगाया है। दोनों माँ बेटे ने कहा की उसके हिन्दू शोहर ने सोनाम को क़तल किया है।
वहीँ ढिटाई दिखाते हुए अजय दिवाकर बोला इलज़ाम बेबुनयाद फ़र्ज़ी और झूठे हैं। अजय दिवाकर मुस्लिम से हिन्दू हुई सोनाम का हिन्दू शोहर ५६ इंची सीना दिखाते हुए पुलिस की मौजूदगी में बेख़ौफ़ और पुर इत्मीनान नज़र आ रहा था मानो उसने कोई जंग फतह कर ली हो और उसके हाव भाव से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था की उसको इन्तेज़ामियाँ पुलिस और हुकूमत का पूरा ताऊन हासिल है और रहेगा।
अजय दिवाकर जो एक बजरंग दल का दहशतगर्द है और उसको यह हदफ़ दिया गया है की वोह मुस्लिम बच्चिओं और नई शादी हुई लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर हिन्दू करे वोह शादी कर के घर से फरार हो गया था। सोनम के साथ अजय की बुआ जो दुर्गा वाहिनी की कारकून है हर रोज़ नए नए काफिरों से ज़िना कारी करवाती थी। जब फांसी की खबर अजय के पास पहुंची तो वोह वापिस आया।
पुलिस का किरदार भी इस मसले में काफी मनफ़ी है। वोह शक और शुकूक की हालात में है की अजय की बात पर यक़ीन करे की वोह बेगुनाह है या सोनम के मुस्लिम अहले ख़ाना की बात पर यक़ीन करे।
अब ज़रा सिक्के का दूसरा रूख़ देखिये अगर कोई हिन्दू लड़की बालिग़ किसी मुस्लिम से शादी करती है और उसके वाल्दैन झूटी शिकायत करते हैं की हमारी लड़की को बेहला फुसला कर लव जिहाद में फांसा लिया गया है तो पुलिस उस मुस्लिम की ग्रहस्ती तबाह कर देती है। भले ही लड़की ज़िंदा है और खुद बोले की में अपनी मर्ज़ी से अपने शोहर के साथ रहना चाहती हूँ लेकिन पुलिस कोई भी दहशतगर्दी का झूठा इलज़ाम लगा कर शोहर और उसके वाल्दैन को गिरफ्तार कर मुस्लिम होने के सज़ा लड़की को देती है ताके वोह इस्लाम से घर वापिसी कर ले।
और अगर क़िस्सा ऐसा होता की हिन्दू शोहर को छोड़ कर मुस्लिम लड़के से हिन्दू लड़की ने शादी की होती तो अभी तक हिन्दुत्वादी उधम मचा देते। भले ही लड़की ज़िंदा होती लेकिन उस मुस्लिम लड़के के पूरे ख़ानदान को तबाह कर दिया जाता। सास बुआ ससुर देवर नन्द सभी को जेल में डाल दिया जाता।
लेकिन इस मामले में लड़का हिन्दू है और बजरंगदल का दहशतगर्द बुआ दुर्गा वाहिनी की सरगना है जो मुस्लिम बच्चिओं के पीछे लगी रहती है और उनको बलगला कर हिन्दू नौजवानों से शादी करवाती है तो उनको पुलिस भी गिरफ्तार नहीं कर रही है। पुलिस पशो पेश में है की कौन सच्चा है कौन झूठा। कियोंके साधू का दबाव है की कारवाही मामूली करना। लड़की मुस्लिम से हिन्दू हुई है और मर गई है लेकिन लड़का ज़िंदा है और हमारा आदमी है।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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