Sunday, 11 June 2023

दो लंगूरों को दिफ़ाई फ़ौजिओं ने किया ढेर।

अज़ीज़ नाज़रीन,

दिफ़ाई फ़ौजियों की लंगूर लँगूरनियों को मौत देने की दूसरी क़िस्त का आगाज़ हो चूका है।  पहले ही झटके में दो लंगूरों की मौत हो गई है।  अभी ११ या १२ रोज़ क़ब्ल जब झूठी बेबुनयाद थेटर "केरल स्टोरी" पर लंगूर लँगूरनियाँ बोहोत उधम मचा रहे थे तभी इसी ब्लॉग पर लिखा था। कोविद-१९ में बोहोत उधम मचाया था इन लंगूर लँगूरनियों ने मौलाना साद को आतंकवादी बोल दिया था। रोहित सरदाना, रिपब्लिक टीवी का एडिटर इन चीफ अलोक शर्मा और बोहोत से लंगूर मारे गए थे।  बचे कूचे इस बार में मारे जायेगें।

वोह बात शायद दुरुस्त साबित हुई अभी ११ रोज़ भी नहीं गुज़रे की नतीजे मिलने लगे।  नियोडा के लंगूर-लँगूरनियों के ऊपर मौत के काले बादल मडराने लगे और दूसरी क़िस्त का हो चूका है आग़ाज़।

दिल्ली से नज़दीक यूपी के नोएडा में दो लंगूरों की मौत हो गई है. ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के खूंखार लंगूरों की टोली में काम करने वाले दोनों लंगूर चिड़ियाघर में ख़ून ख़राबा (ख़बरनामा देने) के बाद  बाइक से घर जाने के लिए निकले थे.   मूर्तफ़ा रोड पर उनकी बाइक को पिकअप बस ने टक्कर मार दी. इस हादसे में दोनों लंगूर शदीद ज़ख़्मी हो गए. उन्हें इलाज के लिए ज़ाती शिफ़ा ख़ाने में भर्ती कराया गया था. मगर, यहां दौरान ए इलाज दोनों की हलाकत हो गई. नोएडा की सेक्टर 24 थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

गौरव और मनोज नाम के दोनों लंगूर चिड़ियाघर (मीडिया इंस्टिट्यूट) में काम करते थे. बरोज़ इतवार सुबह दोनों बाइक पर सवार होकर गाजियाबाद वाक़े अपने घर को जाने के लिए निकले थे. सुबह करीब ७ बजे मूर्तफ़ा रोड पर जाते वक्त उनकी बाइक को पिकअप बस ने टक्कर मार दी. इस हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए.

वहीँ नोएडा में ही बैडमिंटन खेल रहे खिलाड़ी महेंद्र (५२ साल) जो अपने साथियों के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे. तभी अचानक उनके सीने में शदीद दर्द महसूस हुआ और वो गिर गए. इससे साथी खिलाड़ियों में हड़कंप मच गया.  उसको हार्ट अटैक आया और वोह बेहोश होकर गिर गया. इससे स्टेडियम में अफरा-तफरी मच गई. इत्तेला मिलने पर आनन-फानन में पहुंचे डॉक्टर्स ने खिलाड़ी को सीपीआर भी दिया, फिर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. 

भारत के ऊपर क़ब्ल अज़ अमवातों का जैसे सैलाब आ गया है।  हर रोज़ की होने वाली क़ब्ल अज़ मौतों से मोदी इन्तेज़ामियाँ शदीद ग़म और फ़िक्र मंद है, लेकिन अपनी फिक्रमंदी बताये तो किस को बताये।  जब मोदी मोदी मोदी के नारे यही लंगूर लँगूरनियाँ लगाते थे।   चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियाँ, संघी दहशत, बीजपी वाले, शिद्दत पसंद काफ़िर मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ ज़हर फ़ैलाते थे, हर मुद्दे पर लंगूरों को अब्दुल मिल ही जाता था।  बीजेपी हर मुद्दे पर हिन्दू मुस्लिम करते थे तब  तो मोदी इन्तेज़ामियाँ और बीजेपी वालों ने कभी मना नहीं किया और ना ही अपनी हुकूमत की ग़लती और गफलत को माना की ज़हर की मिक़्दार बोहोत बढ़ गई है, फ़िज़ा बोहोत ज़हरीली हो गई है।  अब किस मुँह से मीडिया के सामने जा कर रोना रोयेगें यह बीजेपी वाले। 

दरअसल सही कर रहें हैं दिफ़ाई फ़ौजी।  जहाँ कोई काफ़िर ज़्यादा फड़फड़ाये की दे रहें हैं मौत।  दूसरी बात यह पेशनगोई २०२० में कोविद के दरमियान हमने हमारे मज़मून में लिख दी थी।  भारत के काफ़िर चलते चलते खेलते खेलते टपा टप गिरेगें और मरेगें।  एक मज़मून में आख़िर में नारा दिया है।  टपा टप टपा टप टपा टप।  उसके बाद आये थे इन्तेख़ाब तो ओवेसी जी ने अपने अवामी इजलास में बोला था ठप्पे लगाते जाओ ठपा ठप ठपा ठप।  वोह भी सही थे लेकिन हमारे मज़मून में हमने मौत के लिए कहीं थी बात।  अब देखो वैसा ही हो रहा है चलते चलते गिर कर मर रहें हैं  

जब तब्लीगी जमात पर झूठा इलज़ाम लगाया था तब दिल दुखा और मज़मून में लिखा था।  अब बताओ ९ साल १२ ले कर तो २४, २९ और ५२ साल कोई हार्ट अटैक की उम्र होती है।  हाँ याद आया उस मज़मून के बाद आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टम में गैस लीक हुई थी और लोग चलते चलते गिर कर मर रहे थे।  कुछ २०० से २५० लोग मारे गए थे।  लेकिन उस टपा टप की हिकमत तो बोहोत आगे तक जाएगी।  मरते रहेगें

सहाफ़ी ज़ुबेर

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