Friday, 16 June 2023

पाकिस्तान मेरा वतन

हम पाकिस्तान के अवाम  …..

Pakistan is my country and all Pakistanis are my brothers and sisters. I love my country and I am proud of its rich and varied heritage. To my country and my people, I pledge my devotion. In their wellbeing and prosperity alone, lies my happiness”.      Journalist Zuber

आज का मज़मून अमेरिका में भारत के दो मक़बूल सियासदानों के दौरे पर मुश्तमिल है। AIMIM के जनाब असदुद्दीन ओवेसी मुस्लिम अवाम में मक़बूल हैं और नरेंद्र मोदी हिंदू अवाम में मक़बूल हैं। असदुद्दीन अमेरिकी दौरा कर चुके जबकी नंदू का दौरा मुतवक़्क़ो है।

रियासत हाय मुताहिदा अमेरिका में दौरान सवालात असदुद्दीन ने पाकिस्तानी मुसलमानों समेत सहाफ़ियों के सवालों का भी जवाब दिया? हमेशा की तरह उनका जवाब ज़हानत से लबरेज़ था बिना हदफ़ पर सीधा निशाने साधने के उन्होंने गोल मोल जवाब दिया। "कसाब वाक़िया" की तनक़ीद करते हुए १२ रोज़ की शादीशुदा ख़ातून की कहानी सुनाई, जिसका शोहर वीटी स्टेशन पर गोलीबारी में हलाक हो गया था।

यहां वही ख़ामी है जिसका ज़िक्र मैंने भारतीय मीडिया के ज़ाफ़रानी लंगूरों को कसाब वाक़िया के बाद हर बार जवाब दिया है, जब उन्होंने फायरिंग में मारे गए मुसलमानों का नाम लेकर पाकिस्तान की किरदार कूशी शुरू कर दी थी.

सभी लंगूरों-लंगूरियों और जनाब असद उद्दीन को मेरा दो टूक जवाब है क्या सबूत है कि १२ दिन की शादीशुदा ख़ातून के शोहर को कसाब ने हलाक किया। क्या आपके पास कोई पुख़्ता सबूत है? गोली लगने की सूरत ऐ हाल के बारे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट क्या कहती है? कसाब के पास एके-47 जैसे हाई-टेक हथियार या इससे भी जदीद हथियार थे। ज़्यादातर मारे गए अफ़राद के पोस्टमॉर्टम में कहा गया है कि उनकी मौत आम गोली लगने से हुई है। जो आमतौर पर फौज या पुलिस के पास होता है।

दूसरी बात, कसाब ने वीटी पर ७ मिनट से ज़्यादा वक़्फ़े तक गोलियां नहीं बरसाईं थी। इसके बाद उन्होंने वीटी स्टेशन छोड़ दिया था। मुसलमानों के हलाक होने का वक़्त क्या था, क्या वे कसाब के वीटी छोड़ने के बाद हलाक हुए थे या दौरान कसाब की गोलीबारी के बीच। इमकान ज़्यादा  है, जब मुहाफ़िज़ अफ़वाज ने इस बात का ख़ुलासा किया होगा कि यह पाकिस्तान द्वारा किया गया दहशतगर्द हमला है, तो मुहाफ़िज़ फोर्सेस ने मुसलमानों को दाढ़ी और बुर्का में देखकर गोली मार दी होगी. जैसा कि उस वक़्त हर मुसलमान दाढ़ी वाला दहशतगर्द था। भारत में आज भी पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट के नाम पर मुसलमानों का एनकाउंटर करना आम सक़ाफ़त है। दहशतगर्दी के नाम पर कश्मीर में फौज आम अवाम मुस्लिम मजदूरों का क़तल कर रही है। आज के हालात ज़्यादा इशारा दे रहें हैं कि वीटी स्टेशन पर मुसलमान अवाम को कसाब के बजाय मुहाफ़िज़ फौज ने गोली मार दी होगी। जैसा कि वे फर्जी मुठभेड़ में और दहशतगर्दी के पीछे सिर्फ़ मुसलमानों को मार रहे हैं। 

नंदू के अमेरिका दौरे से ठीक क़ब्ल, यूएसए इन्तेज़ामियाँ  "बीबीसी डॉक्यूमेंट्री ऑन गुजरात 2002" की स्क्रीनिंग करेगा।

जल्लाद मोदी के लिए यह कितना शर्मनाक और बेइज़्ज़त्ती का लम्हा होगा, उसके दौरे के एक दिन क़ब्ल वे सारे मंज़र अमेरिकी रकून एवांन वज़ीरों और अमेरिकी सदर को देखने को मिलेंगे, जिसमें १०-१० काफिर उस बेबस अकेली ख़ातूनों को दिन के उजाले में बरहना कर इजतेमाई असमतऱेज़ी कर रहे हैं। जो ज़ईफ़ भाग नहीं सकते थे, उन्हें कुएं में फेंक कर आतिश नार कर दिया, जो नौजवान भाग रहे थे, उनके पैर काट दिए गए और आग लगा दी गई; जो बच्चे दौड़ नहीं पा रहे थे उनके सिर क़लम कर दिए गए।

फिल्म में शूट किए गए सीन बिल्कुल हक़ीक़त पर मबनी हैं,  कुछ सीन मैंने अपने कैमरे से शूट किए हैं। उस वक़्त मैं हिंदू दहशत पर अपने तहक़ीक़ के काम पर था। फिर यही जानकारी और मनाज़िर २००२ के गुजरात में मुसलमानों पर हिन्दू हमले और मालेगांव से मुताल्लिक़  महाराष्ट्र हुकूमत के तब के वज़ीर ए आला मरहूम विलास राव देशमुख को भेजे थे और बेगम भोपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके बाद गुजरात के वो वीडियो तमाम आलमी मीडिया और अक़वामे मुताहिदा को भेजे गए थे.

बीबीसी की ख़बरों और फिल्म की एतेबार पर मोदी, बीजेपी, संघी शक और शुकूक कर सकते हैं, अमेरिकी नहीं. "गुजरात डॉक्यूमेंट्री" की स्क्रीनिंग के ठीक एक दिन बाद जब जल्लाद मोदी अमेरिका पहुंचेगा, तो उसे वहां पकड़कर गिरफ्तार करें और इंसानी हुकूक की शदीद खिलाफ़वर्ज़ी का मुकदमा चलायें.

कसाब वाक़िया भी ATS के तहक़ीक़ीक़ अफसर हेमंत करकरे को ख़तम करने के लिए हिंदू दहशत की एक साजिश का हिस्सा था। अगर वह शहीद नहीं होते तो नंदू, साधु, अमित, आडवाणी समेत हिंदू दहशतगर्द का पूरा नेटवर्क सलाख़ों के पीछे होता। और इज़राईल की इंटरनेशनल टेरर नेटवर्क फंडिंग का पर्दाफाश हो जाता।

सहाफ़ी ज़ुबेर

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