Sunday, 11 June 2023

साँच को आंच ही क्या, झूट, फरेब को रूसवाई।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

२०१४ के ग़ुलाम भारत में बीजेपी, संघी दहशत, शिद्दत पसंद काफ़िरों और लंगूर-लँगूरनिओं की यह आम सक़ाफ़त हो गई थी की झूट फ़रेब के ऊपर इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करना।  लेकिन जितना झूट इन लोगों ने इस्लाम और मुसलमानों की निस्बत से फ़ैलाया उतना ही खुद हिन्दू अवाम बैदार हुआ है।  हक़ और सच्चाई की तहक़ीक़ करने पर वोह तमाम अफ़राद दाख़िल ए इस्लाम हो गए जो इन लंगूर लँगूरनियों के झूट फ़रेब की तहक़ीक़ कर रहे थे।   या ऐसे मुस्लिम नौजावानों के बारे में मज़ीद जानकारी हासिल कर रहे थे जिनको फ़रेब के साथ झूठे इलज़ाम में जेलों में बंद कर रखा है या जो महज़ अपने मज़हब इस्लाम की वजह से २०१४ के ग़ुलाम भारत में बेपनाह सताये गए और उनके ज़ारिया ए माश को बीजेपी और शिद्दत ने तबाह कर दिया फिर भी वोह बेहद पुर सुकून हैं और उनके रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में ज़र्रा भर फ़र्क़ नहीं आया।  

इस तबदीली मज़हब में एक नाम और जुड़ गया है और वोह है अनामिका दुबे का जो मुस्लिम नौजवान से शादी कर के अब उज़मा फातिमा बन गई हैं। 

ख़बर सूबे दरमियान (मध्य प्रदेश) के शहर जबलपुर से है।  जहाँ के अमखेरा इलाक़े में रहने वाली अनामिका दुबे ने मोहम्मद अयाज नाम के मुस्लिम नौजावन के साथ ०२.०४.२०२३ को निकाह कर अपना मज़हब तब्दील कर लिया था. 

अपनी बेटी के इस क़दम से ग़मज़दा अहले ख़ाना ने बेटी को बेताल्लुक़ करते हुए बड़ा फ़ैसला लिया और अपनी हयात दुख्तर को अपने देवताओं की नज़र कर ज़ेरे आब कर दिया जिसको पिंडदान कहते हैं। अहले  ख़ाना ने दुखतर के इंतेक़ाल होने के ताज़ियाती पैग़ाम भी शाया किये थे जिसे अपने जानने वालों और रिश्तेदारों को भेजकर मौत के ख़ाने का एहतेमाम भी किया.  जानने वालों और रिश्तेदारों को नर्मदा के साहिल पर मुनअक़िद पिंडदान की रस्म में शामिल होने की दावत दी।   

नाज़रीन एक बात तो ते है जितना वबेला झूठी बातों पर किया जाएगा उतना हक़ मुस्तहकम होगा।  लव जिहाद से ले कर गौ मॉस फिर हूजूमी दहशत जितना मुस्लिम अवाम ने २०१४ के ग़ुलाम भारत में ज़हर को सहा है अब उस फसल के नतीजे मिलने लगें हैं। 

उत्तराखंड से शिद्दत की ज़मीन को छोड़ कर हिन्दू अवाम ने हिजरत करना शुरू कर दी है। उस हिजरत पर हिन्दू साधू संत बोल रहें हैं की भारत को साजिश के साथ इस्लामिक राष्ट्र बनाया जा रहा है।  में सहाफ़ी जुबेर उन तमाम लोगों से कहना चाहता हूँ साजिश नहीं बल्कि डंके के चोट पर भारत इस्लामिक ममलेकत बनेगा।  २०१४ से में चीख़ चीख़ कर मोदी इन्तेज़ामियाँ को और तमाम दानिशमंद आज़ाद सहाफ़ी असदुद्दीन बोल रहे थे की इन चीज़ों को कण्ट्रोल करो तब तो आपने हर तज़वीज़ पर हंसी मज़ाक में उड़ा दिया।  अब साजिश दिख रही है।  

जितना हिन्दू शिद्दत, दहशत और बीजेपी वालों ने उधम मचाना था मचा लिया अब तो फ़ैसले की घडी है।  और यही में बोलता था जब सब कुछ बर्बाद हो जाएगा तो महज़ रोने के अलावा तुम लोगों के पास कुछ नहीं रहेगा। 

आज जिन लंगूर और लँगूरनियों ख़ास सुधीर तिहाड़ी को बढ़ती हुए मुस्लिम आबादी में साजिश नज़र आ रही है यह वही झूठा, दोग़ला फ़रेबी शख़्स है जिसने २००० के नोट में नेनो चिप लगाई थी।  जिसकी तस्दीक़ चिप वाली बाई ने हाथों को ऊपर से नीचे तक उठा कर की थी।  फिर यह वही सुधीर तिहाड़ी है जिसने गाये के गोबर की खेप हवाई जहाज़ से भर कर अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस जैसे आला तालीमी आफ़ता मुल्कों में भेजी थी। और मोदी के बारे में क़सीदे पढ़े थे।  यह वही सुधीर तिहाड़ी है जिसको अपने झूट फ़रेब पर "ज़ी न्यूज़" से धक्के मार कर ज़लील कर के हकाला गया था।  अब यह "आज तक" पर गंदगी फैला रहा है और माहौल को बदबू नुमा कर रहा है। 

सुधीर कहता है की मुसलमान पैसे दे कर आला मुस्तक़बिल का लालच दे कर हिन्दू अवाम को इस्लाम में साजिश के साथ दाख़िल कर रहें हैं।  अगर मुसलमान पैसे दे कर हिन्दू अवाम को इस्लाम में दाख़िल कर रहें हैं तो उनकी ख़ुद की माशी हालात काहे को नहीं ठीक कर पा रहें हैं।  फिर कितने मुसलमान आला मुस्तक़बिल वाले हैं जिन्होंने हिन्दू लड़कियों से शादी की है।  

अगर कोई हिन्दू इस्लाम में दाख़िल हो रहा है तो उसको इस्लाम में आने के बाद ज़ेहनी क़ल्बी सुकून मिला।  आज भी इस्लाम में कई ज़िंदा वली हैं उसने उन वलियों अल्लाह वालों की करामात देखी।  फिर मेने इस मुद्दे पर कई तहक़ीक़ात की है जो बन्दा पहले डिप्रेशन में चला गया था कोई भी वुजूहात रही हो इस्लाम में आने के बाद नमाज़ और क़ुरआन की बरकत से वोह नार्मल ज़िन्दगी जीने लगा।    


सहाफ़ी ज़ुबेर

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