Thursday, 1 June 2023

दहशतगर्द सरगना का मुहाफ़िज़ कमांडो मारा गया।

अज़ीज़ नाज़रीन,

दिफ़ाई फ़ौजिओं को हर रोज़ नई कामयाबी मिल रही है जिसकी वजह से दिफ़ाई सरबराह अपने फ़ौजिओं की सरहाना और कारगरदेगी पर फूले नहीं समा रहें हैं।  आज दोपहर भारत की फ़िज़ाई फौज का एक तय्यारा कर्नाटका में मार गिराया गया।  नाज़रीन अभी ३ रोज़ क़ब्ल ३० मई २०२३ को भारत के वज़ीरे आज़म मोदी को दिफ़ाई सरबराह ने सख्त इंतेबाह की थी।  कश्मीर पर भारत की दरअंदाज़ी (घुसपैठ) पर उन्होंने सख्त अलफ़ाज़ में कहा था की भारत की तमाम फ़िज़ाओं को हमने क़ैद कर लिया है।  अब ज़मीन की जंग की बारी है।  उसका सबूत भी मिल गया कर्नाटक में भारतीय फ़िज़ाई फौज का तय्यारा उड़ा और हमने फ़ौरन मार गिराया। 

उस खबर का एहसास ऐ मुसर्रत अभी ख़तम भी नहीं हुआ था दूसरी ख़ुशख़बर चली आई। उत्तराखंड के ज़ाफ़रानी दहशत के सरग़ना पुष्कर सिंह धामी की हिफाज़ती अमले में तैनात कमांडो प्रमोद रावत ने बैरक में खुद को गोली मार कर अपना ही एनकाउटर कर लिया है. प्रमोद ज़ाफ़रानी सरग़ना के रिहाइश से शाही महल (राजभवन) के दरमियान बने बैरक में रहता था।  सानेहा की इत्तेला मिलते ही आला अफसर मौक़ा ऐ वारदात के लिए रवाना हो गए हैं.

ज़ाफ़रानी सरग़ना पुष्कर की हिफ़ाज़त में तैनात कमांडो के मौत के घाट उतारने पर तमाम ज़ाफ़रानी ख़ौफ़ज़दा हैं और भौचक्के रह गए हैं।   ख़ुदकशी करने जैसे कमज़ोरी भरे मुज़ाहिरे से अब आला ओहदेदारों की हिफ़ाज़त में तैनात कमांडों पर भी यक़ीन नहीं हो रहा है।  जो इतने कमज़ोर हैं की ख़ुद अपने आपको नहीं संभाल पा रहें हैं और ख़ुदकशी कर रहें हैं वोह आला ओहदेदारों की क्या ख़ाक हिफ़ाज़त करेंगें।  बरहाल इस हादसे को संजीदगी से लेते हुए इस मामले की तहक़ीक़ात का आग़ाज़ कर दिया गया है. इस हादसे पर एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने बताया है कि प्रमोद रावत पौड़ी गढ़वाल के अगरोड़ा के काफलस्यू का रहने वाला था।  एसएसपी ने आगे कहा है कि हादसे के बाद उसके अहले खाना  को इत्तेला दे दी गई है.

ज़ाफ़रानी दहशत की हिफ़ाज़त में लगा ढेर हुआ कमांडो की छुट्टी न मिलने की एक वजह से ख़ुदकशी की बात को एसएसपी ने ख़ारिज कर दिया है.

इस पूरे मामले पर जानकारी साझा करते हुए एडीजी अभिनव कुमार ने बताया कि मौत की हक़ीक़ी वजह का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही लग पाएगी.  अस अस पी ने उसके ढेर होने की वजह को हादसाती मौत से जोड़ कर देख रहें हैं।  उनका कहना है हो सकता है की प्रमोद राइफल साफ़ कर रहा होगा और उसकी कम इल्मी नाहेली की वजह से ख़ुद को गोली से उड़ा दिया। 

नाज़रीन यह २०१४ का ग़ुलाम भारत है यहाँ कुछ भी मुमकिन हो सकता है।  याद है आपको पुलवामा का हादसा।  जिसमे उस हादसे के बाद कैसे फौज ने जम्मू के नज़दीक अपने ही फौजी तय्यारे को मार गिराया था।  जिसका ज़िक्र इस सहाफ़ी ने फ़ौरन कर दिया था की भारीतय फौज ने अपने ही तय्यारे को मार दिया है।  लेकिन क़सदन ऑफ-१६ नाम दिया था।  उसके ऊपर लंगूर लँगूरनियाँ खूब सहाफ़ी का मज़ाक़ बना रहे थे। और पाकिस्तान की इमरान हुकूमत को कटघरे में ले रहे थे की पाकिस्तान के ख़ुद की मीडिया ने अपने फौजी तय्यारे का नम्बर दिया है।  भारत के इन अक़ल के अंधों को क्या मालूम की उनकी ज़हानत से १००० गुना ज़्यादा ज़हीन मुस्लिम होतें हैं।  जो जान बूझ कर ऐसा काम करतें हैं जिससे तुम्हारी अक़ल चक्कर खा जाए।  फिर भारत के लंगूर और लँगूरनियाँ तो इतने ज़हीन हैं की कोई तो नेनो चिप लगाता है कोई उसको १००० फिट नीचे दबे होने पर सिग्नल इनकम टेक्स को पहुंचाता है।  कोई गोबर की खेप विदेशों में भेजता है कोई टॉनिक पिलाता था।  कोई तो ख़ुद अपने आपको ज़ाहिर कर देता है की वोह ग़ुलाम है और भक्तिनी है।  में ..... ॐ मोदी। 

नाज़रीन पुलवामा पर इस सहाफ़ी ने मोदी इन्तेज़ामियाँ पर सख़्त तनक़ीद की थी और इस सहाफ़ी ने पूरी रिपोर्ट हर दो तीन दिन में शाया की थी।  और पूरी तरह से मोदी इन्तेज़ामियाँ को उस हादसे का रस्म अल ख़त बोला था।  और उस हादसे को २००२ से जोड़ कर देखा था।  २००२ में मुस्लिम अवाम को मारा था पुलवामा में अपने ही जवानों को मारा है।  फिर उस वक़्त  मुसलमानों के ऊपर इलज़ाम लगा था अब पाकिस्तान पर लगाया है। 

ख़ैर ऐसे ही अपना ख़ुद का एनकाउटर करते रहो।  कुछ सालों बाद हिन्दू ख़तरे से बहार निकल कर अक़लियत हो जाएगा।  लंगूर लँगूरनियाँ हिन्दू मुस्लिम खेलने में लगें हैं।  अभी उनके सर पर ग़फ़लत का पर्दा है।  जब इन लोगों की आँख खुलेगी इनकी दुनियां ही बदल चुकी होगी।  फिर सिर्फ कोठियों में बैठ कर आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं होगा।  करो हिन्दू मुस्लिम।  हर चीज़ का जवाब सही वक़्त पर दिया जाएगा। 

दिफ़ाई सरबराह ने फिर से मोदी को इंतेबाह की है।  यह जंग तुम हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत सकते हार तुम्हारा मुक़द्दर है।  कितनी भी बड़ी फ़ौज ले आओ कितना भी जदीद हथियार ले आओ ऐसी मख्लूक़ के सामने कैसे जीत सकोगे जो दिखाई ही नहीं देती है।  कब पीछे से आ कर तुम्हरा टेटवा दबा दिया जाएगा तुमको ख़बर ही नहीं लगेगी।  अल्लाह तो दिखाई ही नहीं देता है।  मखौल उड़ाते थे।  अब जो मख़लूक़ दिखाई ही नहीं देती ज़रा उससे दो दो हाथ कर के दिखाओ।  अल्लाह तो बोहोत आला ज़ात है। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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