Saturday, 25 February 2023

मफ़ाद आम (जनहित) में जारी।

अज़ीज़ नाज़रीन 

आज की कहानी मफ़ाद आम (जनहित) में जारी है।  उम्मीद है आप किसी भी क़िस्म की डकैती, लूट से मेहफ़ूज़ रहेगें।

गाड़ी स्टेशन छोड़ कर अपनी रफ़्तार पकड़ चुकी थी।  रात की तारीकी भी छा चुकी थी।अब ट्रैन अपनी पूरी रफ़्तार से सूनसान जंगल में भाग रही थी।  बोगी के बहार सिवाए ट्रैन की आवाज़ सायं सायं के कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था।  जब तमाम मुसाफ़िर नींद की आग़ोश में थे और सो गए।  तब यकायक ट्रैन एक ही झटके से रूक गई।  और कुछ नाज़ेबा अफ़राद ट्रैन में चढ़ गए।  उनके हाथों में तलवार, डंडे, चाक़ू, तेज़ की हुई छूरी थी।   तमाम मुसाफिर हक्का बक्का ख़ौफ़ज़दा उन लूटेरों को देखने लगे।  

डाकुओं का सर दार बोला सब कुछ लूट लो नक़द, गहने, माल सब से छीन लो।  एक मज़लूम की गर्दन पर तेज़ छूरी लगा कर डाकू बोला निकाल जो कुछ तेरे पास है।  ख़ौफ़ज़दा मुसाफ़िर बोला माफ़ कीजिये नक़द तो नहीं "Cash Less Wallet" है।  

डाकूओं का सरदार झल्ला कर बोला जिसको देखो उसके पास "Cash Less Wallet है।  साम्भा अगर यही हाल रहा तो हम चोर उच्चके भूके मर जायेगें।  तो अब क्या करें सरदार।  ख़ुदकशी आत्महत्या।  सूना नहीं ख़ुदकशी आत्महत्या।  जी सरदार या तो यह लूट मार बेगुनाहों का क़त्ल ख़ून बहाना छोड़ना पडेगा नहीं तो आत्महत्या।

तमाम डाकू बहार कूदे, और ट्रैन ने धीरे धीरे फिर से रफ़्तार पकड़ी। 

सहाफ़ी ज़ुबेर की पेशकश

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