अज़ीज़ नाज़रीन,
जो कुछ भी हो रहा है इसको महज़ इत्तेफ़ाक़ हर्गिज़ नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह तो माशियत ऐ इलाही है और रब्बे काबा चाहता है ऐसा हो तो हो रहा है।
नाज़रीन जैसा की बनी इस्राएल के दौरे नबूवत में फ़िरोन ज़ालिम तरीन दरिंदा सिफ़त बादशाह को बर्बाद करने के लिए उसके ही महल में अपने पैग़म्बर मूसा अल्हे सलाम नबीयूना को परवरिश करवाया, वैसा ही हिन्द को तबाह और बर्बाद करने के लिए ख़ुद दरिंद्रा मोदी को ही हिन्द का हाकिम बनाया।
नाज़रीन जो भी हाकिमियत के ना क़ाबिले बर्दाश्त हुकुम नाफ़िज़ किये जा रहें हैं दर हक़ीक़त वोह मेरे रब के हुकुम पर दरिंदा मोदी से कारवाई जा रहें हैं। रब्बे काबा को जब किसी ख़ित्ते को बर्बाद या आबाद करने की आरज़ू होती है तो उसको किसी से परवानगी या इजाज़त की कोई हाजत नहीं होती वोह तुमही में से ऐसों का इन्तेख़ाब करता है जो उस ख़ित्ते को तबाह कर देता है और कहीं आबाद कर देता है।
नाज़रीन जिस तालिबान को लंगूर-लँगूरनियाँ पानी पी पी कर कोसते थे हर बात पर तालिबानी सज़ा लंगूरों ने तालिबान का मतलब दरिंदा सिफ़त ज़ालिम तरीन हाकिम अवाम में ऐसा तसव्वुर क़ायम कर दिया था।लेकिन मुग़ल बाग़ीचे पर औरग़ज़ेब रेहमतुल्लाह की ताईद करने के बाद दरिंदा सिफ़त हाकिम मोदी तालिबान को मख्खन लगा रहा है। चिकनी चूपड़ी बातों से उनको मुतास्सिर कर रहा है। रुपए पैसे की गर्मी दिखा रहा है। पागल है उसको इस्लामिक फ़लसफ़ा ही नहीं मालूम। जो भी सच्चा मोमीन होगा वोह किसी भी हाकिम के रूपये पैसे ज़ेवर जायदाद से क़त्तई मरऊब नहीं होगा। ना ही वक़्त के हाकिमों के सामने एक अल्लाह वाला सजदा रेज़ होगा। हाँ अगर कोई दरवेश वली उनको दिखा अगरचे उसके पैरहन बोसीदा होंगे, लेकिन वोह अल्लाह वाला उससे ज़्यदा मुत्तासिर और मरऊब होगा बजाये वक़्त के हाकिम के। औरंज़ेब को आलमगीर लक़ब दिया था कियोंके वोह इंसाफ पसंद थे। और माले ग़नीमत या सरकारी ख़ज़ाने से कभी भी अपने लिए कुछ नहीं लिया।
इस साल के बजट में दरिंदा मोदी ने तालिबान के लिए २०० करोड़ की इमदादी रक़म फ़राहम करने का एहतेमाम किया है।
मोदी की इस दरिया दिली पर सहाफ़ी को हसी आ रही है। वोह समझने से क़ासिर है जिस तालिबान को हिन्द के लंगूर दहशतगर्द, ज़ालिम, दरिंदा क़ातिल और ना जाने किन किन नाज़ेबा अलक़ाब से नवाज़ते थे उसी तालिबान की हिमायत में दरिंदा मोदी खड़ा हो गया और २०० करोड़ का इमदादी पॅकेजे जारी कर दिया। तो क्या यह समझा जाए की मुग़लों पर लंगूरों को नसीहत देने के बाद अब मोदी तालिबान पर लंगूर और लँगूरनियों को निशाने पर ले रहा है। जिस हिसाब से मुग़ल बग़ीचे का नाम अमृत रखा उससे ज़ाहिर हो गया की मुग़ल "अमृत" अलफ़ाज़ और हिन्दू मुस्लिम भाईचारगी पर यक़ीन रखते थे और दौरे हाजरा में शिद्दत पसंद हिन्दू, बीजेपी वालों, संघी और लंगूरों की टोली को एक नसीहत है मुग़लों की निस्बत से फैलाया जाने वाला झूट और फरेब मोदी को क़त्तई पसंद नहीं है।
तालिबान को इमदादी पैकेज भी इस बात की दलील है या तो मोदी भी दरिंदा सिफ़त है ज़ालिम तरीन है या फिर संघी, बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू और लंगूर-लँगूरनियों की टोली को एक पैग़ाम देना मक़सद है की उनकी निस्बस्त से ग़लत बयानी ना की जाए। कियोंके हूकूमते हिन्द ख़ुद उनके ताबे है और उनको महसूल दे रही है। फिर बक़ौल लंगूर-लँगूरनियों की टोली के अगर तालिबान इतने ही ख़राब हैं, ज़ालिम, दहशतगर्द हैं फिर भी २०० करोड़ का इमदाद देना मतलब दहशत को फ़रोग़ देने जैसा है।
नाज़रीन दूसरी बात पराये वतन अफ़ग़ानिस्तान से दरिंदा मोदी का पैग़ाम ऐ मोहब्बत का फ़लसफ़ा समझमे नहीं आया। जब अपने ही हमवतनो को दरिंदा मोदी बर्बाद किये जा रहा हैं मुस्लिम अवाम को तबाह किये जा रहा हैं अक़लियत वाज़ारतख़ाने का बजट ४०% कम कर दिया तो तालिबान पर इस तरह की दरिया दिली कुछ हज़म नहीं हुई।
यह २०० करोड़ इमदाद नहीं हैं बल्कि दरिंदा मोदी दबाव में काम कर रहा हैं। या तो यह तालिबान को दिया जाने वाला महसूल हैं या फिर कोई और वजह। कियोंके अगर तालिबान हथियारों से जंग लड़ कर क़ाबिज़ हुए हैं और उनके सख़्त इस्लामिक क़ानूनों की लंगूर-लँगूरनियाँ और शिद्दत पसंद हिन्द हर दम मुख़ालेफ़त करते हैं तो हूकूमते हिन्द इस तरह की दरिया दिली कियों दिखा रही हैं। जबकि उनके अपने मुल्क में अवाम भुखमरी से मारा जा रहा हैं। यह तो वही मिसाल हुई।
घर में भले ही ना हो खाने को दाने, मंदिर में दिया ज़रूर जलेगा।
नाज़रीन इस सहाफ़ी के फ़लसफ़ों और नज़रयाती तब्सिरों पर फील वक़्त लंगूर-लँगूरनियाँ, शिद्दत पसंद काफ़िर, बीजेपी वाले मज़ाक़ बनाये लेकिन मुस्तक़बिल में चीज़ें हू बहू वैसी ही होती हैं। अभी मुग़लों और तालिबान की हिमायत की हैं मुस्तक़बिल में दरिंदा मोदी पाकिस्तान के साथ भी ख़ूब हुसने सुलूक करेगा। और यह बात पहले भी कई दफा तहरीर की जा चुकी हैं अगर हिन्द को कोई भी तंज़ीम और हुकूमत बर्बाद करेगी तो वोह बीजेपी की ही होगी।
हिन्द अगर इस्लामिक रियासत बनेगा तो वोह सिर्फ़ और सिर्फ़ मोदी, बीजेपी शिद्दत पसंद हिन्दू संघी दहशत लंगूर-लँगूरनियों की नाइंसाफ़ी की वजह से ही बनेगा।
हमारी दुआ भी यही रही हैं की अगली हुकूमत भी मोदी की ही बने। अभी बात मुग़लों पर से तालिबान पर आई हैं फिर पाकिस्तान पर हिमायत और नज़रे करम होगा बिल आख़िर हिन्द के मुसलमानों के साथ अच्छे इक़दाम किये जायेगें। जिन मुसलमानो के ख़िलाफ़ सदा ही लंगूर-लँगूरनियों की टोली, शिद्दत पसंद काफ़िर संघी दहशत और बीजेपी वाले अलम्बरदार होते हैं मोदी अपने अमल से यह ज़ाहिर कर देगा की मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ जारी दहशत बंद की जाए और उनके मुवाफ़ेक़त में कई इक़दाम करेगा।
यही विधि का विधान होगा।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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