Monday, 27 February 2023

फ़ेहरसित तय्यार रखो।

मुकर्रमी जनाब _______________

तमाम सयासी तंज़ीमों के सरबराहों को एक दरख़्वास्त की जाती है (बीजेपी और संघ) को छोड़ कर अपनी तंज़ीम में ऐसे तमाम अफ़राद की एक फ़ेहरसित तैयार करें जो बीजेपी और संघ से मुनसलिक हैं।    

ऐसे अफ़राद हुकूमत की ग़ैर अख़लाक़ी, ग़ैर क़ानूनी, ग़ैर दस्तूरी कारगरदेगी और हिकमते अमली पर भी हुकूमत का दिफ़ा करते हुए देखे जाते थे।  इस फ़ेहरिस्त में ना सिर्फ शिद्दत पसंद हिन्दू बल्कि उन मुस्लिम अवाम की भी शमूलियत कीजिये जो ज़ाफ़रानी हुकूमत के शरीयत में तबदीली पर इस्लाम को बाला ए ताक़ रख कर हुकूमत की पैरोकारी करते थे।  हूजूमी दहशत पर खामोशी इख़्तेयार करते थे और किसी भी जानवर के ज़ाबीहे पर बड़े बड़े अलफ़ाज़ में हुकूमत की कारगरदेगी को दुरुस्त ठहराते थे।   हर बक़रा ईद पर ऐसे अफ़राद टीवी मीडिया में डिबेट पर कर ख़िलाफ़े दस्तूर ख़िलाफ़े क़ानून बातें करने लगते थे।  संघ और बीजेपी के नुमाइंदों की जी हूज़ूरी करते थे।  हज़रते इब्राहीम ने अपने फ़रज़न्द हज़रते इस्माईल को अल्लाह की रज़ा के लिए ज़िबाह गाह तक ले गए तो तुम उनकी सुन्नत पर अमल करते हुए एक जानवर का खून कियों बहा रहे हो तुम भी अपनी औलादों को ज़िबाह करो।  ऐसे बेहूदा और बेबुनयाद फ़लसफ़ों पर वोह मुस्लिम नुमाइंदे ख़ामोशी इख़्तेयार करते बल्कि नीम रज़ामंदी देते हुए देखे जाते थे।  

हर ग़ैर दस्तूरी क़ानूनों पर इन अफ़राद की रज़ामंदी होती थी।  बाबरी मस्जिद को राम जन्म भूमी तस्लीम करना, मुग़ल ज़ालिम थे, एक सा क़ानून, ट्रिप्पल तलाक़, दफ़ा ३७०, ३५ "" मंसूख़ करना, हिजाब, अज़ान बेन, अज़ान के वक़्त मस्जिद के सामने हनुमान चालीसा पढ़ना।  काशी मस्जिद, १९४७ से क़ब्ल की तमाम मस्जिदों पर हिन्दू शिद्दत का दावा, "का" "एन.आर.सी. और एन.पी.आर. की मुवाफ़ेक़त करना।   

मुसलमानों का अक़लियत दर्जा ख़तम करना, मुस्लिम अवाम का राय शुमारी का हक़ छीन लेना, मुस्लिम तालीमी इदारों पर हूकूमती चाबुक चलाना, मदरसों पर क़ैद तमाम सेक्युलर तंज़ीमों में जितने भी ऐसी ख़िलाफ़े दस्तूर ख़िलाफ़े क़ानून ज़ेहनियत नुमाइंदे हैं उनकी एक फ़ेहरिस्त तैयार की जाए उनमे मीडिया के वोह सहाफ़ी भी ले लीजिये जो अपने फ़र्ज़ से ग़द्दारी करतें हैं और हुकूमत की चापलूसी करतें हैं।   अगर वक़त रहते उन्होंने मोदी हुकूमत से दुरुस्त और अंगारों से भरे जलाते हुए सवालात किये होते तो आज भारत तक़सीम के मोहाने पर नहीं होता। 

हिन्दू राष्ट्र तो बनेगा जिस तरह से बाबरी मस्जिद को झूठ फरेब के साथ गसप कर लिया वैसे ही सुप्रीम कोर्ट संसद की गर्दन पर बंदूक रख कर कुछ भी फैसला करवा लेगें यह ज़ाफ़रानी दहशतगर्द।  तक़सीम के बाद की दुश्वारी ना हो इसलिए तमाम सेक्युलर तंज़ीमों को अपना अपना काम वक़्त से पहले मुकम्मल कर के रखना होगा।  ताके वक़्त आने पर ऐसे तमाम अनासिरों को सेक्युलर इंडिया से बहार भगाया जा सके जो भारत के बटवारे के ज़िम्मेदार थे, और जिन्होंने बीजेपी के हर गुनाह पर पर्दा पोशी की बजाये उसको तनक़ीद करने के या सही रास्ता दिखाने के थी।

हिन्दू राष्ट्र क़ायम होने के बाद इन हिन्दू मुस्लिम सिख क्रिस्टी ग़द्दारों की फ़ेहरिस्त के हिसाब से हिन्दू राष्ट्र में भेजने की हिकमत करना होगी। जो हर वक़्त ज़ाफ़रानी हुकूमत और मोदी की गुलामी में जी हूज़ूरी में लगे रहते थे।  तय्यार करदा फ़ेहरिस्त के हिसाब से अगर इनको हिन्दू राष्ट्र नहीं भेजा तो  तो मुस्तक़बिल में यह अफ़राद सेक्युलर इंडिया को तकलीफ देंगें। 

सहाफ़ी जुबेर

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