अज़ीज़ नाज़रीन
ख़ुदमुख़्तार सहाफ़त की टीम तुर्की में आये ज़बरदस्त ज़लज़ले की तहक़ीक़ात में लगी हुई है और इब्तेदाई तहक़ीक़ात से यह बात ज़ाहिर हो रही है की यह ज़लज़ला क़ुदरत का क़ेहर नहीं था। बरक़्स इंसानी साजिश का नतीजा था। नाज़रीन आज एक हूकूमते हिन्द के ज़ेरे इंतज़ाम काम करने वाला विजय कुमार ज़लज़ले में मारा गया। उसकी लाश मलबे से मिली है। यह भारतीय शक़्स ज़लज़ले की साजिश में शामिल था या नहीं इस बात की तहक़ीक़ चालू है। लेकिन यह गुजिश्ता एक हफ्ते से लापता था। हो सकता है यह शख़्स ज़लज़ला कर के भारत वापिस भागने की फ़िराक में होगा लेकिन कामयाब नहीं हो सका।
ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम इस बात की तफ्तीश कर रही है की मारा गया भारतीय दहशत का जासूस था, या रा का एजेंट। और ऐसे कितने भारतीय इसके साथ थे जो मारे गए या अपना मिशन कामयाब कर के फरार हो गए। वैसे मुस्लिम मुमालिकों को इस बात की आगाही अपने हर मज़मूनों और नज़्मों में देता रहता हूँ। भारत पर किसी भी क़िस्म का यक़ीन और एतेबार ना किया जाए हुकूमते हिन्द ने मुस्लिम मुल्कों में तबाही मचाने के लिए ऐसे ना जाने कितनी जासूस भेजे हुए है। पाकिस्तान में एक सलमान नाम से रह रहा था कुलभूषण जाधव उसको फ़ासी पर टांग दिया गया। उसका भी लिंक तुर्की से होते हुए फ़ारस, ख़ुरासान फिर पाकिस्तान में तबाही मचाने में मिला था। हर बार अपने मज़मूनों में ज़िक्र करता हूँ, की २०१४ के हिन्दू दहशतगर्दों के भारत पर काब्जा करने के बाद भारत से तमाम समाजी, सियासी और मशी ताल्लुक़ात तोड़ देना चाहिए। दुबाई, सऊदी, कुवैत, क़तर, ओमान, जॉर्डन, सीरिया, यमन में ऐसे ना जाने कितने रा और ज़ाफ़रानी दहशत के जासूस भरे पड़ें हैं।
अपने
हर अंग्रेज़ी हिंदी मज़मूनों और नज़्मों में लिखता हूँ कुफ़्फ़ार ला इतबार इन पर भरोसा मत
करो। यह लोग तुम्हारा जान माल का तो नुकसान
करेगें ही बल्कि तुम्हारा ईमान भी ले जायेगें।
तुर्की में हुए इस इंसानी हमले में ३ इस्लाम दुश्मन मुल्कों के मुलव्विस होने
के सबूत मिल रहें हैं। तुर्की के बाद दुबाई
को तबाह करने की तय्यारी थी। लेकिन फौजी टीम
पहुंच चुकी है हो सकता है दुबाई बच जाए। अभी
भी वक़्त है तमाम मुस्लिम मुमालिकों से काफिरों को चुन चुन के बहार निकाल दो। इन काफिरों में मुनाफ़िक़ भी हैं जो असल में मुस्लिम
नहीं हैं वोह हूकूमते हिन्द और दीगर दुशमन मुल्कों के जासूस हैं। मुस्लिम नामों से इस्लामिक देशों में रह रहें हैं।
गुजिश्ता दो सालों से कोविद-१९ के दौर से चीख़ चीख़ कर बोल रहा हूँ की मुस्लिम मुमालिकों को अपने मुल्कों में रहने वाले गैर ज़रूरी हिन्दू अफ़राद को निकाल देना चाहिए यह लोग ग़दर मचाने की हिकमते अमली पर हैं। पिछेल ४-५ महीनों में अंग्रेज़ी मज़मूनों में साफ़ अलफ़ाज़ में लिखा है मुस्लिम मुमालकों को भारत से किसी क़िस्म का कोई रिश्ता नहीं रखा चाहिए। भारत अपने मुल्क के मुस्लिम अवाम को तबाह करने के बाद इस्लामिक दुनियां में दहशत फैलाने के अपने मिशन पर है। यहाँ तक लिखा है भारत को समाजी, सियासी और माशी अछूत बना दो।
मज़ीद तहक़ीक़ात चालू है। लेकिन बोहोत ही चौकाने वाले राज़ ज़ाहिर होने वाले हैं। जिनके तमाम सबूत ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम इकठ्ठे कर रही है।
सहाफ़ी
ज़ुबैर
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