अज़ीज़ नाज़रीन
ख़ुदमुख़्तार सहाफ़त की टीम को जैसे जैसे सबूत मिल रहें हैं वैसे वैसे तुर्की पर ज़लज़ला एक जोहरी हमला था इसके इमकान पुख़्ता हो रखे हैं। जिसको ज़मीन के नीचे जा कर ताक़तवर जोहरी ब्लास्ट या थर्मल ब्लास्ट किया गया किया गया था और तुर्की को सफ़ा ऐ हस्ती से उखाड़ फेकने की साजिश थी। हूकूमते हिन्द के ज़ेरे इंतज़ाम काम करने वाला मारा गया जासूस विनय कुमार अकेला नहीं था। जैसा कल की तहक़ीक़ात में कहा गया था उसके साथ और बोहोत से हिन्दू दहशतगर्द शामिल होंगे। खबर है हमले से क़ब्ल भारत की कूल ९ से १० लोगों की टीम तुर्की में सरगर्म थी। इन हमलावरों में २ या ३ ख़ातून हैं। अब ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम उन ९ लोगों की तलाश कर रही है जो हमले से क़ब्ल मश्कूक किरदार के हामी थे। उधर तुर्की इन्तेज़ामियाँ ने जिन बेरुन मुल्क वज़ारत ख़ानों पर पेनी नज़र रखी हुई है, उनमे भारत, अमेरिका और इजराइल शामिल हैं।
नाज़रीन २०१४ में भारत को ग़ुलामी की ज़ंजीरों में क़ैद करने के बाद जब हिन्दू दहशत ने अपने क़दम मुस्तहकम कर लिए थे तब २०१६ में टर्की में फौजी बग़ावत करवाई गई थी। कियोंके टर्की के रजब तय्यप अर्दोगान हर वक़्त मुस्लिम मफ़ात की बात करते थे और पाकिस्तान के साथ ब्रद्राना सुलूक रहा है। कश्मीर पर उनकी वाज़े राये और पाकिस्तान के साथ जाने की वजह भी भारत, इजराइल को एक आँख नाही भाई थी। उनका मुख़लेसाना बर्ताव इस्लाम दुश्मनों को क़त्तई गवारा नहीं था। और सबसे बड़ा ख़तरा अगर कुफ्र, यहूद नसारा को है तो वोह पाकिस्तान, टर्की और ईरान से ही है। पाकिस्तान जोहरी ताक़त है, ईरान जोहरी ताक़त बनने के क़रीब है और तुर्की के जंगजू और फौजी सलाहियत दुनियां के किसी भी मुल्क की धज्जिया उड़ा सकतें हैं।
यह हमला उसी फ़लसफ़े की तस्दीक़ कर रहा है आमने सामने की जंग में हम तुम्हारे मुक़ाबिल नहीं खड़े हो सकतें और जंग फतह नहीं कर सकतें। लेकिन साजिश कर के तुम्हारे दोस्त बन कर गले लग कर तुम्हारी गर्दन कब क़लम कर देंगें तुमको पता भी नहीं चलेगा।
नाज़रीन अज़रबाइजान और अर्मेनियाँ जंग में तुर्की और पाकिस्तान ने अज़रबाइजान का साथ दिया था और अमेरिका, इजराइल, भारत ने अर्मेनिया का साथ दिया था। लेकिन तुर्की की जंगी सलाहियत और आला ड्रोन की ताक़त से अर्मेनियाँ का धुव्वा निकल गया था और अज़रबाइजान ने जंग में फतह हासिल की थी।
हालाँके भारत पर दशहत का क़ब्ज़ा होने के बाद से ही यहूद दहशत और काफ़िर दहशत इस्लाम, मुसलमानों को ख़तम करने की साजिश कर रहे थे। लेकिन असल साजिश अर्मेनियाँ की शाकिस्त के बाद शुरू हुई थी। इन दहशतगर्दों को यक़ीन हो चला था की हम इन जंगजूओं से जंग में आमने सामने हरगिज़ नहीं फतह हासिल कर सकेगें तो इनके अंदर घूस कर इस्लामिक लबादा पहन कर हदीस, क़ुरान की बड़ी बड़ी बातें कर के इस्लाम को ख़तम कर दो।
जैसा किसी मुजाहिद की चुनौती थी की यह साजिशें कब तक करोगे १५ मिनिट आमने सामने कर दो दिखा देंगें की कौन कितने पानी में है।
तो आमने सामने की जंग में काफ़िर यहूद और नसारा मुस्लिम जंगजू से हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत सकतें तो यह साजिश करतें हैं। तुम्हारे अंदर ही घूस कर तुम्हारे दोस्त बन कर तुम्हारे सबसे बड़े खैरख्वाह बन कर वक़्त मिलते ही गले लगे हुए तुमको पीछे से गर्दन काट डालतें हैं।
हम ईमानदारी की गई दुश्मनी पर हो जातें हैं बदनाम
उनके बईमानी से किये गए क़तल पर भी चर्चा नहीं होता।
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हम दुश्मनी भी करतें है तो ईमानदारी से करतें हैं,
वोह बेईमान दोस्त बन कर हो जातें हैं बदनाम।
सहाफ़ी ज़ुबेर
इसमें ऐसे लोगों की शमूलियत की गई जो आम राये से मुख़्तलिफ़ है। रसूल अल्लाह ने कभी नहीं बनाया, सहाबा ने नहीं बनाया, हदीस से साबित नहीं क़ुरान नहीं बोलता तो तुम कहाँ से लाये यह यौमे विलादत। इसमें वोह ग़द्दार भी शामिल हैं जो बोलतें हैं अल्लाह का जलवा रसूल अल्लाह ने कभी नहीं देखा। मेराज का वाक़िया खवाब ख़याल है। जिस तरह अरबों को ख़िलाफ़त ओस्मानियाँ के ख़िलाफ़ बग़ावत पर आमादा किया था दौरे मौजूदा में तुर्की पर हमला वैसा ही है।
तुम सिर्फ नबी की विलादत पर मातम मनाते रहे पापले पीटते रहे और अमेरिकी गुलाम सऊदी हुकूमत ने यौमे ईसा मसीह बनाया, शैतान दिन फेस्टिवल बनाया, जुव्वे खाने मौजूद, हिंदी सिनिमा मौजूद।
तुम रफ़ा'-ए-यदैन में उलझे रहे
दुश्मन तुम्हारे दरवाज़े पर पहच गया
सहाफ़ी ज़ुबेर
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