Tuesday, 1 June 2021

अमवातों की सही जानकारी दे हुकूमत।

अज़ीज़ नाज़रीन

आप तमामी हज़रात से (भाजपाई, संघी, शिद्दत पसंद हिन्दुओं को मिला कर) गुज़ारिश की जाती है की मज़मून का पूरा मोताला करें। और एक राये क़ायम कर हुकूमत से सवाल जवाब तलब करें।   नाज़रीन कोविद-१९ पहली लहर और दूसरी लहर में अमवातों का रिकॉर्ड हुकूमत काहे को पोशीदा कर रही है।  ३१ मई २०२१ तक जो आमवात भारतीय हुकूमत की जानिब से तय्यारकर्दा वेबसाइट गावी में दिखाई जा रही है वोह ५००७३७ मतलब पांच लाख के अदद के ऊपर मौतें हो चुकी हैं।   आये अब इस अदद की धज्जिया उड़ाते हैं और तिहाड़ जेल का क़ैदी सुधीर तिहाड़ी की ज़ुबानी इनका डी एन ए करते हैं।  हालांकि यह बात अलहदा है अब बेचारा डी एन ए करने के क़ाबिल ही नहीं रहा और ख़ुद मरीज़ बन कर किसी शिफ़ाख़ाने की ज़ीनत बना हुआ है।  

नाज़रीन अमवातों की अदद लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में पहुंच चुकी है और भारतीय वेबसाइट में जो अदद ५ लाख से ज़ाइद का दिया हुआ है वोह क्यों इस सहाफी को मशकूक लगता है उसकी वजह साफ़ है।  

२०२० की राये शुमारी में भारत की आबादी तक़रीबन १,३९२,६२१,२०९ थी।  मतलब एक सौ उनचालीस।   फिर करोना वबा का आगाज़ फरवरी २०२० से हुआ।  और अमवातों का सिलसिला मार्च से शुरू हुआ।   इन अमवातों में इब्तेदाह में १०० लोग मारे जाने लगे जो बढ़ कर ५०० फिर १००० और ३१ मई २०२१ की तारीख में ४११४ तक मारे जा चुके हैं।   इस अदद से ज़्यादा भी मारे गए होंगे, लेकिन उस मुद्दे और बेहेस में मुझे पड़ना ही नहीं है।  असल मुद्दा तो अदद की हेर फेर का है।   अब भारत की आबादी को लेते हैं, जो एक सौ उनचालीस है, और मार्च २०२० से ले कर जून २०२१ तक की अमवातों का एक तनासुब (रेश्यो) निकालतें हैं।   चलिए मौतें चार हज़ार नहीं बल्कि हर एक दिन में पांच मौतें ही पकड़ते हैं तो उस हिसाब से १६ महीनों में १,३९ करोड़ वाली आबादी में हर रोज़ अगर ४००० नहीं ३००० नहीं बल्कि ५ मौतें हर रोज़ होती हैं तो आज तक १६ महीनों में कुल १,७४,०७,७६५ मतलब एक करोड़ से ज़ाइद अवाम मारा जा चूका है।     

यह अदद ज़्यादा ही हो सकती है लेकिन कम नहीं।   फिर कैसे हूकूमते हिन्द ५ लाख की अदद बता रही है।  जो दिखाया गया वोह बोहोत ही कम कर के दिखाया गया है।  जबकी जैसा इस सहाफी की पेशनगोई थी की मौतों की अदद सौ में नहीं हज़ारों में होगी हज़ारों में नहीं लाखों में होगी लाखों में नहीं करोड़ों में होगी।   फिलहाल ५ पर एक रेश्यो निकाला गया है अगर हक़ीक़त में अदद शुमारी की जाए तो मरने वालों की अदद कम से कम २ से ३ करोड़ होगी। 

नाज़रीन झूट बोलने की एक हद होती है, हर उस मुद्दे पर संबित जैसे दरिंदे, कीड़े हक़ बोलने वाले की आवाज़ को पस्त कर देतें हैं और हक़ीक़त से मुँह चुराते हैं।   अब आये इस मुद्दे पर दंगल करतें हैं और हक़ीक़त की तेह तक जा कर हुकूमत से रू बरू होतें हैं।   लाल लाल आँखे दिखाते हुए हुकूमत पर हल्ला बोल करतें हैं और सवाल पूछतें हैं मौतों की हक़ीक़त अदद शुमारी क्या है। 

लंगूर लँगूरनियाँ ना पूछे हम तो पूछेगें।   चलिए ऊपर दिए हुए ५ के अदद को और कम करतें हैं हर रोज़ महज़ २ या ३ ही अफ़राद करोना वबा से हलाक हुए तो उसका रेश्यो भी आज १६ महीनों के बाद करोड़ों में ही होगा।   मोदी सरकार जवाब दो।  इन मौतों का कौन ज़िम्मेदार है।  और हाँ बेहेस में किसी तालीमी आफ़ता दानिशमंद को भेजो संबित, गौरव भाटिया या शाहनवाज़ जैसे मरे हुए मरीज़ों, कीड़ों को मत भेजो जो अपनी गलती तस्लीम करने के बजाये फरारी इख़्तेयार करने में ज़्यादा यक़ीन रखतें हैं। 

#Dangal #hallabol 

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