दहशत स्थान की दारुल खिलाफा दिल्ली में ख़ाकी दहशतगर्दों को हर दुसरे रोज़ मौत की आग़ोश में भेजने के बाद अब बारी गुजरात, शुमाली सूबे (उत्तर प्रदेश) के बाद ज़ाफ़रानी दहशत की तीसरी पनाह गाह मध्य प्रदेश अब मौत का क़ेहर टूटा है.
मध्य प्रदेश के वज़ीरे दरिंदा शिवराज सिंह चौहान की हिफ़ाज़ती अमले का एक दहशतगर्द मौत की आग़ोश में चला गया है. उस कॉन्स्टेबल ने खुद को गोली मार कर खुदकशी कर ली. उस जनखे की कान पट्टी पर रख कर गोली चलाने से हिन्दू दहशतगर्दों का "गोली मारो" नारा फिर से ताज़ा हो गया. गुजिश्ता कई रोज़ से किसी खाकी दहशतगर्द ने अपने आपको गोली मार कर हलाक नहीं किया था. गोली मार कर ढेर होने वाला दहशतगर्द का नाम अजय सिंह था. अब देखने वाली बात यही है जो दहशतगर्द अपने आक़ा के हिफाज़त अमले में शामिल हो और खुद नपुंसक के जैसे अपने आपको गोली मार ले तो ऐसे हिजड़े से क्या भारत की और उसके आला ओहदेदारों की हिफाज़त होगी।
मध्य प्रदेश की दारूल ख़िलाफ़ा भोपाल से टाऊन इंस्पेक्टर संदीप पवार ने इस हादसे की जानकारी देते हुए बताया की वज़ीरे दरिंदा की हिफ़ाज़ती अमले में वोह दहशतगर्द गुजिश्ता ६ माह से तैनात था. उस ख़ाकी दहशतगर्द को हर रोज़ की तरह ८.३० बजे दरिंदे की हिफ़ाज़ती टीम को रिपोर्ट करना था. लेकिन वोह नहीं पंहुचा तो हिफ़ाज़ती अमले ने दहशतगर्द अजय को फोन किया लेकिन उसने नहीं उठाया.
जब दहशतगर्द ने फोन नहीं उठाया तो उसके एहले ख़ाना को फोन किया गया. जैसा की आप सभी को मालूम हैं यह दहशतगर्द अपने साथ पूरी की पूरी बरादरी ले कर चलते हैं. इनको अय्याशी के सामान मोहिय्या करने के लिए दुर्गा वाहिनी की नौउम्र लड़किया होती हैं. जैसा की इससे पेश्तर दुर्गा वाहिनी के ऊपर कई मज़मून शया किये जा चुके हैं, के किस तरह जवान और हसीन लड़कियों को किसी भी मुल्क के सरबराह और वज़ीरों को अपने ज़िम्नी जाल में फंसा कर दहशतगर्दों के लिए हमदर्दी इकठ्ठा करने का काम दिया जाता है. वही जो सिन रसीदा हो जाती है वोह मुक़ामी और लोकल दहशतगर्दों का दिल बहलाती हैं.
जब इस खाकी दहशतगर्द उसके घर पर पंहुचा और खिड़की से झांक कर देखा तो उसकी लाश उसके खुद के खून से नहाई हुई लाल लथ पथ पडी थी. लगता है खाकी दहशतगर्द काफी दिनों से नहाया हुआ नहीं था सो पानी की जगह उसने अपने ही खून से ग़ुस्ल कर लिया।
मारा गया खाकी दहशतगर्द ना सिर्फ दुर्गा वाहिनी की खातूनों के साथ अय्याशी करता था बल्कि उसकी खुद की बीवी और बच्ची भी थे. मारा गया दहशतगर्द विदिशा के शमशादबाद का रहने वाला था. फिलहाल उसके साथी दहशतगर्दों ने लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है.
नाज़रीन आपको भोपाल याद आया. यह वही भोपाल है जहाँ कुछ साल क़ब्ल मासूम ५ मुसलमानों को सिमी का दहशतगर्द बोल कर इन खाकी कुत्तों ने शहीद कर दिया था. उनको जिस रोज़ बैल मिलने वाली थी उस से एक रोज़ क़ब्ल उनको फरार करवाया और फिर एक खुले खेत में उनको शहीद कर दिया। इतना ही नहीं उस गांव के सरपंच ने मीडिया के सामने झूठा बयान दिया की सभी के हाथ में पत्थर और लाठिया थी और वोह हवा में उछाल कर अल्लाह हो अकबर के नारे लगा रहे थे.
जबकि जिन को शहीद किया था उसमे से एक इतना सब होने के बाद भी ज़िंदा था उस ज़ख़्मी के ऊपर संघी आतंकी ने पहले पुलिस वाले को गोली मारने को बोला फिर उसने गोली मारी। कुल पांच गोलियां मारी गई. जिसका लाइव वीडियो इस सहाफी ने अपनी फेसबुक वाल और ग्रुप ऑटोनोमस जर्नलिस्ट पर सांझा किया था.
अभी तो यह जंग बोहोत लम्बी चलेगी। एक एक ना इन्साफ को मारेंगे ओर ज़रूर मारेगें। आगे और है, और है.
जुबेर
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