Saturday, 12 June 2021

फ़िज़ाई फौजी (विंग कमांडर) दरकार है।

अज़ीज़ नाज़रीन और मेरे ख़ैरख़्वाह साथियों,

अज़हद तकलीफ और दुःख के साथ एक अहम इत्तेला और जानकारी की आप तमाम हज़रात को आगाही देना चाहता हूँ।  मेजर जनरल जुबेर के ख़ासम ख़ास और जंग में एहम किरदार निभाने वाले फ़िज़ाई चीफ विंग कमांडर (Wing Commander L33OS 7G) जो गुजिश्ता जनवरी २०२० में शदीद ज़ख़्मी हो गए थे सख़्त अलील हैं तबीबों और जर्राहों ने उनको बचाने के तमाम इक़दाम किये हुए हैं।  

दरसअल गुजिश्ता साल जनवरी २०२० में जंग की क़ियादत करते हुए विंग कमांडर शदीद ज़ख़्मी हो गए थे, उनको शिफ़ा ख़ाने में दाख़िल किया था।  उसके बाद उनको छुट्टी दे दी गई थी।  नाज़रीन गाहे बा गाहे उस ज़ख्म की तकलीफ और शिद्दत से विंग कमांडर को तकलीफ होती रहती थी और उनको शिफ़ा ख़ाने की जानिब रुख करना पड़ता था।   बावजूद इतनी तमाम तकलीफों और ज़ख्मों की शिद्दत के विंग कमांडर एक सच्चे हमदर्द और साथी के जैसे मेजर जेनरल का साथ देते रहें।   जिसका ज़िक्र २०२१ में कई एक मज़मूनों में किया जा चूका है।   "अभी तो में और मेरा साथी हम दोनों मिल कर जंग लड़ रहें हैं। और संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद काफिरों, और बीजेपी वालों का जीना हराम कर रखा है"

३१ मई २०२१ में जो नासूर था फिर से ताज़ा हो गया और ज़ख़्मी विंग कमांडर फिर से अलील हो गए।   बा मुताबिक़ जर्राहों और तबीबों के अब इनका बच पाना मुमकिन नहीं होगा।  बिलफ़र्ज़ अगर यह बच भी जातें हैं तो ६ माह से ज़ाइद काम नहीं कर पायेगें और मुस्तक़बिल में इनके ज़ख़्म फिर ताज़ा हो जायेगें और इनको तकलीफ देंगें।

एकम जून से जंग में कोई नई हिकमते अमली नहीं हो पाई है।   वजह साफ़ है हमारे विंग कमांडर अब इस हालत में नहीं की जंग कर सकें।  ऐसी सूरते हाल में एक क़वी और सख़्त जंगजू की दरकार है।   जो अपनी जान मज़हब और मिल्लत के लिए क़ुर्बान करने का जज़बा रखता हो।  ज़्यादा दिनों तक इस जंग को मुल्तवी नहीं रख सकते, दुश्मन हालात का फायदा उठा कर किसी भी वक़्त ग़ालिब हो सकता है।  उनके ग़लबे को उतारने के लिए मेजर जेनेरल जुबेर को दो गुनी मेहनत और मशक़्क़त करनी पड़ेगी।    

नाज़रीन एक बात और आप हज़रात के इल्म में इज़ाफ़े के लिए बता दूँ की भारत का एक एहम बंदरगाह (पोर्ट) जो पाकिस्तानी सरहदों से नज़दीक होगा वोह पाकिस्तान के ज़ेरे इंतज़ाम आएगा।इस बात का इल्म और जानकारी इस सहाफी को २०१९ में बोहोत ही मोतबर और दानिश्वर ज़राये से मिली थी।  जिसको इस सहाफी ने सिरे से ख़ारिज कर दिया था।  बरहाल २०२० की वबा और भारतीय रेलवे को निजी मिलकियत में देने के फैसले के बाद दबे अलफ़ाज़ में इस सहाफी ने अपने मज़मून Mr. EXPANSIONIST ने छीना ग़रीबों का आख़िर सहारा.  में इस बात को मन्ज़रे आम पर लाया था, और इस बात के इमकानात ज़ाहिर कर रौशनी डाली थी की मुम्बाई पाक की हो सकती है।  मज़मून में मज़ीद कहा था,  "फिर बंबई में सिर्फ और सिर्फ पैसे वालों के ही वारे न्यारे होंगे अब भले ही वोह पाकिस्तान से हो, अफ़ग़ानिस्तान, बंगलादेश से सऊदी या मगरिबी किसी मुल्क या अमेरिका से हों".   

नाज़रीन बॉलीवुड अदाकारा कंगना राणावत ने उसी मज़मून को बेस बना कर बंबई को पाकिस्तान को सौंप दिया था।  लेकिन उस वक़्त तक मेजर जनरल जुबेर मराठा दारुल ख़िलाफ़ा मुम्बई के साथ थे और वोह किसी भी सूरत से मुम्बई को किसी और को देने पर राज़ी नहीं थे।   बरहाल २०२१ के आते आते हालात तेज़ी से तब्दील हुए और ख़्वाजा की नगरी में ग़रीब नवाज़ के सालाना उर्स से लौटने के बाद फिर एक मज़मून शाया किया गया।   जिसमे राजिस्थान और ख़्वाजा की नगरी पर पानी से मुत्तालिक़ और आला सुहूलियत की वजह अल्लाह का करम और साहिली इलाक़ों पर पानी की क़िल्लत पर लानत का ज़िक्र किया गया है।  यह साहिली इलाक़े से मुराद बंबई ही थी।  

नाज़रीन एक बात वाज़े करता चलूँ की यह वही ग़रीब नवाज़ हैं जिनके नाम से अगस्त २०१९ में तानाशाह और ज़ालिम तरीन हाकिम को इस सहाफी ने ललकारा था।  और नतीजा आपके सामने है, जंग में संघी, शिद्दत पसंद काफिर, मोदी, अमित तक़रीबन शाकिस्त खा चुके हैं।   फिर वही ग़लती और ग़फ़लत मराठा हाकिम और वज़ीरे आला उद्धव ने कर दी।  मिल आये मोदी से उसके बाद शुरू की वही ऊल जलूल बकवास और पीछे की जानिब से ख़ाने और ख़ाने की जगह से हगने की हिकमते अमली।   जम्मू से कश्मीर को अलहदा कर दो ऐसी गुज़ारिश शिव सेना करती है।   अजी जनाब पहले आप बंबई को बचाइए।   

फ़रवरी २०२१ में ख़्वाजा की नगरी ग़रीब नवाज़ के उर्सों के बाद एक मज़मून शाया किया है "आपकी हौसला अफ़ज़ाई पर तवज्जो दें।"  फिर उसमे जो तकलीफें और अज़ीयतें साहिली हल्क़े में अवाम को दी जाती है उसको भी बताया गया है।  इस साहिली इलाक़े से मुराद कोई दूसरा नहीं बल्कि बंबई ही है। 

नाज़रीन अभी तो जंग में भारत के अवाम को बोहोत कुछ देखना बोहोत कुछ भोगना बाक़ी है।  होगा वही जो लिख दिया गया है।   उससे एक इंच ना इधर और ना उधर।  तुम तुम्हारे दिल की करते चले जाओ, मेरा रब मेरे दिल की करेगा।  तुम लाख ख़ाका बनाओ, मंसूबे तैयार करो, साजिशें करो मेरा रब बेहतरीन ततबीर करने वालों में से है।   तुम्हारा हर मंसूबा, हर साजिश हर ख़ाका तबाह कर दिया जाएगा, ध्वस्त कर दिया जाएगा नेस्त नाबूत कर दिया जाएगा तबाह कर दिया जाएगा।   हर क़िला तबाह होगा जिसका ज़िक्र मेरी ३० मई २०२१ की उर्दू नज़्म में किया हुआ है।   तीसरा हदफ़, तय्यार रहें। 

 

तूफ़ान है मेरी मुठ्ठी में,

दुश्मन का सीना चीर के रख दूँ

गोला जो फैकूं हाथ से मेरे

दुश्मन का क़िला तबाह कर दूँ।। 

 

सहाफी जुबेर

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