जम्मू कश्मीर में मुजाहिदीनों और आज़ादी के फ़ौजिओं को उस वक़्त मिली बड़ी कामयाबी, जब त्राल सेक्टर में कायर दहशतगर्द और बीजेपी का मुहाफ़िज़ राकेश पंडित को गोली मार कर उसके ही खून से सुर्ख कर उस ज़मीन को पाक कर दिया।
ये वारदात बरोज़ बुध देर रात हुई, जहाँ जुनूबी कश्मीर के पुलवामा ज़िल्हे में त्राल सेक्टर में दहशतगर्दों का मुहाफ़िज़ और बीजेपी का सियासतदां को मुजाहिदों ने दे दना दन दन दन दन दे दना दन दन गोलियां मार दी। उसको नज़दीक ही एक निजी शिफ़ा ख़ाने में शदीद ज़ख़्मी हालत में भर्ती करवाया गया था। लेकिन ऐसा कहतें हैं हर कोई इतना ख़ुशक़िस्मत नहीं होता की मुजाहिदों की गोली लगे और ज़िंदा बच के आ जाए। और हुआ वही जो होना था, दौराने इलाज दहशतगर्द मुजाहिदों की गोली की शिद्दत की ताप बर्दाश्त नहीं कर सका और दम तोड़ दिया।
सूबे में क़ाबिज़ दहशतगर्दों का सरगना लेफ्टनंट कमांडेंट (लेफ्टनेंट गवर्नर) मनोज
सिन्हा उर्फ़ बग़दादी ने पैग़ामे ताज़ियत पेश की है।
उसने कहा पुलवामा त्राल में दहशतगर्द (कौन्सेल्लोर) राकेश पंडित हुए हमले के
बारे में सुनकर अज़हद सदमा है। बग़दादी ने मज़ीद
कहा में इस हमले की सख़्त मज़्ज़म्मत करता हूँ।
दुःख की इस घडी में सौग में डूबे उसके एहले ख़ाना के साथ मेरी हमदर्दी है। बग़दादी ने मज़ीद कहा की फौजी अपने मंसूबों में कामयाब
नहीं होंगे, और ऐसे कामों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को अदलिया के कटघरे में
खड़ा किया जाएगा।
संघी दहशतगर्द राकेश पंडित अपने आपको बोहोत ही बहादुर और निडर साबित करवाने के
चक्कर में मारा गया। वोह बग़ैर अपने दहशतगर्दों
के हिफाज़ती दस्ते के निकल पड़ा था और ढेर हुआ।
हर कोई मुजाहिदों और आज़ादी के फ़ौजिओं की तरह निडर और बहादुर नहीं हो सकता। क्योंकि हर मुजाहिद का एक अल्लाह पर कामिल ईमान
होता है और वोह मौत को अपने हाथों में ले कर जामे शहादत नोश करने की नियत ले कर निकलते
हैं। अब संघी दहशतगर्द तब तक ही मेहफ़ूज़ होतें
हैं जब तक की उनका हिफ़ाज़ती अमला उनके साथ होता है जहाँ थोड़ी से श्याणपती दिखाई के अपने
खुद के खून से हो गए सुर्ख। और यही इस दहशतगर्द
के साथ हुआ निकल पड़ा था अकेले, जैसे की हर मुजाहिद निकलता है और नतीजा भुगता। इस दहशतगर्द को तीन मुजाहिदों ने घेर लिया और तड़पा
तड़पा तड़पा कर ढेर कर दिया।
मुजाहिदों आप इन शिद्दत पसंद काफरों, दहशतगर्दों, ना इंसाफों, ज़ालिमों, क़ातिलों, जल्लादों पर पूरी नज़र रखो। और घात लगा कर इन पर हमलावर हो जाओ, फिर यह ज़ालिम
जिन्होंने आपके अपनों (मुस्लिमों) को मारा है, जहाँ मिले इनको क़तल कर डालो। इनका खून आप पर हलाल है, और आप पर इसका
कोई गुनाह कोई कफ़्फ़ारा नहीं।
यह जंग है और जंग में अगर दुश्मन के साथ हुसने सुलूक दिखाया तो वोह तुमको नहीं
छोड़ेगे और हलाक कर देंगे। लेकिन एक बार जंग
ख़तम हो जाए और जंग की धुल ठंडी हो जाए, फिर अपनी शर्तों पर अमन मोहायेदा करो। फिर क़ैद किये हुए दुशमन के फ़ौजिओं पर मज़ीद जब्र
और ज़ुल्म करना मुनासिब नहीं है और वोह तुम्हारे हक़ में जाइज़ ना होगा। अब इनके साथ हुसने सुलूक किया जाए हत्ता के वोह
तुम्हारे आला किरदार से मुत्तासिर हो कर दाखिले इस्लाम हो जाएँ।
लेकिन क़ैद किये हुए दुश्मन के सिपाहियों और फ़ौजिओं को बेपरवाह ना छोड़ा जाय उन पर कड़ी नज़र रखी जाए और हिफ़ाज़ती इक़दाम पूरे किये जाए। हो सके तो उनको ज़ंजीरों में जकड कर रखा जाए ताके वोह मौक़े का फायदा उठा कर भाग ना जाए और इस्लामिक रियासत के लिए ज़हर ना साबित हों।
मेजर
जनरल सहाफी जुबेर अहमद ख़ान
फौजी
कमेंडेन्ट
इस्लामिक रियासत नख़लिस्तान
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