Monday, 14 June 2021

बग़दादी की दहशत धक्के मार के हकालपट्टी कर ख़त्म की गई।

अज़ीज़ नाज़रीन,

इजराइल में भारत के कफ़न चोरों के वालिद बग़दादी की दहशत और क़त्ले आम को जिस अंदाज़ में ज़लील कर के हकाला गया है वोह शायद इजराइल की तारीख़ में पहली बार हुआ होगा।   एक होता है इन्तेख़ाब में हार जाना और अपने ओहदे से बरतरफ़ होना जैसा की ट्रम्प के साथ हुआ था और एक होता है धक्के मार मार के ज़लील कर के हकालना।   ताके आने वाले वक़्त में अवाम के सामने अपनी मनहूस सूरत भी नहीं दिखा सके। 

ज़ालिम तरीन क़साई और भारत के कफ़न चोर पुत्रों के वालिद बग़दादी को २०१८ से महज़ ३ सालों में ४ बार इन्तेख़ाब करवाना पड़े लेकिन हर बार अक्सरियत नहीं मिली, बिल आख़िर झटके धक्के इतने खा लिए की अब मज़ीद पिछवाड़े में और एक धक्का एक और झटका सेहन करने की क़ुव्वत बाक़ी ना रही थी।  तो बगदादी ने भी हथियार डाल दिए।  

नाज़रीन एक बात वाज़े है जितनी ज़लालत और बेइज़्ज़ती दहशत के सरगना की हुई है उतनी ही खुशी और मुसर्रत तमाम आलम के हर अमन पसंद अवाम को हुई होगी।  हर मज़हब और हर मुल्क हर फ़िरक़े ने फलस्तीन के मज़लूमों पर ज़ुल्म और जब्र के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की थी।  अमेरिका से ले कर भारत, ऑस्ट्रेलिया से ले कर रूस तक तमाम अवाम सड़कों पर था और अपने ग़म वा गुस्से का इज़हार कर रहा था।  

हुकूमतों की बात की जाए तो पाकिस्तान, ईरान, तुर्की, मलेशिया जैसे मुल्क खुल कर फलस्तीन के साथ शाना बा शाना आये।  अगर किसी ने गद्दारी की गले लग कर पीठ में खंजर उतारा तो वोह था वही ज़ाफ़रानी दहशत मुल्क भारत।  जिसने अक़वामे मुत्तहिदा में बजाये इजराइल के जंगी जराइम के ऊपर फलस्तीनी अवाम के मुवाफ़ेक़त में राये देने के फरारी इख़्तेयार की और वोटिंग से गैर हाज़िर रहा।  ग़द्दार।   वैसे भी संघियों, बीजेपी वालों शिद्दत पसंद काफिरों के खून में गद्दारी भरी होती है।  जब इन संघियों, शिद्दत पसंद हिन्दू महासभा ने अपने खुद के वतन भारत की आज़ादी के लिए उस वक़्त के आज़ादी के सिपाहियों के साथ गद्दारी कर के अंग्रेज़ों का साथ दिया तो फिर एक मुस्लिम मुल्क के अवाम के साथ कैसे आ सकते थे।  

खैर पेशाब पुत्र कफ़न चोर हक़ और इन्साफ से अपना दामन चुराते रहें लेकिन हर मुल्क का अवाम मज़लूमों, इंसानी हुक़ूक़ के साथ शाना बा शाना खड़ा था।  और फलस्तीनी अवाम पर जब्र और तशद्दुत के खिलाफ एहतेजाज कर रहा था।  अब इस ज़ालिम क़साई दरिंदे नीतिंयाहू की ज़लालत भरी हकालपट्टी से सभी की खुशी दो बाला है बतलाब दो गुनी है।   क्योंकि सभी ने इस ज़ालिम तरीन दरिंदे को ज़लील होते तिल तिल मरते हुए जेल में सड़ते हुए देखने की दुवाएं की थी। 

सभी की खुशी और दुवाएं शामिल हैं तेरी ज़लालत में,

उस बाप की ज़लालत पर,

किसी पेशाब पुत्र कफ़न चोर को खुशी थोड़ी है। 

 

सहाफी जुबेर

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