अज़ीज़ नाज़रीन,
जिस अंदाज़ में लंगूर और लँगूरनियों ने कोविद जंग की पहली लहर में उधम मचाया था, उस वक़्त तब्लीगी जमात को हू बहू इसी अंदाज़ में कटघरे में खड़ा कर के ज़हर अंगेशी की जा रही थी जिस अंदाज़ में दूसरी लहर में मुस्लिम ज़ईफ़ के साथ काफिर शिद्दत पसंदों ने मार पीट कर दहशत फैलाने के अमल को बजाये फ़िर्क़ावाराना कशीदगी का मामला मानने के, उसको मुस्लिम अवाम के ऊपर ही लाद दिया है. तब्लीग़ी जमात पर एक तरफ़ा हिकमते अमली करने और इलज़ाम तराशी करने वाले तक़रीबन ज़्यादातर ज़ाफ़रानी ज़ालिम रकूने पार्लियमान, रकूने असेंबली, रकूने बल्दिया, दीगर ज़ालिम ज़ाफ़रानी शिद्दत पसंद और लंगूरों की जमात के ज़्यादातर ज़ालिम (रिपब्लिक टीवी, आज तक, इंडिया न्यूज़) मौत की आगोश में चले गए। इन लंगूरों में से किसी की भी उम्र ४५ साल से ज़्यादा नहीं थी लेकिन इनकी ज़हर अंगेशी इनको मौत की आगोश में लिए गई. फिर अदालत में साबित क्या हुआ वही, झूठे इलज़ाम नतीजा बीजेपी ५ में से ४ सूबों में जबर्दश्त शाकिस्त।
नाज़रीन वही ग़फ़लत और ग़लती बीजेपी ने पुलिस से झूठे मुक़दमों में मुस्लिम अवाम की गिरफ्तारी पर लंगूर और लँगूरनियों की मदद से बवाल मचा कर दोहराई है, इस बार इन्तेख़ाब हैं उत्तर प्रदेश, गुजरात। यह सहाफी अदालत से गुज़ारिश करेगा की इस मुद्दे को सियासत की बली ना चढ़ने दिया जाए और इंतेखाब से क़ब्ल इस मुद्दे पर भी फैसला सूना दिया जाए ताके बीजेपी या कोई और तंज़ीम इस मुद्दे पर सियासी नफ़ा ना लेने पाए.
फिर भी अगर किसी भी बेगुनाह की गिरफ्तारी हो रही है और उसके साथ इन्साफ का क़तल किया जा रहा है तो ऐसी हिकमते अमली का यह सहाफी ख़ैर मक़दम करता है. क्योंकि जब तक बेगुनाहों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी उनके इन्साफ का क़तल नहीं होगा तब तक इन जुम्मनों की आँखें नहीं खुलेगी। जितने भी जुम्मन हैं वोह दहशतगर्द भारत के ग़ुलाम हैं, इनको भारत की अदलिया पर भारत के इन्साफ पर यक़ीन कामिल है. जब नाइंसाफी होगी तभी तो इनका यक़ीन काफिर खाकी दहशतगर्दों (पुलिस) और भारत की दोग़ले क़ानूनी निज़ाम से उठेगा। बढ़िया है लादो झूठे केस कल एक भी जुम्मन भारत के साथ ना होगा सब आज़ादी की मांग करेगें। कश्मीर भूल गए क्या यह बीजेपी, शिद्दत पसंद काफिर, और संघी दहशतगर्द। आज भी वोह पेशाब पुत्र अमित शाह रो रहा है. कल जब नाइंसाफी इतनी बढ़ जाएगी की हर मुसलमान जुम्मनों को मिला कर आज़ादी का हामी होगा, तब यह शिद्दत पसंद, संघी और बीजेपी वाले आंसूं बहाएंगे। हम तो पाक के साथ हैं, और ना इंसाफ़ी को देख कर एक एक जुम्मन पाक के साथ आएगा या आज़ादी मागेगा, जो बाबरी के बाद बनेगा तीसरा नासूर। फिर भी हम तो असेंबली इंतेखाब में और २०२३ में मरकज़ में चाहेगें की बीजेपी ही आये, जंग में मज़ा आएगा। पुंगी ग़ुरबत और महगाई तो काफिरों के लिए भी है, सिर्फ अब्दुल पुत्रों के लिए थोड़ी है. अब्दुल पुत्रों को बर्बाद करने के चक्कर में तुम कब बर्बाद हो गए तुमको पता ही नहीं चला.
हम तो यही चाहेगें की ख़ूब नाइंसाफी हो, ख़ूब झूठे केसेस लादे जाएँ। फिर २५ करोड़ मुस्लिम और इन्साफ के लिए लड़ाई वाले अवाम बग़ावत करेगें। जो भी मुनाफ़िक़ शाहनवाज़, मुख्तार अब्बास और मोहसिन जैसे कीड़ें हैं जो हमेशा ज़ाफ़रानी बोली बोलतें हैं उनको हम काट डालेगें, जो बचेगें वोह सिर्फ आज़ादी के सिपाही होंगें। जो शिद्दत पसंद बोलतें हैं, अगर तुम एक तरफ हुए तो क्या १०० करोड़ हिन्दू ख़ामोश रहेगा?. तो उन नपुंसकों को ख़ामोश रहना पडेगा। उनके अपने मसले इतने पेचीदा कर दिए जायेगें की अपने ही मसलों में उलझे रहेगें। करोना की पहली और दूसरी लहर में शिद्दत पसंद काफिरों और बीजेपी रकून पार्लियमान, मरकज़ी वज़ीरों से ले कर बीजेपी सूबे के वज़ीरों, रकूने असेम्ब्ली और रकूने बल्दिया और दिगार शिद्दत पसंद काफिरों और बीजेपी के रकूनों को ढेर कर दिया क्या उखाड़ लिया। एक अफ़ज़ल गुरू को सुप्रीम नालायक़ ने क़तल किया उसके बदले में तमाम पार्लियामेंट हाउस ही फोड़ डाला क्या उखाड़ लिया। अब पेशाब पुत्र नया बना रहा है. अभी तो घर घर अफ़ज़ल निकलेगें। भारत की बोहोत बुरी हालात होने वाली है. अभी पार्लियामेंट बर्बाद किया है, अगला निशाना सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट होंगें, बचो जनखों (नपुंसकों).
तुम्हारी इस तरह के झूठे केसेस लादने, हक़तल्फ़ी, बढ़ती हुई नाइंसाफी में हम इस्लाम और मुसलमानों की फतह देख रहें हैं. और हम तो यूं पी, गुजरात और मर्कज़ में बीजेपी की ही हुकूमत देखना चाहेगें। क्योंकि कांग्रेस या कोई और दीगर तंज़ीम आई तो हमको जंग रोकना पड़ेगी। दूसरी बात बीजेपी तो खुद भारत को तबाह कर रही है, खोकला कर रही है, आलमी सतह पर भारत को बदनाम कर रही है. तो हमको ज़्यदा मशक़्क़त करने की हाजत ही नहीं होती है. बीजेपी ख़ुद ही हमारा काम मुक्कमल कर रही है. जब भारत पूरा बर्बाद हो जाएगा, माशी, जिस्मानी कमज़ोर हो जाएगा तब जंग में होगी हमारी फतह. यूं तो गोबर पात्रा को मुख्तार अंसारी से दुश्मनी है लेकिन राम मंदिर का करोड़ों का पैसा रुपया देते वक़्त गोबर पात्र के नज़दीक कोई अंसारी जी हो जातें हैं.
जुबेर
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