Thursday, 17 June 2021

ख़ाकी दहशत के ऊपर क़ेहर।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

ख़ाकी दहशतगर्दों के ऊपर क़ेहर का आगाज़ हो चूका है।   जैसे जैसे वक़्त गुज़रता जाएगा फ़ासी का फंदा सख्त पर सख्त होता जाएगा।   यूं पी वालों तैयार रहो।  झूट फरेब के साथ गलत आफ आई आर लिखते हो।  वोह ज़ईफ़ तावीज़ तुम्मार, तावीज़ गंडे करते थे फलीते जलाते थे।   ठीक है इसका कफ़्फ़ारा बोहोत ही भयानक होगा।   ख़ाकी जितना नाटक करोगे, जितना ज़्यादा लिखोगे, जितना झूट फरेब फैलाओगे उतना बड़ा ख़मयाज़ा देना होगा।

ख़ैर सरे दस्त तो राजिस्थान के ख़ाकी दहशतगर्द की बात करते हैं, राजिस्थान के अलवर के एक ख़ाकी दहशतगर्द को दीफ़ाई फौजियों ढेर कर दिया है.  अलवर ज़िले का रहने वाला ख़ाकी दहशतगर्द शेर सिंह जाटव को दीफ़ाई फौजियों ने एक एनकाउंटर में ख़ून से लाल कर मौत की आगोश में भेज दिया।  अब तो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट हम भी बनते जा रहे हैं.  दहशतगर्द सदा मुसलमानों को बोलते रहतें हैं पाकिस्तान का  टिकट फ्री में देता हूँ अभी भी चले जाओ.  तो उन सभी संघी, बीजेपी वालों और शिद्दत पसंद काफिरों को अब मेजर जेनेरल सहाफी जुबेर ललकारता है "में तुमको जहन्नुम का टिकट देता हूँ, तुम सब की बारी आएगी और तुम जहन्नुम जाओगे।  

मारा गया दहशतगर्द मरकज़ की ख़ाकी दहशत (सी.आर.पी.ऑफ.) से ताल्लुक़ रखता था.  नाज़रीन यह वही अलवार है जहाँ पर मुस्लिम अवाम को हद दर्जे परेशान और हरासा किया जाता था.  पहलू खान, रकबर खान अलवार से ही थे.  

दहशतगर्द शेर सिंह जाटव अपने मंसूबे  और साजिश के तहत श्रीनगर में बवाल मचाने निकला था उसको पाकीज़ा फौजियों ने उसको हथियार डाल कर ख़ुद को उनके हवाले करने को कहा.  इस पर दहशतगर्द ने गोली बारी शुरू कर दी, फौजियों ने अपनी दिफ़ा के लिए पहले दो गोलियां हवा में चलाई फिर उसके पैरों में गोलियां मारी बिल आखिर उसको हलाक करना पड़ा.   

एक एक मासूम की मौत का बदला इन ख़ाकी दहशतगर्दों से लेंगें।  जैसा ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ ख़ाकी दहशतगर्दों के कायराना अमल को बहादुरी का तमगा देते थे और बड़े बड़े अलफ़ाज़ से नवाज़ते थे अब हमको कोई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बोलेगा।  ख़ाकी दहशतगर्द तो ज़न्खो की तरह कायराना काम करते थे. एक बेबस लाचार हथकड़ी  लगे हुए मुस्लिम, दलित को गोलियां मार कर बड़ी बहादुरी का काम समझते थे.  हम तो ख़ाकी दहशतगर्दों को भी बराबरी का मौक़ा फ़राहम करते हैं.  इन ख़ाकी दहशतगर्दों की पूरी फौज होती है, इनके हाथ पैर खुले हुए होतें हैं.  इनके पास असलाह वग़ैरा भी होता है, फिर भी हम इनका शिकार करतें हैं.  तो साबित हुआ जिन ख़ाकी दहशतगर्दों को ज़ाफ़रानी मिडिया बहादुरी का काम बोलती थी वोह नपुंसकता का काम था. असली बहादुरी तो हमारी है. (दीफ़ाई फौज)

जुबेर 

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