Wednesday, 16 June 2021

साधू की दहशत का क़िसास गुज्जु दहशत से लिया।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

जिस अंदाज़ में साधू उर्फ़ पेशाब पुत्र के सूबे उत्तर प्रदेश में एक ज़ईफ़ मुस्लिम को देवर पुत्रों ने पीटा था और उनकी दाढ़ी तराश दी थी उसके ऊपर जो मुस्लिम नौजवान उनको बचाने गए थे ख़ाकी दहशतगर्दों ने उन्ही को गिरफ्तार कर लिया।

नाज़रीन आपके इल्म में इज़ाफ़े के लिए बता दूँ की पेशाब पुत्र साधू के सूबे के उस नाज़ेबा हिन्दू दहशतगर्दाना हमले का क़िसास गुज्जु दहशगर्दों से ले लिया है।   जहाँ आज अल सुब क़रीब ३ से ४ के दरमियान एक ही परिवार के ११ अफ़राद एक कार हादसे में मौत की आग़ोश में चले गए।    नाज़रीन गुजरात के बाद हिन्दू दहशत की दूसरी सबसे ज़्यादा खतरनाक पनाहगाह साधू की सूबा शुमाल में जो हिन्दू दहशतगर्द हमला हुआ था उसके बाद लीपा पोती के दौर का आगाज़ हुआ।   ख़ाकी दहशतगर्द बीच बचाओ करने आये मुस्लिम नौजवानों को गिरफ्तार करने के बाद मामले को अलग ही रंग देने वाला था।   दहशतगर्द बोलता है की यह फिरकावाराना मामला नहीं था।  आज तक की उस खबर पर आज सुबह ७ बज कर ३० मिनिट पर ख़ाकी, संघी दहशतगर्दों,  शिद्दत पसंद काफिरों, बीजेपी वालों को ललकारा था इस हमले का बदला लेंगें और ख़ाकी दहशतगर्द को लताड़ लगाई थी।  झूट फैला रही है पुलिस वोह मुस्लिम नौजवान बीच बचाओ करने आये थे और जब वोह पुलिस के पास पहुंचे तो उन्ही को गिरफ्तार कर लिया गया।  

ख़ैर सूबे शुमाल में हुए काफिर दहशतगर्दों के हमले का क़िसास भी मुकम्मल हो गया।  फाइल क्लोज।  

जैसा की इस मेजर जेनरल का अज़्म है की एक भी मुस्लिम को हाथ लगाया मार पीट की तो उसके बदले में तुमको तुम्हारे ११ या १२ खोने पड़ेगें।  

आज अल सुब मारे गए ११ अफ़राद द्वारका से आ रहे थे।   उनकी कार की टक्कर आनंद ज़िल्हे के इंद्राणी गांव के नज़दीक मुख़्तलिफ़ सिम्त से आ रहे एक एक तेज़ रफ़्तार ट्रक से ज़बरदस्त टक्कर हो गई।  हादसा आनद ज़िले के तारापुर अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर हुआ।  कार में बच्चों, जवानों, मस्तूरातों और ज़ईफ़ों सबकी शमूलियत थी।   जो अब इस दुनियां में नहीं रहे।  

पुलिस मज़ीद तफ्तीश कर रही है।   इस सड़क हादसे पर वज़ीरे दरिंदा ने सख़्त तशवीश की है।  उसने हर जहांबाक होने वालों के क़रीबी रिश्तेदारों को २ लाख रूपये इमदाद की भीक देने का ऐलान किया है।   अब इस हादसे और अपने कुकर्मों गुनाहों का कफ़्फ़ारा भीक दे कर मुकम्मल किया जाएगा। 

इतना ही नहीं एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी मुस्लिम ज़ईफ़ की हिन्दू दहशतगर्दाना हमले और दाढ़ी काटने के बाद भोंकने का सिलसिला शुरू हुआ।  पेशाब पुत्र ज़ाफ़रानी साधू और सूबे का आला दरिंदा कांग्रेस के राहुल गांधी के ट्वीट पर उनको नसीहत देता है।   क़ानूनी दरिंदा रवि शंकर प्रसाद ट्वीटर को नसीहत देता है।  एक और दरिंदा या कारकून है वोह भोंकता है की राहुल गांधी के ट्वीट से दंगे हो जायेगें।   

ख़ाकी दहशतगर्द बोलता है की यह फ़िरक़ावारना और हिन्दू दहशतगर्द हमला नहीं था तो उस दहशतगर्द के नाम से नारा काहे को लगवाया गया।  ऐसा कर के यह अपने खुद के भगवन की इज़्ज़त दो कोड़ी की कर उसकी तौहीन कर रहें हैं।   जिसके नाम से एक ७०-७५ साला ज़ईफ़ की पिटाई की जाती है उनको नाज़ेबा नारा लगाने पर मजबूर किया जाता है तो ऐसे राम से तो अच्छे रावण थे।   बल्कि में तो कहूंगा की आज कल भाजपा के राम रावण में तब्दील हो चुके हैं।  राम मंदिर के नाम पर करोड़ों घोटाला, राम के नाम पर क़त्ले आम, राम के नाम पर अपनी ही बेहेन बेटियों की इज़्ज़त साधू राम मंदिर में लूट रहे हैं।  बच्चे पैदा कर रहें हैं।   यह कैसे राम के अकीदतमंद हैं.  लगता है राम मर्यादावादी पुरषोत्तम नहीं थे बल्कि रावण जो की एक अज़ीम पंडित और आलिम थे वही होंगे असली राम।   उन्होंने ही आज के भाजपा के राम को धुल चटाई होगी और मौत की नींद सुलाया होगा तभी तो इन भाजपाइयों की रावण के नाम से सुलगती है। 

तमाम भाजपाइयों,  संघियों और शिद्दत पसंद काफिरों के आज के कुकर्म और गुनाहों को देखते हुए तो ऐसा ही लगता है जो इलज़ाम यह लोग रावण पर लगाते हैं असल में वोह सही और दुर्सुत राम के ऊपर होंगे।   रावण और सीता के इश्क़ में राम आड़े आये होंगे।  और जंग में रावण ने राम को हलाक किया होगा।   वैसे भी झूट बोलने में इन लोगों का कोई हाथ नहीं पकड़ सकता। जब यह लोग जालसाज़ी कर के पराये मज़हब की इबादतगाह को तोड़ कर, अदालत पर राम के नाम की तलवार गर्दन पर रख कर हुकुम अपने मुवाफ़ेक़त में ले सकतें हैं।   इतना ही नहीं राम मंदिर की ज़मीन में करोड़ों अरबों का घोटाले बाज़ी, मंदिर बनाने के पैसे में करोड़ों अरबों की घोटाले बाज़ी।   हर नुक्कड़ हर चौराहे पर राम मंदिर के नाम से भीक (चंदे) की रसीद ऐसे बिक रही है जैसे बरसात का पानी गटर और नालों में बहता है।  फिर वही पैसा मंदिर के नाम पर नहीं बल्कि अपने ज़ाती इस्तेमाल और अय्याशी अवारागर्दी लौंडी बाज़ी शाराब ख़ौरी में संघी और बीजीपी वाले इतेमाल करते हैं।   यह सिलसिला इंतेखाब तक खूब ज़ोरों में चलेगा। 

अपने एक शेर के साथ मंज़मून का इक़्तेदाम करूँगा जो इन संघियों पर सो फीसद दुरुस्त है. 


मंदिर जाए भाड़ में, हम रहें आड़* में, (*पोशीदा, छुपे हुए)

करें मौज मस्ती टाल** में, सीता हो या राधा, (**बांस टाट का बना आरज़ी, अस्थाई)

सभी आ जाए चौपाल में.  

जुबेर

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