अज़ीज़
नाज़रीन,
आज
का मौजूं भारत में फैले भगवा दहशत और ग़द्दारे वतनों से ताल्लुक़ रखता है. जो भी भगवा दहशतगर्द उनके मुहाफ़िज़ और सियासी जमात
बीजेपी सियाह क़ानून "का", एन.आर.सी और एन.पी.आर. की ताईद और मुवाफ़ेक़त कर
रहें हैं असल में वो जिन्ना के दो क़ौमी नज़रिये की ताईद कर रहे हैं, और ये अनासिर मोहम्मद
अली जिन्ना की नस्लों से हैं. क्योंकि गाँधी,
आंबेडकर जवाहरलाल और मौलाना आज़ाद ने तो जिन्ना की दो क़ौमी नज़रिये और तहरीक की ख़िलाफ़
वर्ज़ी की थी तभी तो मौलाना आज़ाद जैसे अज़ीम मुस्लिम रहनुमा भारत में रहे.
एक
बात वाज़े कर दूँ की मौजूदा हिटलर और तानाशाह दो नज़ारियात पर अमल कर रहा है. एक जिन्ना की दो क़ौमी नज़रियात पर दूसरा हिटलर के
फलसफे पर. जिस तरह मौजूदा भारत को नया क़ानून
के साथ ज़ाफ़रानी भारत बनाया गया ठीक उसी तरह हिटलर ने जर्मनी में तमाम यहूदी नस्ल को
ख़त्म करने के लिए सियाह क़ानून लाया था. उस
वक़त ऐसे ही वादे वाईद किये गए थे हम किसी को तकलीफ नहीं देंगे किसी की शहरियत नहीं
जायेगी और फिर किया गया था यहूदिओं का क़त्ले आम.
बच्चों मस्तूरातों और मर्दों को गैस चेंबर में डाल कर गैस छोड़ दी गई थी. जिसका ज़िक्र ये सहाफी कई दफा अपने मज़्मूनों में
कर चूका है.
वैसा
ही अमल मोदी ने गुजरात में आज़माइश के तौर पर किया था. मासूम बच्चों का क़त्ले आम, मस्तूरातों को बरहना
कर के अस्मत दरी करना मर्दों और बूढ़ों के हाथ पैर तक़सीम कर के आतिशे नार करना. फिर वैसा ही गैस चेंबर कश्मीर में बनाया गया और
८० लाख कश्मीरी अवाम की ज़िन्दगी दोज़ख से बदत्तर कर दी. और वही हालात जामिया में किये थे. जब क़ुतुब ख़ाने को गैस चेंबर में तब्दील कर के खाकी
दहशतगर्दों ने गैस छोड़ दी थी, ताके तुलबा दम घुटने से जाहबाक हो जाएँ. अभी तो सियाह क़ानून अमल में आया नहीं था की उत्तर
प्रदेश, कर्नाटक, आसाम, गुजरात में ज़ुल्म के अक्स दिखने लगे थे. जहाँ उत्तर प्रदेश में पुलिस ने निशाना लगा कर गोलिया
चलाई. फिर हलाक़ शुदा अफ़राद के ऊपर हसी मज़ाक
किया. वो तमाम विडिओ मेहफ़ूज़ हैं, और आलमी बरादरी
को भेजे जा चुके हैं. इब्तेदा गुजरात से हुई थी. अगर ऐसा क़ानून अमल कर्दा होता है तो
इसकी इन्तहा देखने को मिलेगी. और इस तमाम क़त्ले
आम में पुलिस के साथ संघी दहशतगर्द भी शामिल होंगे.
ज़ाफ़रानी
दहशतगर्दों के हाथों बुरहान वानी की शहादत के बाद ऐसा ही एक वीडियो इस सहफ़ी को मिला
था. जिसमे एक भारतीय फौज का जवान एके -४७ ताने ८ साल के एक बच्चे के सामने खड़ा है और वो बच्चा आधा बरहना है उसको उल्टा झुका रखा है
और पीछे से दूसरा जवान उसके साथ बदकारी कर रहा है. बीच बीच में बंदूक ताने हुआ जवान हम पे पत्थर फेंकोगे
हमको मारोगे बोल के गलीज़ माँ बेहेन की गाली गलोच करता रहता है. उस खबर को उसी वक़त अपने मज़मून में शाये किया था. अलबत्ता वीडियो डेलीट कर दिया था ये सोच कर की गंदगी
हो रही है जिसका पछतावा और मलाल खूब रहा. बुरहान वानी के साथ भी ऐसा ही किया गया था वो जब
८ साल के थे तो उनको स्कूल से लौटते वक़त उनके दोस्त खालिद के साथ भारतीय फौज ने अगवाह कर लिया था.
फिर बर्बरियत और अज़ीयत ने उनको बना दिया था मुजाहिद.
नाज़रीन, अभी जो संघी दहशतगर्द, ज़ाफ़रानी अनासिर, शिद्दत पसंद गुंडे लंगूर मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ मीठी मीठी बातें कर रहें हैं वो असल में अवाम के साथ धोखा कर रहे हैं. इन जैसे सियाह क़ानून से पहले मुसलमान मुत्तासिर होंगे, फिर हर वो हिन्दू जो हिन्दू राष्ट्र या मोदी, बीजेपी और संघ का मुखालिफ है वो होंगे. जैसे ही ऐसे सियाह क़ानून अमल में आयेगें फिर इनलोगों की नज़रे फ़ौरन तब्दील हो जायेगीं.
जिस
तरह से ये ज़ाफ़रानी अनासिर बोल रहे हैं की हम किसी की शहरियत नहीं छीन रहे हैं हम तो
दे रहें हैं. तो जितने भी पाकिस्तानी, बांगलादेश
और अफ़ग़ानिस्तानी हिन्दुओं को ज़ाफ़रानी पार्टी शेहरितयत देगी वो सभी संघी जेहेनियत के
जिन्ना के दो क़ौमी नज़रियात के हामी और पैकर होंगे. क्योंकि जिन हिन्दुओं ने जिन्ना के पैग़ाम को नहीं
माना था वो पाकिस्तान, बांग्लादेश में रहे और आज बड़े बड़े ओहदों पर फ़ाइज़ हैं. पाकिस्तान में राजिस्थान की सिंधी बच्ची पिछले साल
सिविल जज बनी. उसी हिसाब से बंगलादेश के सुप्रीम
कोर्ट का चीफ जस्टिस आज कल हिन्दू है. लेकिन
वो संघी ज़ेहनियत होगा तो उसने रूपये पैसे का ग़बन कर के जिलातून हो गया. अब जिन
हिन्दुओं को पाकिस्तान बंगलादेश में ख़ौफ़ लगता है और तीसरे मुल्क से मदद मांग रहे हैं
वो सभी दो क़ौमी नज़रिये के हामी हैं.
इस
मौजूं पर ये सहाफी साफ़ अलफ़ाज़ में कहना चाहता हैं, जिस अंदाज़ में मोदी ने भारत को ज़ाफ़रानी
मुल्क में तब्दील कर लिया है, तो उन हिन्दुओं का क्या करेगा जो सेक्युलर दिमाग़ रखते
हैं, जो आज भी गंगा जमुनी तहज़ीब के हामी हैं, जो आज भी अपने मुस्लिम हमसायों के साथ
शाना बा शाना उनके हर ग़म और खुशी के साथी हैं.
जो हिन्दू नहीं चाहते की वो जिन्ना के दो क़ौमी नज़रिये के हामी बने और तारीख़
में उनको ग़द्दार का तमगा दिया जाए. जिस तरह
से संघी दहशतगर्दों के गुरू गोलवलकर और सावरकर को अंग्रेज़ों का गुलाम और तलवे चाटने
वाला माफ़ी मांगने वाला तस्लीम किया जाता हैं.
एक
बात आईने की तरह शफ़्फ़ाफ़ है और इस बात को कोई भी हिन्दू मुस्लिम इंकार नहीं कर सकता
की जो हिन्दू राष्ट्र का मिशन संघ ने शुरू किया था वो उसको पूरा कर के रहेगें. और ना सिर्फ मुसलमानों बल्कि सेक्युलर हिन्दुओं
को भी अब तो तकलीफ का सामना करना पड़ेगा. इसलिए
नहीं के वो हिन्दू राष्ट्र के मुखालिफ हैं बल्कि इसलिए की वोह मुस्लिम मुहाफ़िज़ बन कर
मुसलमानों के हमदर्द बन रहें हैं. हालात मज़ीद
खराब हों पेचीदा हों उससे बेहतर है एक दरमियानी राह निकाली जाए.
ये
सहाफी जिन्ना की दो क़ौमी नज़रिये के ख़िलाफ़ तीन क़ौमी नज़रिये के फलसफे को आगे रखना चाहता
है. ठीक है हिन्दू राष्ट्र भी बने, मुस्लिम
राष्ट्र भी रहे लेकिन जिस सेक्युलर हिंदुस्तान का ख़्वाब वतन को अंग्रेज़ों से आज़ाद करवाने
वाले मुजाहिदों ने देखा था वो भी बने. भारत
का एक और तक़सीम करना ही होगा उसके आलावा कोई इलाज हो ही नहीं सकता. क्योंकि संघ और हुकूमत अपने तानाशाही अंदाज़ में
आ चुकी है और वो किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है. बिल फ़र्ज़ आज पीछे हट भी गई तो इस बात की किया ज़ामिन
है की आगे मज़ीद ऐसे पेचीदा मामले सामने दरपेश नहीं आएंगे जो सीधे सीधे मुस्लिम हूक़ूक़
की हक़तल्फ़ी करेगें.
इस
सेक्युलर भारत में सिर्फ और सिर्फ वही लोग रहेगें जो संघ, बीजेपी और शिद्दत पसंदी के
सख्त मुख़ालिफ़ होंगे. नए भारत से हर उस इंसान
को निकाल दिया जाए जो हिन्दू राष्ट्र की बात करता हो, संघ, बीजेपी का हमदर्द हो. उस नए सेक्युलर भारत में बीजेपी और संघ से जुड़ा
हुआ कोई भी मुसलमान ना आने पायेगा उसको हिन्दू राष्ट्र में ही रहना पड़ेगा. चाहे वो अपने नाम के आगे झूठा सय्यद लगा ले या
नाम के पीछे अंसारी.
फिर
अमित शाह, मोदी, बीजेपी ले कर आये पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बंगलादेश से मज़ीद शिद्दत
पसंद और संघ मुवाफ़िक़ हिन्दुओं को और बसाये हिन्दू राष्ट्र में, फिर अगर कोई भी शिद्दत
पसंद हिन्दू बोलता है की हमारी नौकरी ये लोग खा रहे हैं हमारे वसाइल पर ये लोग क़ाबिज़
हो रहे हैं हमारी सियासत को ये लोग मुत्तासिर कर रहें हैं तब अमित शाह और बीजेपी वाले
अपने शिद्दत पसंद अवाम को समझाने की कोशिश करें की, ये आपके वसाइल छीन नहीं रहें हैं ये तुम्हारे भाई हैं ये तो तुमको कुछ दे रहें हैं.
तमाम
सियासी नुमाइंदों से एक गुज़ारिश हैं ऐसे तमाम मुस्लिम बीजेपी, संघ मुवाफ़िक़ अनासिरों
की एक फेहरिस्त तैयार की जाए जो की हर चंद बीजेपी की मवाफ़ेक़त में बोलतें हैं और गांधी,
जवाहरलाल की तौहीन करतें हैं, उन सभी को हिन्दू राष्ट्र की ज़ीनत ही बनने दिया जाए. ऐसे ही अनासिर दिन रात आने वाले वक़्त में मुजरा
करेंगे.
नोट:
भारतीय टेरर फ़ोर्स का दहशतगर्द विपिन रावत कश्मीर में Deradicalized केम्प की सिफारिश
करता है और मासूम बच्चों को उसमे भेजने की बात करता हैं. ये दहशतगर्द ज़ालिम, दरिंदे हो चुके हैं ये अनासिर
मासूम बच्चों को ऐसे ही Deradicalized के बहाने गैस में चेंबर में भर के ज़हरीली गैस
छोड़ देंगें. ये लोग इंसान नहीं है हैवान हैं,
तभी तो दहशत मचा रही है. अगर इंसान होते तो
इंसानों वाला खुलूस वाला हमदर्दी वाला अमल होता.
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