Tuesday, 14 January 2020

तिलमिला गए संघी, बीजेपी और शिद्दतपसन्द

अज़ीज़ नाज़रीन,

इस सहाफी के हाल ही में दरिंदा, ज़ालिम, ख़ूनी, दहशतगर्द, फ़िरक़ापरस्त तानाशाह के वेस्ट बंगाल में हुई ज़लालत और बेइज़्ज़ती पर शाया ख़बरनामे दरिंदे, शैतान, दहशतगर्द से बनाई दूरी. पर बोहोत से ना ज़ेबा कलेमात वाले तास्सुरात मसूल हुए.  ख़ैर ऐसी बातें और तास्सुरात, धमकियाँ, ना ज़ेबा कलेमात अब इस सहाफी को एक आम बात लगतें हैं.  २०१४ से पेश्तर जब तक कांग्रेस की हूकरानी थी इस सहाफी के किसी भी मज़मून पर कभी भी ऐसी कोई भी गन्दी गलीज़ गाली गलोच वाली बात नहीं हुई.  और अगर होती भी थी तो बोहोत कम, और उस वक़्त ऐसी बातें दिल को लगती थी.   लेकिन २०१४ के बाद तो अब आदत हो गई है और अब तो ऐसे कलमात पर एहसास भी खतम हो गया है और ना ही कोई ताज्जुब और परेशानी होती है.  हम हमारा काम करते रहेगें उनको उनका काम करने दो.  रहा सवाल मौत देने का या गिरफ्तार करने का तो २०१० से जो ज़न्खे संघी, शिद्दत पसंद और बीजेपी के दहशतगर्द नहीं कर सके तो अब क्या करेगें.  क्योंकि हर मुसलमान का ये यक़ीन है की हर काम अल्लाह की मर्ज़ी से होता है और कोई भी संघी दहशतगर्द किसी भी इंसान को मौत और ज़िन्दगी का देने वाला नहीं हो सकता अगर अल्लाह की मर्ज़ी नहीं होगी.    

संघियों और बीजेपी के शिद्दत पसंदों का एतेराज़ दो चीज़ों पर था.  एक मोदी को उसके असली ओहदे यानी ज़ालिम, दरिंदे, शैतान, हिटलर, क़ातिल जैसे नामों से ख़िताब क्यों किया उसको वज़ीरे आज़म काहे को ख़िताब नहीं किया.  दूसरा एतेराज़ जिन्ना का नाम गाँधी और पटेल से मिला कर वतन परस्त लिखा.  में उन तमाम शिद्दत पसंदों, दहशतगर्दों से कहना चाहता हूँ तुम जिन्ना की दो क़ौमी नज़ारिया की ताईद कर रहे हो उनके बनाये हुए रस्ते पर चल रहे हो और उन के नाम से ख़फ़ा भी हो रहे हो.  बरसों पहले तुम्हारे आबो अजदाद सावरकर ने जिन्ना की दो क़ौमी नज़ारिया की ताईद की थी और उस नज़रिये को दुरुस्त तस्लीम किया था.  फिर मौजूदा दरिंदा, ज़ालिम, ख़ूनी, दहशतगर्द, फ़िरक़ापरस्त तानाशाह उसी दो क़ौमी नज़रिये पर भारत को हिन्दू राष्ट्र बना के ले जा रहा है.   और आप जिन्ना पर एतेराज़ कर रहे हो.  आपका एतेराज़ ना मुनासिब और ग़ैर वाजबी है.  हाँ एतेराज़ चाहें तो असदुद्दीन कर सकतें हैं.  जो दो क़ौमी नज़रिये के सख़्त मुख़ालिफ़ हैं.  हिन्दुस्तान के दस्तूर की हिफाज़त का अज़्म रखतें हैं.  गाँधी वादी सोच को फ़रोग़ देतें हैं. 

दूसरी बात वाज़े करना चाहूँगा की सियासत करने का गर इतना ही शौक़ है तो हक़ की बात भी करो.  एक जानिब तो आप लोग गोडसे को वतन परस्त बोलते हो और गाँधी को गद्दार, तक़सीम का अहम किरदार तस्लीम करते हो दूसरी तरफ आप गांधी की हिमायत में आ जाते हो.   एक तरफ आप ऐवान में पाकिस्तानी हाफिज की बेगम दहशतगर्द के बयान को मंज़ूर करते हो जो गांधी को बरजस्ता गाली देती है और गाँधी के क़त्ल पर गोडसे की हिमायत करती है दूसरी जानिब आप गांधी के हिमायती बन के खड़े हो जाते हो.   एक तरफ तो आप गांधी को क़त्ल करने के बाद उनकी भाईचारगी, गंगा जमुनी तहज़ीब की रूह को भी ख़त्म करना चाहते हो और दूसरी जानीब गांधी के हिमायती बन के खड़े हो जाते हो.

एक तरफ तो आप भारत को हिन्दू राष्ट्र बना रहे हो, जो गांधी के उसूलों की खिलाफ़वर्ज़ी करता है दूसरी जानीब अब गांधी के हिमायती बन के खड़े हो जाते हो.  पहले आप ये ते कर लो की आप लोग संघी, बजरंगदली, बीजेपी और शिद्दत पसंद हिन्दू किस जानीब हो, और किस सोच की ताईद करते हो गांधी वादी सोच की या गोडसे वादी सोच की. अगर गांधी वादी सोच की ताईद करते हो, तो अपने दहशतगर्द तरबियती इदारों में गोडसे मुर्दाबाद गांधी ज़िंदाबाद के नारे लगाओ तो में अपने मज़मून में तरमीम करने के बारे में सोच सकता हूँ. 

इन संघियों और बीजेपी से में सिर्फ एक सवाल करना चाहूंगा की उनकी राये  जय भगवन गोयल की किताब "आज के शिवाजी" के बारे में क्या है.  उसने तो शिवाजी को हिटलर से मिला दिया.  इसमें दो बातें निकल कर आ रहीं हैं. एक या तो शिवाजी भी दरिंदा सिफ़त, ख़ूनी, फ़िर्क़ापरस्त, ज़ानी, ना इन्साफ हाकिम थे.  या मोदी वैसा नहीं है जैसा की दिखाया जा रहा है.  अब सवाल ये उठता है की तारीख़ के सफों में ना जाते हुए आज की बात करतें हैं.  जो कुछ भी गुजरात में हुआ वो किसी से भी पोशीदा नहीं है.  फिर मोदी के इन्साफ का पैमाना भी खूब देख लिया.  तो ये बात यहाँ पर साबित होती है की मोदी के बारे में जो कुछ भी कहा जा रहा है वो थोड़ा है कम कहा और लिखा जा रहा है.  अगर उसको गुंडा, डॉन, अंडरवर्ल्ड और कुछ भी तमग़ों और ओहदों से नवाज़ा जाए तो भी कम होगा. 

फिर जिस अंदाज़ में सहाफत की आवाज़ को घोंटा जाता है, नौजवानों तालिबे इल्मों की आवाज़ को दबाया जाता है.  तालिबे इल्मों को नाबीना, लंगड़ा लूला कर दिया जाता है वो किसी से भी पोशीदा नहीं है.  २०१४ के बाद जे.एन.यूं.  एक साजिश के तहत बदनाम किया जाता रहा वो भी किसी भी बा विक़ार और तालीमी आफ़ता अवाम से पोशीदा नहीं है.  ना सिर्फ जे.एन.यूं. बल्कि हर यूनिवर्सिटी और ख़ास तालिबे इल्मों की तालीम से मोदी को हसद और जलन महसूस होती है. 

ऐसा नहीं है की तानाशाह, दरिंदा सिर्फ तालिबे इल्मों से ख़फ़ा है.  बल्कि हर वो इंसान उसके और उसके पैरोकारों के हाशिये पर आ जाता है चाहे वो तालीम साज़ हों, आला ताजिर हों, दानिशमंद हों, बॉलिवुड की हस्तियां हों या हुकूमत के ज़ेरे क़यादत काम करने वाले आला ओहदेदार या अदलिया हो, जो कोई भी उसकी हुकूमत को आइना दिखाने की कोशिश करता है या हक़गोई के परचम का अलम्बरदार होता है, तनक़ीद करने वाला शख्स हो गया मोदी का दुश्मन नंबर वन.  फिर तानाशाह को इस बात से कोई सरोकार नहीं की तनक़ीद करने वाला आला तरीन ओहदे दार है या अदना तरीन शख्स है.  

नाज़रीन आप लोगों को दो बातें वाज़े करना चाहूंगा की ये सहाफी तानाशाह के मुक़ाबले में बे हद अदना दर्जा रखता है दूसरी बात तमाम संघी, शिद्दत पसंद और बीजेपी वाले इस सहाफी को "डी" क्लास पत्रकार, झोला छाप, मदरसा तालीमी आफ़ता और ना जाने कौन कौन से अलक़ाब से नवाज़ते हैं.  लेकिन क्या वजह है की इस अदना सहाफी से तानाशाह उसकी हुकूमत ३६५ ऐवाने पार्लियमान इस हद तक ख़ौफ़ज़दा हैं की इस सहाफी के तमाम सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कर दिए गए हैं.   एक तरफ संघी "डी" क्लास पत्रकार, झोला छाप बोलते हैं दूसरी जानीब इतना खौफ ज़दा हैं की इस सहाफी के अकाउंट ब्लॉक कर रहें हैं.

१.           फेस बुक के तीनों अकाउंट से उसका ब्लॉग इंग्लिश हिंदी ब्लॉक है.
२.          यूं टूयब अकाउंट ब्लॉक है.
३.           इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक है.
४.          ट्वीटर के दोनों अकाउंट एक मुस्तक़िल ससपेंड एक ब्लॉक है.
५.          लिंक्ड इन अकाउंट ब्लॉक दूसरा बनाया फिर ब्लॉक
६.          गूगल+ अकाउंट जानकारी ब्लॉक.

क्या वजह है इस सहाफी के सोशल मीडिया के तमाम अकाउंट ब्लॉक कर दिए गए.  वजह एक ही है की इस सहाफी की हक़ गोई की बात अवाम तक ना पहुंच पाए.  जहाँ तक इस सहाफी की माशी हालात को जर्ब देने का सवाल है तो मोदी ऐसा कर ही नहीं सकता क्योंकि इस सहाफी का ज़ारिया ऐ माश अलहदा हैं और सहाफत में काम करने का मक़सद सिर्फ और सिर्फ हक़ और इन्साफ के परचम को बुलंद करना था और अवाम के अंदर बेदारी लाना था, जो आ रही है. 

ऐसा नहीं है ये सहाफी सिर्फ बीजेपी के दहशतगर्दाना ज़ेहनियत और मोदी के तानाशाही के खिलाफ ही लिख रहा है.  कांग्रेस के दौरे हुकूमत में भी ये सहाफी सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ता था.  और हर ना इंसाफ़ी पर तब के वज़ीरे अज़ाम को तहरीरी ख़त लिख कर हुकूमत से सवाल तलब करता था.  चाहे वो बे क़ुसूर मुल्सिम नौजवानों को दहशतगर्दी के इलज़ाम में जेल में डालना, या कश्मीर की आज़ादी, चाहे वो बाबरी मस्जिद के ऊपर कांग्रेस की ग़फ़लत राजिव गांधी और संघी एजेंट नरसिम्हा राव की मुस्लिम अवाम के साथ गद्दारी.   लेकिन हुकूमत से अर्ज़ करने के बाद एक्शन नज़र आती थी.  उस वक़्त के वज़ीरे आज़म और वज़ीरे आला को शिकायत करने पर अमल होता था.  कई दफा एहसास हुआ बेलापुर या बॉम्बे के किसी भी हलके में अगर कोई ग़ैर ज़रूरी अनासिर (संघी, बीजेपी या शिद्दत पसंद) ज़ेहनियत कस्दन गाडी के आगे आ कर रास्ता रोकने की कोशिश करते थे या ट्रैफिक जाम करते थे तो फ़ौरन ट्रैफिक पुलिस ऐसे अनासिरों को साइड में ले कर एक्शन लेते थे और एक मेहफ़ूज़ रास्ता दे कर गाडी को आगे जाने देते थे.  लेकिन जब तक महाराष्ट्र में बीजेपी की हुकूमत थी, खुद पुलिस वाले रास्ता रोकते थे.

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