Wednesday, 1 January 2020

भारत में नया साल नई सुबह एहतेजाज से हुआ आगाज़.

२०१९ भारत के लिए सख़्त दुशवारकुन और अज़ीयत भरा रहा.  मज़ीद २०२० में वो तमाम मसले भारत को तकलीफ और परेशान करेंगे जिनकी तलाफ़ी २०१९ में नहीं हो पाई थी.  अव्वलीन है भारत की गिरती हुई माशी हालत और आलमी बरादरी में अक़लियतों के हुक़ूक़ की हक़ तलफी के सबब गिरती हुए साख.  पुलिस की हाल ही में दिसम्बर में की गई बर्बरियत, डकैती, लूट मार, बंदूक से निशाना लगा कर मुस्लिम अवाम को मंसूबा बंदी कर के हलाक़ करना, अवामी और निजी जायदाद की तोड़ फोड़ करना गाड़िओं, मोटर साइकल्स को तोडना गिराना और आतिशे नार करना.  इन सब मुद्दों को बिल फ़र्ज़ एक तानाशाही और मुत्तसिब हुकूमत नज़र अंदाज़ कर भी दे क्योंकि वो ख़ास मुस्लिम अवाम की हक़ तलफी से जुड़ा हुआ है लेकिन मसलाये कश्मीर को तानाशाही अंदाज़ कैसे फरामोश करेगा. 

मसलाये कश्मीर अब अक़वामे मुत्तहिदा की ज़ेरे नज़र है, तमाम आलमी बरादरी और ख़ास आलमी इस्लामिक मुमालिक की तंज़ीम ने इस मसले पर अपना सख़्त रव्वैया इख़्तेयार किया हुआ है.  २०१९ में मलेशिया, तुर्की, पाकिस्तान ही कश्मीर मसले पर हम ख़याल थे.  दिसबर २०१९ आते आते सऊदी अरब ने पाकिस्तान के सूर से सूर मिला कर इस मसले पर तमाम मुस्लिम मुमालिक एक इजलास मुनक़्क़िद करने और मस्लए कश्मीर पर एक क़रारदार पास करने का फैसला लिया है.


अगर फलाह और बक़ा चाहते हो, तो इस नारे को इसी अंदाज़ में हिफ़्ज़ कर लो. आगे इसकी खूब ज़रुरत है.

भारत अपने अंदुरूनी और घरेलू झगड़ों से इतना कमज़ोर हो गया था मज़ीद उसपे खाना जंगी जो दिसम्बर २०१९ में मोदी के तानाशाही और ज़ालिमाना, बर्बरियत, मुत्तसिब ज़हरीले, ख़िलाफ़े दस्तूर, ना इंसाफ़ी वाले रवय्ये को देखते हुए शुरू हुई थी अब क़ब्ल अज़ वक़्त इक़्तेताम या हतमी मरहले को पहुंचते हुए नहीं दिख रही है. 

इस मूजूँ पर नए साल के आगाज़ और २०१९ के ख़ात्मे पर अवाम ख़ास तुलबा ने एक अलग अंदाज़ में एहतेजाज किया.  हज़ारों भारतीय अवाम ने एक घेरा बना कर शहरियत क़ानून के खिलाफ एहतेजाज किया.  ये एहतेजाज मज़ीद सख़्त होने का अंदेशा है क्योंकि वज़ीरे  अज़ाम ने हस्बे मामूल अपनी फरेबी तक़रीरों में अवाम को मुतमईन करने की ना काम कोशिश की थी.  ताहम आज तीन हफ़्तों से अवाम सड़कों पर है और उस पर वज़ीरे अज़ाम की गुज़ारिश का कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है.

भारत १२ दिसम्बर से सख़्त एहतेजाज के ज़ेरे साये है, जब से हुकूमत ने नया क़ानून बनाया है जिसके तहत पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बंगलादेश के हिन्दू, जैन, बोध, सिख, क्रिस्टी, पारसी इन ग़ैर मुस्लिम अवाम को भारतीय शहरियत दी जायेगी.  इसके साथ साथ हुकूमत ने वाज़े किया है की शहरियों का क़ौमी अनदराज़ किया जाएगा.  बे पनाह भारतीय अवाम को खदशा है की हुकूमत की इस तरीक़ेकार मुत्तसिब हिकमते अमली से अक़लियतों ख़ास मुसलमानों के हुक़ूक़ की सख़्त हक़ तलफी होगी, दूसरी एहतेजाज की वजह है की अभी तक जितने भी क़ानून ज़ाफ़रानी हुकूमत ने मुसलमानों की निस्बत से बनाये वो तमाम दस्तूर के बूनयादि ढाँचे को इज़ा  पहुंचाने वाले रहे हैं और ऐसे तमाम क़ानून दस्तूर की खिलाफ वर्ज़ी करतें हैं.  ये ही वजह है की बावजूद लाख ज़ाफ़रानी वज़ीर अज़ाम के अपील करने के अवाम की एहतेजाज को ख़त्म करने की कोई मंशा नज़र नहीं आ रही है.  

नए साल के आगाज़ पर भारत की दारुल हुकूमत दिल्ली में तीन अहम तरीन एहतेजाज मुन्तक़िद किया थे.  शाहीन बाग़ जहाँ गुजिस्ता १८ रोज़ से एहतेजाज शुरू है और हज़ारो की संख्या में अफ़राद मौजूद हैं, जिसके सबब तमाम इलाक़ा ब्लॉक है. 
ये रिहाना ख़ातून है जो अपनी २९ दिन की बेटी के साथ पिछले १२ रोज़ से एहतेजाज का हिस्सा हैं३१ दिसम्बर को भी वो रात भर एहतेजाज में शामिल थी.

दुसरे जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में जिस अंदाज़ में खाकी पुलिस ने दहशत मचाई थी और तमाम यूनिवर्सिटी को झालियावाला बांग में तब्दील कर दिया था उसके खिलाफ था.  इस हमले में पुलिस ने तमाम गेट पर अपने बंदूक धारी जवानों को तैनात कर दिया था. और खाकी दहशतगर्द तालिबे इल्मों के ऊपर एक वेह्शी दरिंदे जंगली जानवर के जैसे बंदूकों, ऐ.के ४७, रॉकेट लांचरों  के साथ टूट पड़े थे.  अब जो भी तालिबे इल्म नज़र आता उसके ऊपर सख़्त तरीन तशद्दुत पर बर्बरियत करते हुए देखे जा सकते थे.  इस हमले में एक तालिबे इल्म की बीनाई चली गई और कुछ दो जांबाहक हुए थे. 
 नए साल में एहतेजाज करते हुए तुलबा और नौजवान.

कमो बेश ७० से ज़ाइद हाथ पैर से माज़ूर हो गए.  लड़कियों के साथ भी इन दहशतगर्दों ने बदतमीज़ी की और लेडीज बैतूल ख़ला के अंदर घूस गए लेडीज रूम के अंदर घूस गए थे.  जनरल डाइर के इन दहशतगर्दों ने लड़किओं तक को बे ज़र्ब पीटा और तमाम यूनिवर्सिटी को तुलबा के खून से सुर्ख़ कर दिया.   इस मुज़ाहिरे में मुन्तज़िम ने शायरी के साथ तक़रीर का एहतेमाम किया गया था.

इस नए साल के एहतेजाज में एक क़रारदार पास किया गया की दस्तूर को मेहफ़ूज़ करना है.  जो सदी का सबसे  सर्द दिन रहा.

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