आज़ाद मैदान मुंबई में यूनिवर्सिटी के तुलबा और तालिबे इल्मों से सख्त
एहतेजाजी मुज़ाहेरा किया. इसमें ख़ास कॉलेज की
बच्चिओं ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया. इस मौक़े
पर जिस हिसाब से जामिया की उस बच्ची ने फैज़ की नज़म को अपना किरदार बना के एहतेजाज में
पेश किया था उसी तर्ज़ पर मुंबई के आज़ाद मैदान में तालिबे इल्मों ने एक नग़मा तैयार किया
था. लेकिन इसके आशार किसी शायर या फैज़ की
उर्दू नज़म से मुत्तासिर नहीं थे बरक्स जो संघी दहशतगर्दों ने भारत में ग़दर और दहशत
फैला रखी है उसके ऊपर हिंदी में सख़्त मज़्ज़म्मती अलफ़ाज़ से भरे थे. "मानवता को चले रोंदने, जूते मारो संघियों
को...... दे दना दन दन दन दे दना दन दन".
इस बीच खबर आ रही है मोदी की तानाशाही, दहशतगर्दी, ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त,
शैतानी ज़ेहनियत के चलते ज़मीन तंग होती जा रही है.
उसके बेरुन मुल्क दौरों में ख़ासी कमी आई है, जिसकी शुरूआत, अगस्त २०१९ में कश्मीर में भारतीय
फौज और संघी दहशतगर्द हमलों के चलते ही हो गई थी.
आलमी बरादरी के सख़्त एहतेजाज और उसके तानाशाही रवैय्ये के चलते तानाशाह मोदी
ने अपने बेरुन मुल्क दौरों को मंसूख करना शुरू कर दिया था. अक्टूबर २०१९ में उसने अपना
टर्की का सिफारती दौरा मंसूख कर दिया था.
नाज़रीन आपको बताते चलें की जून २०१४ में जब से तानाशाह मोदी ने अपनी शिद्दत
और इक़्तेदार बिल जब्र के फलसफे को इख़्तियार करते हुए ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और बंदूक के
ज़ोर पर हुकूमते हिन्द का तख़्ता पलट कर के खुद गद्दी पर फ़ाइज़ हुआ था तब से ले कर नवंबर
२०१९ तक तानाशाह तक़रीबन ६० से ज़्यादा बेरुन मुल्क में मौज मस्ती कर चूका है. उसकी मौज मस्ती की इफ्तेताह भूटान की खूबसूरती से
हुई थी. जहाँ की खूबसूरती के साथ तानाशाह १५-
१६ जून २०१४ दो दिनों की मौज कर के आया था.
जहाँ पिछले कुछ सालों में उसने कमो बेश ६० से ज़ाइद बेरुन मुल्क दौरे किये वही
०५ अगस्त २०१९ के बाद महज़ ७ मर्तबा तानाशाह
बहार गया. उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ एक है तानाशाही
और दहशतगर्दी के सबब बेरुन मुल्क उसकी ज़लालत और बेइज़्ज़ती जो उसको सख़्त परेशान कर रही
थी.
खबर ये भी है की अगस्त २०१९ में कश्मीर में दहशत और दरिंदगी फ़ैलाने, इंसानी
हुक़ूक़ की सख़्त खिलाफ़वर्ज़ी के सबब तानाशाह आलमी बरादरी से इस क़दर आजिज़ आ गया था की उसने
अक़वामे मुत्तहिदा का एक अहम इजलास अपनी मसरूफियत का हवाला दे कर मन्सूख़ कर दिया था. उसके बाद सऊदी अरब का दौरा अपने ते शुदा वक़्त से
क़ब्ल ही खत्म कर के वतन लोट आया था.
बरक्स अब तो उसको खुद के हिन्दू राष्ट्र में जिसके ऊपर उसको नाज़ था ज़मीन
तंग कर दी गई है. मुल्क की फ़िज़ा और नौवजवानों
के सख़्त एहतेजाज ने उसका चलना फिरना, घूमना फिरना तंग कर दिया है. इसी साल २०२० को शुरू हुए अभी महज़ १० दिन गुज़रें
हैं लेकिन उसको अपने आसाम दौरे को मंसूख करना पड़ा हैं. बरोज़ बुध ८ जनवरी २०२० को उसने दूसरी मर्तबा अपना
आसाम दौरा रद्द किया है. जुमे को तानाशाह मोदी
को ३रा खेलो इंडिया युथ खेल का इफ्तेताह करना था लेकिन आसाम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू)
के सख़्त एहतेजाज और रव्वैये के चलते उसको अपना दौरा मंसूख करना पड़ा है. ये पहला मौक़ा है जब मोदी को महज़ एक महीने के अंदर
दो बार अपने ही मुल्क में दौरा मंसूख करना पड़ा है.
आसाम के बाद अब नरेंद्र मोदी का इम्तेहान मग़रिबी बंगाल में था. वोह यहाँ दो दिन के दौरे पर बरोज़ सनीचर ११ जनवरी
को कलकत्ता पंहुचा है. लेकिन यहाँ पर भी उसको सख़्त एहतेजाज का सामना करना पड़ रहा है. शहरी तरमीम क़ानून के चलते तालिबे इल्मों के जामात
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने मोदी के कलकत्ता दौरे की सख़्त मुख़ालेफ़त की है.
मोदी की आमद पर तमाम कलकत्ता सियाह रंग में तब्दील हो चूका है. यहाँ तक की फ़िज़ा और हवा भी काली हो चुकी थी. तालिबे इल्मों ने सियाह गुब्बारे हवा में छोड़े,
और सियाह परचम से एहतेजाज किया, जिसमे लिखा था " यू आर नोट वेलकम (तुम्हारा ख़ैरमक़दम
नहीं है)", "मोदी गौ बैक (मोदी वापिस जाओ)". इस दौरान मोदी को चीख़ बाज़ों की चीख़ का सामना करना पड़ा. चीख़ बाज़ों ने नारे फेके .


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