Sunday, 6 January 2019

२०१४ से पहले कश्मीर से केरला तक भारत एक था.


कुछ मुद्दों पे राजनीति ना चाहते हुए भी हो जाती है, और कुछ मुद्दे बनाये ही राजनीति करने के लिए जाते है.  अब ये तो राजनैतिक पार्टिओं को देखना चाहिए जो मुद्दे राजनीति के लिए बनाये गए हैं उनसे उनका कितना फायदा है और देश का समाज का कितना फ़ायदा है.

बीजेपी सदा ही राजनैतिक लाभ लेने के लिए मुद्दों की तलाश में रहती है और दिखावा देश हित का; समाज हित में; महिलाओं के लिए. ऐसे ही मुद्दे बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गए थे और बीजीपी ने उनके ऊपर अपनी राजनैतिक रोटी सेकने की कोशिश की थी लेकिन रूसवाई और ज़लालत हाथ लगी.  जिन मुद्दों पे बीजेपी ने राजनैतिक फायदा लेने के लिए उनको तूल दिया था उन सभी में गाडित उल्टा हो गया और बजाये फायदा होने के बीजपी का कद पहले से और छोटा हो गया.  नीचे दर्शाये हुए मुद्दों पे:-

१.           गौ हत्या बंदी का पाखंड
२.          लव जिहाद
३.           ट्रिपल तलाक़
४.          बाबरी मस्जिद
५.          कश्मीर
६.          ज़हरीला, साम्प्रदाइक, संविधान विरोधी गाना "वन्दे ........." अनिवार्य करना.
७.       ज़हरीला नारा "भारत........"  सवेरे सवेरे ज़बरदस्ती चिल्लाने लगाना और जनता को परेशान करना.
८.          हाफिज सईद की गिरफ्तारी,
९.          ज़ाकिर नाइक की गिरफ्तारी तथा प्रत्यर्पण

रूसवाई  के बाद अगली क़िस्त थी केरला.  ये रूसवाई बीजेपी और संघी आतंकवादिओं के लिए केरला के मशहूर लव जिहाद के फ़र्ज़ी केस से शुरू हुई थी.   मज़े की बात ये है की हर उस मुद्दे पे बीजेपी, संघी आतंकिओं, कट्टरपंथी हिन्दुओं को ज़लालत और रूसवाई का सामना करना पड़ रहा है जिसमे उनके साथ लंगूरों की टीम तो है उस मुद्दे को हवा दे कर समर्थन करने के लिए लेकिन इस पत्रकार का उन सभी मुद्दों पे विरोध था और वो उन सभी पे कटाक्ष दृष्टिकोण रखता था और वो बीजेपी तथा संघ से अलग ही विचार धारा रखता है.  

दूसरी बात ऊपर दर्शाये हुए सभी मुद्दों पे पहले ही लेखक अपने लेखों के ज़रिए या ट्वीट कर कर बोल चूका था की इसमें बीजेपी को ज़लालत मिलेगी और हार का सामना करना पड़ेगा.  २ साल पहले ट्रिपल तलाक़ मुद्दा शुरू होने और लोक सभा में सबसे पहली बार बिल पेश करने से पहले ही लेखक ने एक पंडित जी के ट्रिपल तलाक़ पे ट्वीटर पे चैट करते हुए कह दिया था ये बिल हरगिज़ पास नहीं होगा और बीजेपी को ज़लील होना पड़ेगा.  लव जिहाद मुद्दे पे भी लेखक ने सुप्रीम कोर्ट में केस जाने के साथ ही एक लेख लिखा है जल्द ही इन युगल के हक़ में फैसला होगा.  फिर हिन्दू से मुसलमान बनी हदिया शफीन को एक बधाई सन्देश में लेखक ने उनके ट्वीटर हैंडलर पे ट्वीट किया था बोहोत जल्द आप अपने बिलवड पति से मिलोगी और आपकी सारी परेशानिया दूर होंगी. 

हाल ही में सबरीमाला पे बीजेपी और संघ की दोगली नीति और कपटी चरित्र जग ज़ाहिर हो गया.  कश्मीर में नरसंघार फैलाने के बाद शैतान ने अपने नापाक इरादे केरला में साफ़ ज़ाहिर कर दिए की वो भारत के एकमात्र सबसे ज़्यादा साक्षर, सर्व सम्प्पन तथा महिलाओं को सबसे ज़्यादा हक़ देने वाले एक मात्र राज्य को अपने राजनैतिक फायदे के लिए तबाह और बर्बाद कर देगा.  सबरीमाला एपिसोड सिर्फ और सिर्फ राजनीति से प्रेरित है और उसमे आग में घी डालने का काम कर रहे हैं बीजेपी और संघी आतंकी.  केरला की स्थानीय जनता उस मुद्दे पे उतना इश्तेआल नहीं दिखा रही है जितना के कट्टरपंथी और संघी मानसिकता के ज़हर में डूबे हुए लोग दिखा रहे हैं.    

हालांकि सबरीमाला पे ना तो ये पत्रकार किसी भी पक्ष के समर्थन में था और ना ही उसका विरोध था, फिर भी सबरीमाला पे भी बीजेपी और संघी शैतानों को ज़लालत और रूसवाई का सामना करना पड़ेगा.  जिस तरह से ऊपर दर्शाये हुए सभी मुद्दों पे ये पत्रकार खुल के मुद्दों का समर्थन कर रहा था और सत्ता धारी सरकार बीजेपी के विरोध में था है और रहेगा.   नतीजा लंगूरों के ज़बरदस्त विज्ञापन के बावजूद वो सभी मुद्दे फ्लॉप हुए जिनमे बीजेपी ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया था.

जैसा की लेख की शुरूआत में इस पत्रकार ने कहा है की कुछ मुद्दे ना चाहते हुए भी पैदा हो जाते हैं, चुनाव से कुछ ही समय पहले ऐसा ही एक मुद्दा ज़बरदस्त उबाल मचाएगा जिससे सत्ता धारी और विपक्ष दोनों की साख को ज़बरदस्त झटका लगेगा.  वो मुद्दा ना तो राजनीति से प्रेरित होगा और ना ही राजनेताओं द्वारा पैदा किया हुआ परन्तु अपने आप प्रकाश में आ जाएगा.  जिसका फायदा कोई तीसरा ही उठा ले जाएगा.

बचपन में एक कहानी सुनी थी दो बिल्लियाँ रोटी के बटवारे को लेकर लड़ाई कर रहीं थीं, उनकी लड़ाई का फायदा एक चतुर लोमड़ी ने उठाया और सुलह बीच बचाव करने के चक्कर में थोड़ी थोड़ी खा कर समूची रोटी को चट कर डाला और बिल्लिओं के हाथ लगा.  ठींगा.

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