Tuesday, 1 January 2019

अब ट्रिपल तलाक़ का जिन्न निकला बोतल से बहार.

मोदी जी को सदा ही जिन्नों का डर बना रहता है, और कोई ना कोई जिन्न बोतल से बहार ही रहता है और मोदी जी को कड़ी चुनौती देता रहता है डराता रहता है.  इस विषय पे ये सहाफी राफेल के जिन्न के बोतल से बहार आने के बाद एक लेख पहले ही लिख चूका है.  उस लेख में लेखक ने साफ़ ये ही बात कही है २००२ के दंगो के जिन्न ने मोदी जी का पीछा तब तक नहीं छोड़ा जब तक वो प्रधान नहीं बन गए.  लगता नहीं के राफेल का जिन्न इतनी आसानी से उनका पीछा छोड़ने वाला है.  अभी राफेल का जिन्न उनके सर पे सवार ही था की ट्रिपल तलाक़ का नया जिन्न हाज़िर हो गया.   लगता है इसके पास नहीं है,  मोदी जी के पास तो बिलकुल नहीं है.  मतलब रूहानी ताक़त, बुज़ुर्गी तभी तो कोई ना कोई खबीस जिन्न उनके पीछे लगा रहता है.  मोदी जी अपने आपको फ़कीर कहतें हैं, जिसके ऊपर इस सहाफी ने उनकी फकीरी के ऊपर तन्ज़िया मज़मून फ़कीर: करोड़पति या रोडपति लिखा है.

ये सहाफी ट्रिपल तलाक़ बिल के ना ही कभी खिलाफ था और ना ही है.  असल में वो तो बीजपी का अहंकार और मोदी की हटलर मानसिकता के खिलाफ था, है और रहेगा.  इसी अहंकारी की वजह से बीजेपी को हर जगह ज़लालत और रूसवाई का सामना करना पड़ रहा है. जब सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आया था अगर तभी सरकार खामोश हो जाती और बिल बनवाने की कोई कवायत ही नहीं करती तो उसकी साख बनी रहती थी.

ट्रिपल तलाक़ बिल को बीजेपी मुस्लिम महिला संरक्षण कानून का नाम दे रही है, उसमे सिर्फ विवाह से सम्बंधित समस्या पे पति को जेल जाने का प्रावधान रखा गया है.  जबकी सरकार अगर मुस्लिम महिला संरक्षण और उसके अधिकारों के ऊपर बिल बना रही थी तो सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर और सभी अधिकारों के ऊपर सजा का प्रावधान होना चाहिए था; ३ साल के जेल के प्रावधान में ये बातें भी शामिल होना चाहिए थी:-

१.        अगर बेस्ट, अस.टी. बसों में टिकट कंडक्टर किसी भी मुस्लिम महिला (बुर्का पोश / बगैर बुर्का)  के साथ अभद्रता करता है गाडी से नीचे उतार देता है. गाली गलोच करता है तो उसके ऊपर तुरत कारवाही होनी चाहिए.  फिर ऐसी ही शिकायत उस महिला की तरफ से कोई भी कर सकता है भले ही बस में सवार कोई भी यात्री हो या उसका कोई रिश्तेदार या खुद वो महिला.  क्योंकि ऐसे बोहोत से मामले नज़र में आये है की बेस्ट कंडक्टर ने बुर्क़े की वजह बांद्रा, जोगेश्वरी, कोलाबा रुट पे चलने वाली बसों में स्कूल जाती हुई बच्चिओं को बस से नीचे उतार दिया.   कुछ केसेस में मुस्लिम बच्चिओं से कंडक्टर ने ऊट पटांग सवाल पूछे.  जिसके ऊपर ये पत्रकार कुछ २०११-१२ में तब की केंद्र और महाराष्ट्र सरकार तथा बेस्ट कार्यालय को पहुंच पावती के साथ लिखित नोटिस में ये बातें ला चूका है.    

२.          स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों में मुस्लिम बच्चिओं के साथ शिक्षकों, चपरासी, क्लर्क या सहपाठीयों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अभद्र भाषा और बुर्क़े का मज़ाक बनाना तथा क्लास रूम में बुर्का उतरवाना.  जिस मुस्लिम बच्ची को बुर्का पहनना है वो पहने लेकिन तुम ज़बरदस्ती नहीं उतरवा सकते.

३.          मीडिया में हिन्दू कट्टरपंथिओं द्वारा मुस्लिम महिलाओं पे बच्चे पैदा करने की मशीन,  हम से शादी कर लो, नंगा कर के रोड पे रेप करो, जैसी अभद्र टिप्पड़ी करने वाले कट्टरपंथी लोगो के ऊपर तुरत कारवाही.

४.    काम करने की जगह पे हिन्दू कट्टरपंथ ज़ेहनियत का उनको मानसिक छल करना, कभी कभी उसकी पोस्ट और ओहदे से गिरा हुआ काम देना.  बातों बातों में उनकी इज़्ज़त पे वार करना. मज़हब, बच्चे पैदा करना, बुर्क़े गौ मास खाने जैसी बातों से पाकिस्तानी बोल के उनका मानसिक छल करना.
 
५.     अगर कोई भी मर्द किसी भी मुस्लिम महिला के साथ गाली गलोच करता है नीच भाषा का इस्तेमाल करता है तो तुरत उसके खिलाफ कारवाही होना चाहिए.

इस संरक्षण कानून के तहत ३ साल से ज़्यदा जो मामले आते है उनको काहे को नहीं शामिल किया गया.

१.     किसी मुस्लिम महिला के पति, बेटे को भीड़ तंत्र ने पीट पीट के हलाक कर दिया. इन जैसे हमलो में मुस्लिम महिला को अलग से संरक्षण और कानून की ज़रुरत है.
२.     दंगों में किसी भी मुस्लिम महिला के पति, बेटे, पोते, नवासे या कोई रिश्तेदार की दंगाइओं द्वारा मृत्यु पे अलग से कानून होना चाहिए.
३.     मुस्लिम बच्ची, महिला के ऊपर बलात्कार करने वाले को भी इस कानून के प्रावधान के अन्दर शामिल किया जाना चाहिए था.

राफेल, मेह्गाई, ट्रिपल तलाक़, बाबरी मस्जिद, किसान और बोहोत से जिन्न मोदी जी और बीजेपी के लिए इस साल मई तक खतरा, रूसवाई और ज़लालत का बाइस बनेगें.

मोदी जी से निवेदन है अब इन जैसे ख़बीस जिन्नों से निजात पाने के लिए किसी वली कामिल के दरबार में ना सिर्फ हाज़री दें बल्कि एक अल्लाह और उसके पैगम्बर मोहम्मद सल्लम के ऊपर ईमान ले आएं.  और एलानिया इस बात को तस्लीम करें की वो इस्लाम की पनाह में आ चुके हैं. हो सकता है ऐसा करने से उनके कुछ हिन्दू फॉलोवर्स (भक्त) कम हो जायेगे, लेकिन जितने कम होंगे उससे ज़्यादा मुस्लिम फॉलोवर्स बढ़ जायेगे.  हो सकता है उनको फिल वक़त कट्टरपंथ के आक्रोश और गुस्से का सामना भी करना पड़े लेकिन अंत में जीत आप ही की होगी अगर आप पूरी ताक़त से सच्चाई के रस्ते पे गामज़न रहे और सख्ती से उसपे चलते रहे.  जब आप सख्ती से अल्लाह और उसके रसूल की पनाह में आ जायेगे तो दुनिया की कोई ताक़त आपको इज़ा नहीं पहुंचा सकती दुनिया का कोई भी खबीस जिन्न आपको डरा नहीं सकता. 

इस पत्रकार को अपने एक कटाक्ष लेख की वजह से अगस्त २०१५ में हाई लेवल जांच एजेंसीज के सामने हाज़िर होना पड़ा था. लंगूरों ने क्या क्या बदगुमानी नहीं फैलाई. 

१.     जुबेर की पुलिस स्टेशन में जम के पिटाई हो रही है
२.     जुबेर जांच एजेंसी से पनाह मांग रहा है
३.     जुबेर अपने खुदा को याद कर रहा है
४.     जुबेर को नंगा कर के पीटा जा रहा है.

ये पत्रकार लंगूरों को चूनौती देता है, एक भी विडिओ जुबेर की पिटाई का या नंगा कर के उसके साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर का दिखा दें तो जुबेर उस लंगूर का गुलाम हो जाएगा.  दूसरी बात जिन जिन लंगूरों ने ऐसी अफवाह और झूट फैलाया था उन सभी से एक अनुरोध और है उच्च लेवल जांच अधिकारी श्रीमान घोष की रिपोर्ट पड़ें, उसमे उसने इस पत्रकार के बारे में क्या लिखा है और जुबेर से पूछ ताछ करते वक़्त क्या कैफियत थी उस अधिकारी घोष की.  उस हवलदार की क्या कैफियत और हालात हुई थी जो इस पत्रकार की सुरक्षा में रात के समय मौजूद था.  आखिर में वसंत विहार पुलिस स्टेशन के थाना इंचार्ज सबसे बड़ी पोस्ट वाले अफसर की क्या कैफियत थी, जब जुबेर उनके ऑफिस में मौजूद था और उन्होंने क्या पाया क्या देखा.  

कट्टरपंथिओं ने मिठाई बांटी थी और जश्न बनाया था और कट्टरपंथी सभी का ये मानना था अब जुबेर गया २० सालों के लिए जेल में. अब नहीं आता जल्दी.  फिर ये बुज़ुर्गाने दीन और जुबेर के मुर्शिद का करम ही था जो सिर्फ १ दिन के अंदर जुबेर बहार आ गाया.  ना कोई रिमांड, ना कोई मार पीट, ना कोई चार्ज शीट, ना कोई ऑफ.आई.आर. और ना कोई थर्ड डिग्री और इज़्ज़त, शोहरत पहले से डबल हो गई. जो लोग जुबेर को नहीं जानते थे वो भी उस हादसे के बाद जानने लगे.   

जिस तरह से जुबेर और उसके जैसे हज़ारों मुस्लिम नौजवानों की मुराद पूरी हुई जो ना इंसाफ़ी का शिकार हो कर मायूसी और गुमनामी के अंधेरो में जीने को मजबूर हो चुके थे फिर अध्यात्म और सच्चाई के उजाले की जानिब गामज़न होते ही तमाम परेशानियां, मायूसी, जिन्नों का डराना खत्म हो गया.  तो मोदी जी को भी ये पत्रकार दावत देता है के सच्चाई के रस्ते पे आ जाएँ और एक अल्लाह की हम्दो सना करें और पैगम्बर मोहम्मद सल्लम को नबी आखिरजम्मा तस्लीम करें. फिर देखें जो जिन्न और इंसा उनको डरा रहे है वो खुद आपसे डर के दूर भागना शुरू कर देंगे.  लेकिन शर्त वही है उसमे पाखंड नाम की चीज़ ना होना चाहिए सच्चाई और परेज़गारी फिर आप अल एलानिया ये तस्लीम करिये की आप इस्लाम की पनाह में आ चुके हैं. 

कुल मिला के ट्रिपल तलाक़ मुद्दे को प्रतिष्ठा का सवाल बना के सरकार खुद ही घिर गई. जिसकी वजह से मोदी, बीजेपी की साख पहले से और ज़्यादा ख़राब हो गई है.  ये सरकार किसी काम की नहीं है. इसमें इतना भी पावर नहीं है के अपने मन मर्ज़ी के बिल पास करवा ले. फिर जब बीजपी के पास राज्य सभा में बहुमत नहीं था तो उतना उछल कूद नहीं करना चाहिए था.

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