नाज़रीन
ये सहाफी भारीतय अवाम का पाकिस्तान की निस्बत से जो आम तस्सवुर है के वहां अकलियतों
के हुकूक की हक़ तलफी की जाती है. पाकिस्तान
एक ऐसा मुल्क है जो ना इंसाफ़ी, दहशतगर्दी, मस्तूरात के हुकूक की हकतलफी, बॉर्डर पे
भारतीय आर्मी जवानो की मौत का ज़िम्मेदार है उस गलत बयानी से पर्दा उठा कर उसको बरहना
करेगा, और हकीकत से आप तमामी हज़रात को रूबरू करेगा. इस तरह की गलतबयानी, झूट आम तोर पे संघी आतंकिओं
की जमात, तशद्दुत पसंद हिन्दू अवाम और बीजपी के सियासतदानों की जानिब से फैलाई जाती
है. इन लोगो की जानिब से ऐसी गलतबयानी फैला
के ये लोग अपने गुनाहों और बदकारिओं पे पर्दा डाले रखते है. असल में भारत में अकलियतों के साथ जिसमे ख़ास कर
के शामिल है मुस्लिम और क्रिस्टी जब्र किया जाता है, तशद्दुत की जाती है. उनको अज़ीयत पहुंचाई जाती है, हलाक किया जाता है,
वो ना इंसाफ़ी का शिकार होते हैं.
ये
सहाफी पहले भी अपने कई मज़मूनों में भारत और पाकिस्तान के मुक़ाबले में इस बात को मन्ज़रे
आम कर चूका है की कई सूरत से पाकिस्तान भारत से बेहतर और बोहोत बेहतर है. जहाँ भारत में अकलियतों (मुस्लिम और क्रिस्टी) समाज
को अपने मज़हबी एतिक़ाद पे चलने और उसकी मश्क करने की इजाजात नहीं है वहीँ पाकिस्तान
में हिन्दू अपने मज़हबी एतेक़ाद के हिसाब से आज़ादाना तरीके से अपने मज़हब की मश्क और मुशाहिदा
कर सकते हैं.
हाल
ही में उत्तर प्रदेश के बुलुंद शहर में तीन मुस्लिम नौ जवानो को नेशनल सेफ्टी एक्ट
(NSA) के तहत एक गाय के क़त्ल के झूठे इलज़ाम में ग्रिफ्तार किया गया. इस बेरहम एक्ट के तहत गिरफ्तार किये हुए मुजरिम
ज़मानत के लिए अर्ज़ी नहीं कर सकते हैं और ना ही उनके लिए किसी भी तरह की कानूनी सलाह
मशोरे की इजाज़त होती है, ना ही कोई कानूनी
तरीकेकार हिकमते अमली उनके लिए फ़राहम हो सकती है. इस कानून के तहत गिरफ्तार किया हुआ मुजरिम अपने
रिश्तेदारों से ना तो मिल सकता है और ना ही उसको हक़ है की किसी भी दफा पे अला ओहदेदारों
से सवाल जवाब तालाब कर सकता है.
अभी
तक उत्तर परदेश में नियोगी वज़ीरे अला के काबिज़ होने के बाद कुछ १६० मुस्लिम नौजवानो
को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया जा चूका है और वो जेलों में सड़ रहे हैं. जिसमे शामिल है २६ जनवरी को हुए कासगंज के दहशतगर्दाना
हमले के मज़लूमीन. इस दहशतगर्दाना हमले में
मुस्लिम अवाम ने बड़े पैमाने पे अपनों को खोया उनकी तिजारत और कारोबार को हिन्दू दहशतगर्दों
ने आतिशे नार किया, लेकिन जब इस कठोर कानून के तहत गिरफ्तारी की गई तो वो थे मुसलमान. जबकि हिन्दू दहशतगर्द जो कासगंज के २६ जनवरी और
बुलुंद शहर के दहशतगर्द हमलो में शामिल थे जिसमे एक पुलिस अफसर और एक शहरी की हलाकत
हुई थी उनकी गिरफ्तारी IPC की सादे दफाओं में की गई. पुलिस ने नियोगी वज़ीरे आला के हुकुम बरदाई करते
हुए केस को मज़ीद नर्म बना दिया ताके शक की गुंजाइश दहशतगर्दों की जानिब चली जाए और
वो जेल से जल्द बरी हो जाए.
ये
ही वजह है की ये सहाफी पाकिस्तान से मोहब्बत करता है और पाकिस्तान से मोहबत के एहसास,
तसव्वुर और भारत से नफरत का खुल के इज़हार करता है. पाकिस्तान से मोहब्बत का पैमाना इस सहाफी का उसकी
इस्लामिक जमुहरियात का होना और भारत से नफरत हिन्दू अक्सरियत का होना हरगिज़ नहीं है. बल्कि ये मोहबत है उस मुल्क के लिए जहाँ इन्साफ
पसंदी है, अकलियतों के हुकूक हैं, मस्तूरात के लिए इज़्ज़त और अवाम के सभी हिस्सों के
लिए बिला तफ़रीक़ कौम और मिल्लत बराबरी के मौके फ़राहम हैं. और ये नफरत है उस मुल्क के लिए जो अब दहशतगर्दों
(राम राज्य) के असवाल के तहत आ चूका है. जो
अब मुलव्विस है इन्साफ के क़त्ल में, हिन्दू अवाम की रहनुमाई में, मस्तूरात की हक़ तलफी,
अकलियतों की हक़ तलफी, हिन्दू दहशतगर्दों ने जीने का हक़ छीन लिया है.
अगरचे
पकिस्तान ने इस्लामिक जमुहीरियत के तहत अपना दर्जा बदला और उसको अपनाया लेकिन फिर भी
वहाँ इंसानी हुकूक बिला तफरीक कौम और मिल्लत तहफ़्फ़ुज़ किया जाता है, सभी को इन्साफ फ़राहम
किया जाता है. जबकि भारत एक दुनयावी जमुहीरियत
है, लेकिन वहां हर इंसानी हुकूक की हक़ तलफी होती है. अकलियतों के साथ उनके मज़हबी एतेक़ाद की वजह से ना
इंसाफ़ी होती है तो ऐसी चीज़े दुनयावी जमुहरियात जैसे अलफ़ाज़ पे काला धब्बा हैं.
भारत में मुसलमानो के साथ इस
सभी ज्यात्तिओं, नाइंसाफ़ी, जब्र का जायज़ा लेते हुए ये सहाफी २६ जनवरी योमे जमुहरिया
के पूरे रोज़ व्हाट्सअप पे अपनी डी.पी या तो काली रखेगा या नहीं रखेगा. ऐसा कर के वो भारत हुकूमत के खिलाफ गुस्से और एहतेजाज
का इज़हार करेगा और दिखाना चाहेगा.
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