जहाँ
भारत अपने अज़ीम रहनुमा और क़ायद महात्मा गाँधी के ७१वे क़त्ल दिन के मौके पे दुःख और
गम में डूबा हुआ था वही, गुजरात के बाद वतन अज़ीज़ के दूसरे सबसे बड़े और भयानक तरीके
से हिन्दू दहशतगर्दों की पनाह गाहा बनने वाले सूबे उत्तर प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने
आया जिसकी वजह से अवाम के अंदर गुस्सा और तशवीश है. ३० जनवरी को योमे क़त्ल के रोज़ अलीगढ़ में दहशतगर्द
तंज़ीम हिन्दू महासभा की क़ौमी सेक्रेटरी पूजा शकुन पण्डे और उनके कुछ १२ से १५ रकून
महात्मा के मुजसमे पे गोलिया बरसा के दहशतगर्द नाथू राम की मुवाफ़ेक़त में नारे लागते
हुए देखे गए. बाद में मुजसमे पे पेट्रोल डाल के उसको आतिशे नार कर दिया गया. वीडियो देखिये.
गुजरात
के बाद उत्तर प्रदेश हिन्दू दहशतगर्दाना हमलो और अमलियात के लिए मशहूर होने लगा है. इसकी वजह भी साफ़ है जब सूबे का वज़ीर ही मुत्तासिब
और दहशतगर्द ज़ेहनियत का होगा तो उसके असरात अवाम पे नुमाया होंगें. जिस तरह से एक इत्र फरोश की दूकान के पास से और
एक गटर या गंदगी के पास से गुजरने पे एक नाबीना इंसान को भी इस इस बात का इल्म हो जाता
है की वो इत्र फरोश की दूकान के पास से या गटर के पास गुज़र रहा है, अब ये ज़रूरी नहीं
की वो इत्र लगाए या उसकी नुमाइश करे बल्कि इत्र की खुशबू और गटर से निकलती हुई बदबू
इस बात का एहसास दिलाने के लिए काफी है, उसी तरह गुजरात फिर उत्तर प्रदेश इस बात की
तस्दीक करने के लिए काफी है के वहां अब हिन्दू दहशतगर्दी नुमा गटर खुल गया है जिसकी
बदबू फ़िज़ाओं को मज़ीद गन्दा और बदबू दार कर रही है.
नियोगी
वज़ीर की हुकुम बजाई करते हुए पुलिस बेगुनाह मुसलमानों, दलितों को उनके मज़हब और ज़ात
की बुनयाद पे एनकाउंटर पे शहीद कर देती है, मुसलमानों को नेशनल सेफ्टी एक्ट के तहत
गिरफ्तार किया जाता है लेकिन क्या सूबे के वज़ीर इन असली दहशतगर्दों को नेशनल सेफ्टी
एक्ट के तहत गिरफ्तार करने की कुव्वत रखतें हैं.
उत्तर प्रदेश में नियोगी के वज़ीर बनने के बाद हर उस मौके पे ख़ित्ते की हालत
तशवीशनाक और खतरनाक हो जाती है जब कभी भी वज़ीरे अज़ाम मोदी या हुकूमते हिन्द का कोई
भी बड़ा ओहदेदार सूबे में मौजूद होता है. योगी के वज़ीरे आला मुंतखिब होने के बाद कुछ
३ या ४ बार ऐसी सुरते हाल वज़ीर आला के सामने दर पेश आई. बिल आखिर हस्बे आदत योगी सूबे की उस सुरते हाल के
लिए अपने मुख़ालफ़ीनों के ऊपर तोहमत लगाते हुए
नज़र आये. चाहे वो २६ जनवरी योमे जमुहरिया पे
होने वाला दहशतगर्द हमला हो या बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी हो या अलीगार्ड में बढ़ते हुए
तनाज़े हों बुलंद शहर दहशतगर्द हमला उन सभी पे योगी मुख़लिफ़ीनों के ऊपर नज़र रखतें हैं
और अपनों के खंजर को नज़र अंदाज़ कर देतें हैं.
असल में जो भी सूबे की बिगड़ती हुई अमन और अमान की सुरते हाल है उसमे सिर्फ और
सिर्फ हिन्दू दहशतगर्द ही ज़िम्मेदार हैं. और ये वही लोग हैं जो अपने ही वतन की जड़ों
को मज़ीद कमज़ोर करने में लगे हुए हैं. अगर उनकी कारगरदेगी हुकूमत हासिल करना थी तो वो
उनको मिल गई है. आज भारत के कमों बेश २० से ज़ाइद सूबों में ज़ाफ़रानी हुकूमत है और मरकज़
ज़ाफ़रानी महाज़ के ज़ेरे हुकूमत काम कर रहा है, अब उनको और क्या चाहिए, अगर फिर भी अगर
ये लोग दहशतगर्दाना मामलों में मुल्लावीस पाए जाते है मतलब साफ़ है ये मुल्क की एक और
तक़सीम चाहते हैं.
गाय
के नाम पे भी हिन्दू दहशतगर्दों का दोहरा किरदार अवाम के सामने आ गया के उस चौपाये
के नाम पे जिस तरह से मुस्लिम नौजवानों का क़त्ल और ख़ूंरेज़ किया था असल मक़सद कुछ और
था ना की गाय की हमदर्दी. अगर गाये की हमदर्दी
होती तो इस तरह से एक गाय को मार डालने वाले ड्राइवर की पहले हलाकत होती देखिये.
कुल
मिला के मामले का लब्बो लुबाब ये निकल के आता है की अगर भारत बेन अक़वामी सतह पर एक
अमन पसंद और जमुहरियाती मुल्क की हैसियत से अपनी साख खो रहा है और दहशतगर्दाना मलियात में आगे की जानिब तेज़ी से गामज़न है तो उसके लिए ज़ाफ़रानी महाज़ की मरकज़ में काम करने
वाली मोदी हुकूमत और मुख्तलिफ सूबों में ज़ाफ़रानी वज़ीरों का हिन्दू देशतगर्दों पे कारवाही
ना करने के सबब और हुकुम शाही वाली जमुहरियति ज़ेहनियत की वजह से खो रहा है.
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