साल २०१९ बीजेपी के लिए रूसवाई और ज़लालत ले कर आया है. सबसे पहले
ट्रिपल तलाक़ बिल पे जो सरकार के लिए इज़्ज़त का सबब बन गया था ज़लालत और रूसवाई का सामना
करना पड़ा और वो बिल राज्य सभा से पास ना हो पाया. सही देखा जाए तो ये साहाफी
का चक्रविहू था जिसमे बीजेपी फस गई. इससे पहले इस सहाफी के पोलिटिकल पंडित
के राजनैतिक चक्रविहू संरचना में लंगूर भी फस चुके है और ना ही लंगूर, ना ही बीजेपी
इस संरचना को समझ पाए और तोड़ने में कामयाब हुए अन्तः उनकी मौत हुई. सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद उसको नहीं मानने और सुप्रीम कोर्ट कौन होता है हमारे मज़हबी एतेक़ाद पे हुकुम चलाने वाला जैसे इश्तेआल भरे लेख भी इस पत्रकार के पोलिटिकल पंडित की एक चाल थी, जिसमे फस गई बीजेपी और समूची ताक़त झोंक के लगी ट्रिपल तलाक़ को फौजदारी गुन्हा के बनाने के पीछे. इतना ही नहीं बीजेपी, लंगूर और मुनाफ़िक़ लगे समाज को भटकाने; एक कट्टरपंथी का साथ दे रहे हो. उनको ये गुमान ना जाने कहाँ से हो गया था की ये पत्रकार कट्टरपंथी है, फिर वही हुआ जो होना था. लखनऊ के उस मुनाफ़िक़ को खुद शिया सामाज से ज़ात बाहर किया हुआ है, मतलब अब वो मुसलमान है ही नहीं और जो मुसलमान ही नहीं उसका किसी भी मुस्लिम मसले पे बोलना और ना बोलना बे मानी और फ़िज़ूल है.
पाकिस्तान चुनाव से कुछ १ साल पहले भी इस पत्रकार ने हाफिज सईद नामक चक्रविहू
की रचना की थी और उनके नाम को अपने लेखों तथा तबसरों में पाकिस्तान का प्रधान मंत्री
पद का दावेदार घोषित करना शुरू कर दिया. फिर क्या था समूचे लंगूरों का ध्यान
एक ही तरफ केंद्रित हो गया. बाकी काम पूरा किया भारत सरकार के राजदूत और
लंगूरों ने जिन्होंने पाक मीडिया द्वारा हाफिज के खिलाफ मोहीम चला डाली. फिर
हुआ वही जो ये पत्रकार सोचता और चाहता था. इस पत्रकार की रणनीति कामयाब हुई और अब ना
तो हाफिज साहब दोषी हैं, ना ही पाक जनता और ना ही पाकिस्तान प्रशासन जिसको आतंकवाद
का हामी बोल के भारतीय जनता और प्रशासन बदनाम करता था. रहा सहा पाकिस्तान
के ऊपर से आतंकी देश का तमगा भी हट गया अमेरिका से वारे न्यारे हुए वो अलग. राजनीति
की बिसात पे बीजेपी चाहे लाख शतरंज की माहिर चाल चले लेकिन बाज़ी वही जीतता है जो चेक
और मेट देने में सक्षम होता है.
२०१९ में मोदी सरकार के लिए डगर कठीण है पनघट की. क्योंकि मोदी
जी इन किसी भी मामलो में जनता की इच्छा के अनुरूप खरे नहीं उतरे.
राष्ट्र से जुड़े हुए मुद्दे:
आतकवाद पे लगाम कसने में
नाकाम: मोदी ने सत्ता में आने के पहले अपनी तमाम चुनावी सभाओ में बड़े बड़े वादे किये
थे. सत्ता में आने के बाद नोट बंदी की, ताके
आतंकवाद पे लगाम लगाईं जा सके. लेकिन नोट बंदी
के बाद भी हिन्दुस्तान के कई हिस्सों में नए हिन्दू आतंकी प्रशिक्षण केंद खोले गए और
मोदी सरकार हिन्दू आतंकवाद पे ज़र्रा बराबर लगाम कसने में नाकाम साबित हुई.
कश्मीर समस्या: कश्मीर जो बरसों से शांत था मोदी सरकार के आते है
अशांत हो गया, और हर साल कश्मीरी नागरिकों की मौत का अकड़ा बढ़ता चला
गया. बॉर्डर पे भी पाकिस्तान के साथ हालात
पहले से और पेचीदा हो गए. फिर कश्मीर में १९४७
के बाद बीजेपी ने इतिहास रच डाला और पहली बार मुस्लिम बहुल प्रदेश में सरकार बनाने
का रिकॉर्ड कायम किया. लेकिन ३ सालों के अंदर
ही मोदी जी को समझ में आ गया की समस्या जटिल है और गाँधी जी का बन्दर बन गए फिर फरारी. कुल मिला के कश्मिरिओं के ज़ख्मो में मोदी सरकार
मरहम लगाने में नाकाम साबित हुई.
विदेश निति: चुनावी सभाओं में मोदी
सरकार बड़ी बड़ी बातें करती थी, दाऊद इब्राहीम, शकील को लाने की कस्मे खाई थी. हाफिज
सईद को सजा दिलवाने का अज़्म किया था. क्या
हुआ दाऊद, शकील तो दूर पाक ने भारत के एक आतंकी को लटका दिया. हाफिज बाइज़्ज़त बरी हुए और भारत का नाम बदनाम हुआ
सो अलग.
क्या बकवास खबरे चला रहे हो लंगूरों तुम
ओर तुम्हारे मीडिया हाउस बर्बाद हो जायेगे. सभी लंगूर जो सरकार किसी की भी हो
भबूती बजाते है वो बर्बाद हो जायेगे. उनकी ख़बरें रोड की ज़ीनत बन के सिर्फ ओर
सिर्फ ज़ूबानी जमा खर्च तक सीमित रेह जायगी. पीछ्ले हफ्ते छोटा शकील के भतीजे अबू
धाबी में गिरफ्तार हुए. फिर शुरू हुआ हिटलर के कुत्तों के भोकने का सिला सिला. अब
शकील हमारे पैरों में झुकेगा, अब हम शकील को जहन्नम (भारत) बुलवाएंगे अब दाऊद का खेल
ख़त्म जल्द आएगा सलाखों के पीछे. क्या हुआ गिरफ्तारी के तीन दिन के अंदर ही आदरणीय
शकील साहब के कारकून अबू धाबी कोर्ट से उनके भतीजे को भारत (जहन्नुम) को खबर हुए
बिना ही जन्नत पाक सरज़मीन लिए गए. जैसे आदरणीय शकील साहब के भतीजे का कुछ नहीं हुआ
वैसे ही कुछ बाल भी बांका नहीं होगा पाक का; हमारी दुआए हैं पाक को और भारत के लिए
दिल से बद्दुआ है. इसलिए नहीं क्योंकि उसका हाकिम एक हिन्दू है बल्कि उसका हाकिम
एक ना इंसाफ़ा हिटलर मानसिकता का अहंकारी बंदा है. जो मुस्लिम समाज को सिर्फ इसलिए
प्रताड़ित, नाइंसाफी और भेदभाव करता है क्योंकि वो इस्लाम को मानते है.
हिन्दू समाज से सम्भंदित मुद्दे
१. राम मंदिर: राम मंदिर पे बीजपी का दोहरा चरित्र सामने आ गया की
बीजेपी के लिए ये बस चुनावी मुद्दा है ना की हिन्दू आस्था का मुद्दा. अगर राम मंदिर
उच्चतम न्यायलय के आदेश के अनुरूप ही हल होना था तो २०१४ के पहले अपने घोषणा पत्र में
उसको शामिल नहीं करना था.
२. गौ हत्या: ये मुद्दा भी भीजेपी के लिए सिर्फ और सिर्फ चुनावी मुद्दा
ही है. क्योंकि अगर असली हिन्दू आस्था होती तो गोवा, नार्थ ईस्ट में भी
गौ वध बंदी लागू होती. फिर अगर हिन्दू आस्था का इतना ख्याल होता तो भारत २०१४ के बाद
बीफ एक्सपोर्ट में ब्राज़ील को पीछे नहीं छोड़ देता.
मुस्लिम समाज से जुड़े हुए मुद्दे.
१.
मोदी ने २०१४ से पहले भावनात्मक भाषण दिया में मुस्लिम समाज के एक हाथ में क़ुरान
दुसरे में कंप्यूटर देखना चाहता हूँ. फिर इस फलसफे को काहे को आगे नहीं बढ़ाया. बल्कि
उनका अल्पसंख्यक मंत्रालय मुस्लिम समाज को दी जाने वाली राशि ही कम कर डालता है तो
क्या ख़ाक मुस्लिम समाज का भला होगा.
२. हज सब्सिडी: मुस्लिम समाज के लिए दी
जाने वाली हज सुविधा खतम कर दी गई और उस फण्ड को मुस्लिम समाज के बच्चो की शिक्षा योजना
में लगाने की मोहीम थी. फिर क्या हुआ. मुस्लिम हलकों में कितने स्कूल खोले
गए.
३. मदरसों का आधुनिकरण की योजना: मदरसों
के आधुनिकरण की योजना पे मोदी सरकार अमल कर रही थी. और उनमे अति आधुनिक साइंस लेब,
कंप्यूटर लेब, तथा शौचालय प्रदान करने की योजना थी. कितने मदरसों का इस योजना के तहत
आधुनिकरण हुआ. इस विषय पे इस पत्रकार ने ट्वीट
किया है.
क्या बकवास खबर है, बीजेपी भी चली कांग्रेस
की राह पे. सिर्फ और सिर्फ अपनी फजीती और अपमान का रुख दूसरी तरफ मोड़ने की एक ओछी हरकत.
अब ये खबर सुर्खिया लेगी और चुनाव तक ज़िंदा रहेगी फिर उसके बाद ना तो वो मदरसे के गिरफ्तार
किये हुए तालिब कही खबरों में रहेंगे और ना ही वो मदरसा. इस पत्रकार को जब दिल्ली में
उच्च स्तरीय जांच एजेंसीज के सामने हाज़िर होगा पड़ा था उसके बाद नई बम्बई आने के बाद
फेक नाम के साथ ऐसी हज़ारों खबरे इस पत्रकार की निस्बस्त से छापी गई थी. मीडिया कर्मिओं
को इस पत्रकार के सामने निर्देश दिए जाते थी और नाम झूठा बोला जाता था जबकि वो खबर
इस पत्रकार से सम्भंदित होती थी. अगस्त २०१५ में अपने आपको ऐसी हालात में डालने के
पीछे की मानसिकता भी इस पत्रकार की सच्ची बात और उसके शोध की एक कड़ी थी. जिसने लंगूरों
का दोहरा चरित्र और प्रशासनिक अमले का काम काज और पुलिस की तफ्तीश को बोहोत करीब से
देखने और अनुभव करने का मौका मिला.
४. ट्रिपल तलाक़: ये मुद्दा भी मोदी की सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम समाज
और महिला वर्ग को बर्बाद करने की एक कपटी साजिश है. जैसा की ऊपर कहा जा
चूका है इसमें सिर्फ विवाह सम्बंदित जुर्म काहे को लिए गए. ३ साल के प्रावधान
में वो सारे जुर्म शामिल करना था जो एक आम मुस्लिम महिला अपनी रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी
में भोगती है. इस विषय पे इस पत्रकार ने ट्वीट किया है.
बोलो क्या बोलते हो योगी भक्त और बीजपी की महिला सशक्तिकरण की नीति. मोदी जी
हिटलर नीति छोड़ो राजनैतिक फायदा उतना ही लो जितना हज़म कर सको. संसद में हिटलर मानसिकता
के साथ न्याय का खून कर के सदन के गलयारों को खून से लाल कर दिया और ट्रिपल तलाक़ पे
बिल पास तो करवा लिया लेकिन राज्य सभा में मू काला होने वाला है. फिर अगर आपकी महिला
सशक्तिकरण की निति राजनैतिक लाभ लेने के लिए नहीं है तो इस महिला को भी न्याय दीजिये
और सभी पीड़ित महिलाओं के लिए आपकी निति एक सामान होनी चाहिए.
आम जनता की समस्या
आज आम जनता की सबसे बड़ी समस्या है मेह्गाई, पेट्रोल, डीज़ल और रोज़ मर्रा की चीज़ों
में बे तहाशा इज़ाफ़ा. जो ग्रहणी २०१४ के पहले १० से १५ हज़ार में अपना घर
आराम से चला लेती थी अब उसको २५ से ३० हज़ार खर्चा करना पड़ रहे हैं. और हर
दुसरे रोज़ बढ़ती हुई आत्महत्याओं की घटनाओं के पीछे की मानसिक भी आर्थिक तंगी है. पहले
१००० रूपये में गाडी का पेट्रल १ या दो हफ्ता चल जाता था क्योंकि पेट्रोल की कीमत कम
थी अब वही १००० रूपये का पेट्रल सिर्फ १ हफ्ता चलना मुश्किल हो जाता है. जबकि ड्राइव
वही है उतना ही है.
युवाओं की समस्या: मोदी जी ने अपने प्रधान
मंत्री बनने की आशा को देश के युवाओं से शुरू की थी और युवा वर्ग को अपने साथ लिया
था. सबसे पहला दौरा उनका दिल्ली यूनिवर्सिटी में था और उन्होंने युवा वर्ग को सम्भदित
किया था. कान्वा बाबा भी इस विषय में मोदी की चापलूसी करता हुआ टी वि डिबेट
में युवा वर्ग के ऊपर भावनात्मक अत्याचार करता हुआ देखा गया था. अब हाथ ऊपर उठा रहा
है. फिर ५ सालों में कितना युवा वर्ग का फायदा हुआ. इन यूनिवर्सिटी
में छात्रों की ऊपर मोदी रुपी अत्याचार हुए
१. कंन्हैया कुमार, उमर खालिद, गुल मोहर जवाहर लाल यूनिवर्सिटी
२. रोहित वेमुला हैदराबाद यूनिवर्सिटी,
३. बनारस में मोदी के दौरे पर बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में छात्राओं के ऊपर
पुलिसिया तशद्दुत
४. जमीलया मिलिया इस्लामिया यूनिवसिटी बवाल
५. अलीगढ़ मुस्लिम युनिवेर्सिटी बवाल
६. जम्मू तथा श्रीनगर छात्राओं और छात्रों का आर्मी रुपी आतंक के खिलाफ
बवाल.
किसान समस्या: मोदी जी अपने भाषणों में किसान समस्या
से निबटने के बड़े बड़े वादे करते हुए देखे जाते थे. लेकिन जिन प्रदेश में अभी हाल ही
में बीजेपी नामक गुलामी से जनता को आज़ादी मिली फिर नई सरकार ने आते ही अपने वादों पे
अमल किया. तो शुरू कर दी बीजेपी ने भी गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरयाणा में
कर्ज माफ़, बिजली का बिल माफ़ करने की कवायत. अब सवाल ये उठता है नक़ल में भी अक़्ल की
ज़रुरत होती है. एक काम जो १५ और २० सालों से आपने नहीं किया और नई सरकार के करते ही आप अपने छेत्रों में वही काम करने लगे तो उससे जनता के मन में और गलत सन्देश जाता है.
कुल मिला के मामले का लब्बो लुबाब ये निकल के आता है मोदी सरकार से ना तो देश
सुरक्षित है ना हिन्दू ना मुस्लिम और ना ही आम जनता. एक बात साफ़ है २०१९ में फिर से मोदी सरकार का आना मुश्किल है. बिल फ़र्ज़ बीजेपी २०१९ में फिर से आती है और उसकी घर वापसी होती है, तो भी इस पत्रकार के हाथ में लड्डू है और नहीं आने पे भी लड्डू हैं या जिसको कहते है हेड भी मेरा और टेल भी मेरा. जीत की उन दोनों परिस्तिथि में भी इस पत्रकार की जीत
होगी. वो किस तरह से जीत के ऊपर सही समय आने
पे ये पत्रकार अपने पत्ते खोलेगा, के किस तरह से बीजेपी की इस जीत या हार में भी हमारी
जीत है.
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