अज़ीज़ नाज़रीन,
कल बरोज़ जुमा बा तारीख़ ८ मार्च २०२४ को एक खाकी आतंकवादी मनोज तोमर एक ज़हरीला ठाकुर उसने सजदे में गए नमाज़ियों को लातों से मारा थप्पड़ मारे इस ज़हरीले नाग को महज़ लीपा पोती करते हुए सिर्फ मुअत्तिल किया उम्र भर के लिए नौकरी से नहीं निकाला है।
नमाज़ियों पर इस ख़ाकी आतंकी हमले की रिपोर्टिंग कल ५ बजे इस सहाफ़ी ने की थी। अब उस पुलिसिया हमले का ऑपरेशन करते हैं। आज जो हिन्दस्तानी हिन्दू मालदीव के ऊपर आसमान तक उछल रहें हैं और टपा टप ज़मीन पर गिर रहें हैं ऐसा ही कुछ भारत के ज़हरीले कीड़े भारतीय आतंकी फोर्स के जवान इस्लामिक जज़ीरे मालदीव में भी करते होंगे तभी तो उन तमाम दहशतगर्दों की ग़लीज़ ज़हरीली गटर की पैदाइश की हकाल पट्टी पाक सरज़मीन से की गई।
मीडिया के लंगूर इंद्रलोक इलाक़े में पहुंच कर माइक मुँह में घुसा कर मुस्लिम अवाम को ही इस मुद्दे पर कटघरे में खड़ा कर रहें हैं। एक होता है आज़ाद सहाफ़ी जिसकी रिपोर्टिंग में साफ़ गोई दिखती है एक होता है ज़हरीली सोच का हामी ग़ुलाम सहाफ़ी (लंगूर) उसकी रिपोर्टिंग में साफ़ संघी आतंकवाद को ख़ाकी ज़ुल्म, बर्बरियत को हुकूमत को बचाना मक़सद होता है।
आज
जो लंगूर मुस्लिम अवाम से मुबाहसा कर रहें हैं जवाब देने वालों में कुछ बाहरी लोग भी
शामिल हो गए हैं। मतलब वोह मुस्लिम नहीं हैं
बल्कि वोह संघ और हिन्दू आतंकवादी हैं सादे कपड़ों में पुलिस के कारिंदे हैं। भले ही वोह अपना नाम मुस्लिम बताएं लेकिन उनके चेहरे
से ज़हर और मुस्लिम अवाम के लिए नफरत को पड़ सकता हूँ। ऐसे तमाम गद्दारों का इलाज जल्द होगा जो बोलतें
हैं पुलिस की कारवाही सही थी।
इन
सादे कपड़े वाले संघी आतंकवादिओं ने जितना ग़दर मचाया है पूरी दुनियां उससे परेशान है। तभी तो मालदीव के मुहम्मद माइज़्ज़ु ने सादे कपड़ों
में भी भारतीय सेना के जवानों को उसके वतन में रहने की इजाज़त नहीं दी। यही गद्दारी करते हैं हिन्दू दहशतगर्द सादे कपड़ों
में दुसरे मज़हब के इंसान का नाम ले कर हुकूमत, मोदी, बीजेपी को बचाने की हिकमत करतें
हैं। बाहरी लोग भी आ गए थे और उन्होंने बवाल
मचाया। उस लंगूर और उस संघी आतंकवादी से बदला
लाज़िम हैं जो सजदे में गए मुस्लिम अवाम को लातों से मारने वाले पुलिस वाले को बचा रहा
है और इलज़ाम मुस्लिम अवाम पर लगा रहा है की कुछ बाहरी तत्व आ गए थे उन्होंने बवाल मचाया। अब बीजेपी बोलेगी दिल्ली में रोहिंगिया आ गए बांग्लादेशी
आ गए।
फ़िर जो जुम्मन असदुद्दीन ओवेसी को कोसते रहते है वोट कटेगा, उनकी वजह से बीजेपी आ जाएगी बीजीपी को फ़ायदा पहुचायेगा उन तमाम जुम्मनों से पूछता हूँ मजलिस ही इस मुद्दे पर किफ़ालत के लिए आई और बयान जारी किया तुम्हारे भैय्या ने काहे को अभी तक मसले की मज़म्मत नहीं की। कहाँ है मोहब्बत की दूकान काहे को इस मसले पर मोहब्बत का पैगाम देने वाले यूवराज का कोई बयान नहीं आया।
मुसलमानों याद रखो यह जुम्मन तो सियासी ग़ुलाम बन कर गले में पट्टा डाल कर नामनिहाद सेकुलरों के घरों की रखवाली भी करेंगे उनको ना ही मुसलमानों से मतलब है और ना ही उनकी अज़मत से मतलब।लेकिन आम मुसलमान के हालात इससे भी बत्तर होंगें अगर उनके हक़ की आवाज़ उठाने वाला एवान में नहीं होगा।
फ़िर जो तंज़ीम तुम्हारी आवाज़ एवान में बुलंद करती है तुम्हारे हक़ के लिए जंग करती है उस ही को वोट देना। चाहे कितना भी यह नाम निहाद आसमान तक उचक जाएँ चाहे कितना ही मजलिस पर इलज़ाम लगाए वोट काटेगी बीजेपी को फायदा पहुचायेगी फ़िरक़ापरस्त है लेकिन एक मुश्त वोट सिर्फ और सिर्फ अपनी जमात को ही देना।
मजलिस
फ़िरक़ा परास्त नहीं है हक़ की बात करने वाली तंज़ीम है इन्साफ, क़ानून दस्तूर के हिसाब
से देश को चलाने वाली तंज़ीम है। फ़िरक़ापरस्त
तो बीजेपी है, जो अक्सरियत अवाम के ज़ेहन को ज़हरीला बना कर अपनी सियासी रोटी सेंकती है।
आज दुबाई, ओमान, बहरैन, पाकिस्तान, बंगलादेश में मंदिरें हैं सभी हिन्दू बोहोत फखर से बोलतें हैं हमें पाकिस्तान, बंगलादेश या किसी भी इस्लामिक मुल्क में कोई दिक्कत नहीं है। हम हमारे मज़हब की मश्क़ पूरी आज़ादी से कर सकतें हैं। तो मुसलमानों को हिंदुस्तान में मज़हब की बुनयाद पर काहे को परेशान किया जाता है। जो भी क़ानून बनाया जाएगा वोह फ़िरक़ापरस्त इस्लाम और मुसलमानों को टारगेट कर के बनाया जाता है।
जो लंगूर दिल्ली में मुस्लिम नमाज़ियों पर सजदे की हालात में ख़ाकी दहशतगर्द हमले पर डरे धमके कम तालीमी आफ़ता मुस्लिम अवाम से बात कर रहें हैं में उनको चुनौती देता हूँ मुझसे आ कर बात करें फ़िर देखो उनको और उनकी हुकूमत को नंगा कर के नहीं भगाया तो मेरा नाम नहीं।
इस मुबाहिसे में अगर पाकिस्तान की तरफदारी करना पड़ेगी और भारत को ज़लील करना पडेगा तो करूँगा। जो की हक़ है। आज पाकिस्तान में हिन्दू जितनी आज़ादी से रह रहें हैं शायद वोह उनके खुद के हिन्दू राष्ट्र में भी मेहफ़ूज़ नहीं होंगे। हर दम उनके ऊपर एक ज़ाफ़रानी तलवार लटका दी जाती है हिन्दू धर्म खतरे में है, हिन्दू अक़लियत हो जायेगें, मुस्लिम ग़ालिब हो जायेगें, मुसलमानों के बच्चे बढ़ जायेगें।
पाकिस्तान एक ऐसा वाहिद देश है पूरी दुनियां में जिसमे हिन्दू सिख और क्रिस्टी सभी आज़ादी से रहतें हैं। असली गंगा जमुना तहज़ीब तो पाकिस्तान में देखने को मिलती है। हाल ही में एक सिख भाई को वज़ीर बनाया गया है। हिंदुस्तान में कितने मुस्लिम वज़ीर हैं। महाशिवरात्रि पर पाकिस्तान में जा कर हिन्दुओं ने पूजा की लेकिन कहीं से कोई नाज़ेबा वाक़ियात की कोई इत्तेला नहीं है।
दरअसल यह हिन्दू जहाँ रहतें हैं वहीँ ग़दर मचाते हैं जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करतें हैं। मालदीव ने सही नब्ज़ पकड़ी है तो तिलमिला रहें हैं। जब तक यह अक़लियत में हैं चुप हैं जहाँ इनकी अक्सरियत बड़ी की इन्होने उस देश के क़ानूनों के साथ अवाम के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। दूसरी बात यह सब चीज़ें एक साजिश के तहत की जाती हैं। जो संघ की पुरानी फितरत है। अमेरिका, ब्रिटेन और दीगर क्रिस्टी देश इन हिन्दू अवाम की मोदी भक्ति और संघी आतंक से परेशान हैं। हर मुस्लिम और क्रिस्टी देश में साजिश के साथ घुसा दिए गए हैं जो आज इंतेखाब को मुतास्सिर कर रहें हैं। सिर्फ और सिर्फ मोदी भक्ति राम मंदिर के गुण गान और मुस्लिम क्रिस्टी मज़हब के लिए ज़हरीला मुज़ाहेरा।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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