Tuesday, 12 March 2024

मुसलमानों का दुश्मन दहशतगर्द, डॉन, माफ़िया लावारिस मौत मारा गया।

अज़ीज़ नाज़रीन,

भारत के हर ज़ालिम की मौत अपनी आखों से देखेगें मोमीन।  जो बात हर बार बोलता हूँ वोह हो रही है।  जिगर फटने से, ख़ुदकशी से, सड़क हादसों में, कुदरती आफ़ात से, कैंसर या किसी और मूज़ी बीमारी से।

सूबे शुमाल के दारुल ख़िलाफ़त लखनऊ में एक ज़हरीला नाग लावारिस मौत मारा गया।  इन्तेहापसन्द आदित्य मिश्रा ने ख़ुद को गोली मारकर अपनी बदनुमा दहशत की ज़िन्दगी का दी ऐंड कर लिया।   पुलिस को वारदात की जगह से ख़ुदकशी का ख़त मिला है।  जिसमे उसने अपनी ज़िन्दगी में बदसूकूनी, ज़ाती परेशानी का ज़िक्र किया है।  यह है ख़ुदा की लाठी जब ज़ालिम को पड़ती है तो उसकी ज़िन्दगी से सुकून, राहत ग़ायब कर देता है।  फिर उसकी ज़िन्दगी इस दुनियां में है जहन्नुम हो जाती है।  कई ऐसे मामले सामने आगये हैं। 

जबकि इस नाग के पास करोड़ों खरबों की दौलत थी।  इसने महज़ दो तीन सालों में दौलत की अज़ीम सलतनत क़ायम की थी।  ख़बर है की उसने मुस्लिम अवाम की खरबों की ज़मीन, जायदाद, कोठियां योगी की धौंस दिखा कर बीजेपी के रसूख पर कोड़ी के भाव डरा धमका कर ख़रीद ली थी। 

इस भू माफियां और डॉन की दहशत की सल्तनत गोसाईगंज से लेकर गोमती नगर, सुशांत गोल्फ सिटी, पीजीआई, मोहनलालगंज समेत कई इलाकों में आदित्य मिश्रा ने अपनी दहशत और ज़ुल्म का कारोबार को फैला दिया था।   उसने सुशांत गोल्फ सिटी में अपना एक दफ्तर बनाया जो उसके दहशतगर्दाना करीबियों के आने-जाने का भी एक अड्डा था.

बीते साल जुलाई में आदित्य मिश्रा ने गोसाईगंज इलाके में एक हिन्दू मज़हबी महफ़िल मुनअक़िदकी थी, जिसमें बाबरपुर (अयोध्या) से लेकर जगन्नाथपुरी के साधू आये थे जिसमे ८ मुस्लिम जोड़ों को उनके अहल ए ख़ाना के साथ इस मारे गए मिश्रा ने अल ऐलानियाँ हिन्दू बनाया था। 

इस दहशतगर्द के जुर्म की काली करतूत की अगर बात की जाए तो शायद दिन बीत जायेगें।  दो साल क़ब्ल इस नाग ने लूलू मोल में ज़बरदस्ती लंगूर चालीसा का पाठ किया था।  पुलिस ने इस दहशतगर्द और उसके कारकूनों को पकड़ कर जेल में ठूस दिया था।  लेकिन दहशत की दफ़ा ना लगाने के चलते फिर यह बाहर आ गया।    इस मुजरिम मारे गए मिश्रा पर कई पुलिस केस दर्ज हैं जिसमे ५ महज़ गोसाई गंज में दर्ज है। 

इस दहशतगर्द की ख़ुदकशी की ख़बर सुन कर वोह तमाम अवाम ख़ुशी से झूम उठे जिनके ऊपर इस मरदूत ने बेजा ज़ुल्म किये थे।  जिन मुसलमानों को मार ठोंक कर योगी का ख़ौफ़ दिखा कर जबरन हिन्दू बनाया था इसकी मौत और अल्लाह के बदला लेने की हिकमत देख कर अपने रब पर उन अवाम का एतेबार वापिस पुख़्ता हो रहा है।

इस ज़ालिम तरीन जल्लाद की मौत की ख़बर सुन कर छीमा बली बली ख़ुशी से झूम उठीं।  बोली अब मुझे इंसाफ़ मिल गया।  योगी, भाजपा, अदालत से तो में उम्मीद खो चुकी थी लेकिन मुझे ऊपर वाले पर पूरा भरोसा था की इस ज़ालिम को ज़ाफ़रानी हाकिम तो फांसी नहीं देगा लेकिन ऊपर वाला ज़रूर इसका हिसाब करेगा।  उन्होंने इस ख़ुशी में लड्डू बाटे।   

दो दिन क़ब्ल यहूदी दहशत पर हिज़बुल्लाह के मुजाहिदों ने मिसाइलें दाग़ कर ज़बरदस्त हमला किया था जिसमे इजराइल के दहशत को भयानक जान माल का अनुक़सान हुआ था।  उस ख़बर पर मेने कहा था, दहशत के मोसाद का ग़ुब्बारा फटा नहीं रोक पाया यहूद दहशत मुजाहिद हिज़बुल्लाह के ३७ मिसाइल हमले।  अगला ग़ुब्बारा भारत में मोदी, बीजेपी का फटेगा।  भक्त बोहोत चिल्लाते रहते थे मोदी मोदी मोदी।  सोचना भी मत यहाँ मोदी है बोहोत मारेगा।  इन सब बातों का भक्तों को जवाब मिलेगा।  इजराइल में ७० साल से फ़लस्तीनी अवाम ज़ुल्म नाइंसाफ़ी क़त्ल ये आम बर्दाश्त कर रहा था और भारत में ७४ सालों से मुस्लिम अवाम बर्दास्त कर रहा है।   नाइंसाफ़ी बेहद बढ़ गई हर जानिब ज़हर के खेती पल गई।  उसके लिए मीडिया के ज़हरीले नाग और बीजेपी के सपोले ज़िम्मेदार हैं।   जैसा करोगे वैसा भरोगे।  ऊपर वाले के यहाँ देर है पर अंधेर नहीं।  हर ज़ालिम को उसके किये का हिसाब चुकाना पड़ता है।  कभी ख़ुद ऊपर वाला सज़ा देता है बे-क़ायदा मौत के ज़रिये कभी अपने चुने हुए बन्दों से ज़ालिम से हिसाब लेता है।

पुलिस मारे गए मिश्रा की कुंडली खंगाल रही है।  ग़ैर क़ानूनी हथियार, ड्रग, भू माफ़िया और क्या यह चांडाल जिस्म फ़रोशी रैकेट का हिस्सा भी तो नहीं था।  और उसके तार किस किस तंज़ीम से जुड़े हुए हैं।कौन सा रसूख दार सियसतदाँ इन जैसे ज़हरीले नागों को पालते हैं और ज़हर का कारोबार करतें हैं। 

कल जिगर फटने से ३ मौतें हुई दो सूबे शुमाल में और एक बिहार में।  शुमाल की ख़ास मौत बिजनौर के नो उम्र क्रिकेट खिलाड़ी गौरव शर्मा की है।  जहां क्रिकेट खेलते वक़्त गौरव को को हार्ट अटैक आ गया, वोह गेंद उठाने गए और मैदान में गिर गए।  हॉस्पिटल ले जाते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया।  जर्राहों ने बताया की उनको हार्ट अटैक आया।  उनके अहल ए ख़ाना में यकायक मौत की ख़बर से कोहराम मच गया।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

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