Saturday, 2 March 2024

नाम-निहाद सेकुलरों से नाराज़ मुस्लिम अब मजलिस के साथ।

अज़ीज़ नाज़रीन।  

मेरा क़ाइद मेरा हक़ इस बार मजलिस के साथ सब।  कुछ ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ नव भारत, आज तक, रिपब्लिक, इंडिया न्यूज़, टाइम्स नाउ जैसे फ़र्ज़ के ग़द्दार अपनी मुनाफ़ेक़ाना रिवायत बरक़रार रखें हैं।  मजलिस को बीजेपी की बी टीम बोलना, या सपा कांग्रेस के वोट काटने वाला बोलना, या मजलिस की वजह से फायदा बीजेपी को होगा बोलना।  इन गद्दारों ज़ालिमों मुनाफ़िक़ों से एक बात ज़रूर पूछूंगा सियासत में जो बन्दा अवाम के हक़ की बात नहीं करता है उनके लिए काम नहीं करता है इन्साफ से काम नहीं करता है तो उसको वोट देना चाहिए, अगले ५ साल तक परेशान होने के लिए या उसको उसकी औक़ात दिखाना चाहिए।  सपा, कांग्रेस को झोली भर भर के खैरात में मुस्लिम अवाम ने वोट दिए और जब उनके हक़ की बात आई तो इन नो निहाद तंज़ीमों ने एवांन में या तो बीजेपी की ताईद की या वाक आउट किया।  सबसे बड़ी बात जिस काले क़ानून को कांग्रेस ले कर आई थी की किसी भी शख़्स पर महज़ शक की बुनयाद पर दिल्ली में बैठा एक ऑफ़िसर उस इंसान को बगैर वारंट गिरफ्तार करने का हुकुम नाफ़िज़ कर सकता है।  उस बिल को और सख़्त बना कर जब अमित शाह ने पेश किया तो कांग्रेस और सपा जैसे तंज़ीमों ने हुकूमत के फेवर में वोट किया।  अगर मुख़ालेफ़त में खड़े थे तो असद और इम्तियाज़।  

फिर "का",  एन.आर.सी. जैसे बिलों पर भी इन नोनिहाद तंज़ीमों का किरदार खूब दिख कर आया। 

आज़म ख़ान की सियासत को बर्बाद कर दिया उनको जेल उनके फ़रज़न्द को जेल उनकी एहलिया को जेल लेकिन सपा से एक लफ्ज़ नहीं बोलते आया।  साबिक़ मेंबर ऑफ़ पार्लियमान शहीद भाई अतीक और अशरफ और उनके फ़रज़न्द को हलाक कर दिया किसी नाम-निहाद से चूं तक नहीं निकली। 

जब तुम हमारे हक़ में आवाज़ नहीं बुलंद कर सकते तो हमारे वोट पर अपने महलों की तामीर भी मुमकिन नहीं है।  वोह अपने फ़र्ज़ के ग़द्दार हिन्दू आतंकी मुवाफ़िक़ लंगूर और लँगूरनियाँ हिन्दू ज़ेहन को मज़ीद मुत्तसिब कर रहें हैं।  सेक्युलर तंज़ीमों को धमका रहें हैं अगर तुमने मुस्लिम हक़ की बात की तो हिन्दू वोट नहीं मिलेगा।   तो इतना जान लें की हिन्दू वोट कब पड़ता था इन सेक्युलर तंज़ीमों को कभी नहीं।  जो भी जीत कर आये वोह मुस्लिम वोटों पर आये और हमारी लाशों पर महज़ सियासत की है।  एवांन में हमारे बच्चों के मुस्तक़बिल को तबाह करने के क़ानून बनायेगें लेकिन इन नो निहादों के मुँह से एक अलफ़ाज़ नहीं निकला। 

यह सेक्युलर तंज़ीमें कब हिन्दू वोट पर जीत कर आई इनको महज़ मुस्लिम वोटों ने जीताया था।  यादव, ब्राह्मण, ठाकुर, और दीगर हिन्दू अवाम का ८० फीसद वोट बीजेपी को पड़ता है।  और १०० फीसद मुस्लिम वोट इन सेकुलरों को पड़ता था।  महज़ १ या २ फीसद बीजपी के खाते में जाता था।  यह सेक्युलर तंज़ीमें हिन्दू वोट पर कब जीत कर आई थी यह तो मुस्लिम वोटों से ही जीतते थे।  फिर जो जीत कर आतें थे बाद में बीजेपी के पास चले जाते थे।  

महज़ खजूर खिलाने, ईद पर टोपी पहनने, गमछा गले में लटकाने, अवामी हल्क़े में महज़ बड़ी बड़ी बातें करने से मुस्लिम जज़बात पर तुम हावी तो हो जावोगे लेकिन जब उन्ही बातों पर एवांन में या तो ख़ामोशी इख़्तेयार कर लोगे या उस मुद्दे पर वॉक आउट करोगे या हुकूमत के बिल को सपोर्ट करोगे तो एक बार मुसलमान धोखा खायेगा दो बार खायेगा बार बार ऐसा करोगे तो कोई भी ज़मीर वाला मुसलमान अपनी नस्लों को बर्बाद होते नहीं देख सकता।  फिर वोट उस ही को मिलेगा जो उनके हक़ की जंग लड़ेगा उनके बच्चों के मुस्तक़बिल के फ़ैसले हुकूमत से लड़ लड़ के उनके हक़ में लेगा। 

एक बात साफ़ है या तो मौजूदा महाज़ में मजलिस को लेना होगा और मुस्लिम क़ियादत क़ुबूल करनी होगी या नहीं तो मजलिस अपने नुमाइंदे खुद उतारेगी।  मुसलमानों का वोट तो चाहिए लेकिन उनकी क़ियादत क़ुबूल नहीं है, तो ऐसा अब नहीं चेलगा। 

इन्साफ के मामले पर बीजेपी, भगवा ज़ालिम, दरिंदे, दहशतगर्द से समझौता नहीं।  मजलिस का साथ दो बदले में तुम्हारा हक़ और इन्साफ लो। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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