Saturday, 2 March 2024

अमेरिका इंसानियत पर मेहरबान, यहूद, हिन्दू दहशत अलग थलग पड़ी।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

अमेरिका इंसानियत और इंसानी हुक़ूक़ पर मेहरबान दिख रहा है।  वैसे भी अमेरिका में इंसानी हुक़ूक़, अकलियतों के हुक़ूक़, मज़हबी आज़ादी के ऊपर काफ़ी सख़्त क़ानून हैं और उसकी ख़िलाफ़ वर्ज़ी करने वाले मुल्क और शख़्स को सख़्त सज़ा है।  इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी, मज़हबी आज़ादी और अक़लियतों के हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने वाले मुमालिकों में अब सिर्फ दो ही दहशतगर्द मुल्क बचें हैं।  एक इजराइल का यहूद दहशत दूसरा हिन्द का हिन्दू दहशत (हिन्दू आतंक)।  इजराइल पर नकेल कस दी गई है इसके बाद अमेरिकी फ़ज़ाई तय्यारों की बम्ब बारी और जंग की आग भारत के नसीब में होगी।  

अमेरिका के फ्लोरिडा में इसरायली सफ़ीर (Ambassador) के फ़रज़न्द को जेल में पिटाई का मामला सामने आया है।   गुजिश्ता माह इजराइल सफ़ीर (Ambassador) का १९ साला  फ़रज़न्द अब्राहम गिल अमेरिकी पुलिस को कुचलने के इलज़ाम में जेल में बंद था।  जेल में जब वोह गाये के गोश्त से बने एक लज़ीज़ खाने के बारे में बात कर रहा था तब एक शख़्स ३२ साला क़ैदी ब्लेक एल्विस एर्मस ने गिल के ऊपर हमला बोल दिया और उसकी घूसों लातों और बेल्ट से ज़बरदस्त पिटाई कर दी।

गिल के पास ना ही ड्राइंग लाइसेंस था और ना ही उसकी गाडी पर नंबर प्लेट थी।  उसको जब रोका गया तो उसने गाडी पुलिस के ऊपर चढ़ा दी।  गिल के वकीलों ने उसे छुड़ाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की लेकिन उसकी क़िस्मत में जेल थी सो उसको जेल भेज दिया गया।   उसको सिफारती फेमिली के होने के क़ानूनी सहूलियत (Embassy Legal Immunity) फ़राहम नहीं थी। 

उधर अमेरिकी सदर जीओ बाइडेन गाज़ा पर इसरायली जारिहाना पर आलमी बरादरी की तरह इजराइल से सख़्त ख़फ़ा हैं।  उन्होंने यहाँ तक कह दिया अगर इजराइल ने ग़ाज़ा में नस्ल कूशी बंद नहीं की तो वोह हमला कर देगा।  हाइफ़ा और वेस्ट बैंक में इजराइल का जंग का दूसरा महाज़ खोलने पर अक़वाम ए मुत्तहिदा समेत फ्रांस, रूस, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, सऊदी, इजिप्ट समेत तमाम आलम के मुमालिक का कहना है अगर इजराइल ने जंग के लिए दूसरा महाज़ खोला तो उसके ऊपर आलमी फ़ौज हमला कर देंगी।   

हमास के साथ जंग जैसे जैसे लम्बी होती जा रही है आलमी बरादरी को इजराइल की दहशत,  ज़ुल्म और बर्बरियत का इल्म हो रहा है।  अब इजराइल इतनी जारहत कर चूका है की वोह अलग थलग पड़ गया है और तमाम आलम के मुमालिक फ़लस्तीन के बेगुनाह अवाम की नस्ल कूशी पर इजराइल से सख़्त ख़फ़ा हैं।  यहाँ तक की अमेरिका, ब्रिटेन जो कभी इजराइल के लिए नर्म रुख़ रखते थे ज़ालिम, दहशतगर्द नितन्याहू की हिटलर शाही और इंसानी क़त्ल पर ख़फ़ा हैं।    

इस बीच अमेरिका ने एलान किया है की अमेरिका हवाई जहाज़ के ज़रिये ख़ाना, दवाई और दिगार सामान फ़लस्तीन में भेजेगा।   बाइडेन ने ग़ाज़ा में इंसानी इमदाद के लिए एयरड्रॉप सहूलत का आग़ाज़ करने का एलान किया है।  सदर बाइडेन ने कहा कि अमेरिकी एयरड्रॉप आने वाले दिनों में होगी।   अमेरिकी सदर ने सहाफ़ियों से दौरान ए गुफ़्तगू में कहा कि हमें मज़ीद इमदाद करने की जरूरत है और अमेरिका और ज़्यादा मदद करेगा. उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा को दी जाने वाली मदद काफ़ी नहीं है. उधर, व्हाइट हाउस के तर्जुमान जॉन किर्बी ने कहा कि एयरड्रॉप एक मुतवातिर कोशिश बनेगी।  पहली एयरड्रॉप में खाने के लिए तैयार ख़ाना होगा। 

जब हिन्द के ऊपर जंग के बादल मज़ीद गहरे होंगे और हाकिमियत किसी और तंज़ीम के हाथों में आएगी तब के लिए में बतौर सहाफ़ी एक तजवीज़ देने का ख़्वाहिशमंद हूँ।  ऐसे तमाम मीडिया हाउसेस और उनके सहाफ़ियों को जेल में डालना होगा जो गुजिश्ता १० सालों में महज़ ज़ाफ़रानी तंज़ीम के लिए बेटिंग करते रहे।  हिन्दू दहशत को फ़रोग़ दिया और हर मुद्दे पर झूटी ख़बरें चला कर हिन्दू मुस्लिम, हिंदुस्तान पाकिस्तान, कश्मीर, इस्लाम कर के अवाम को सख़्त ज़हरीला बना दिया।  इस क़ानून में ऑटोनोमस जर्नलिस्ट्स, फ्री लाउंसर नहीं आयेगें। 

इन मीडिया हाउसेस और सहाफ़ियों ने जितना कमाया है उन सब को हुकूमत को ज़प्त करना चाहिए।  कियोंके उन्होंने वोह सब अपनी मेहनत ईमानदारी से नहीं बल्कि अपने फ़र्ज़ से ग़द्दारी कर के भारत की पीठ में कटार घोंप के कमाया है। 

आगे ऐसा ना हो तो उसके लिए एक Cost System होना चाहिए।  जहाँ कोई झूठी ख़बर किसी रजिस्टर्ड मीडिया हाउस के सहाफ़ी ने चलाई तो मीडिया हाउस और उस सहाफ़ी के ऊपर पेनल्टी लगना चाहिए।  ऐसा अदालत में होता है।  अगर वकील अपने केस में देर से पहुंचे ग़लत बयानी करे या तारीख़ पर तारीख़ लिए जाए या कोई और वजह जो अदालत को तोहीन ख़ेज़ दिखती है तो उसके ऊपर Cost लगाई जाती है। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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