Thursday, 7 March 2024

अज़्म पुख्ता हो तो चींटी हाथी को हलाक कर देती है।

अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़ाफ़रानी मीडिया के खूंखार जानवर भले ही भारत के बारे में झूठे सच्चे क़सीदे लिखते रहें और हक़ीक़त से मुँह मोड़ते रहें लेकिन सच्चाई यह है की भारत जैसा अज़ीम मुल्क अपने छोटे छोटे पड़ोसी मुल्कों से ख़ूब पिट रहा है।  काश्मीर, नेपाल, भूटान, बंगलादेश, बर्मा, श्री लंका, मालदीव। आजकल बोहोत अज़ीम हिन्द एक बोहोत ही छोटे से जज़ीरे मालदीव की मौसीक़ी पर रक़्स कर रहा है।  

दरअसल इसमें हुकूमत की नाकामी साबित होती है।  साफ़ ज़ाहिर हो रहा है भारत के अंदरूनी हालात और ख़ारजा पालिसी की नाकामी की वजह से हर एक मुल्क कर भारत को थप्पड़ लगा देता है ज़लील कर देता है।  अगर लंगूरों ने वक़्त पर हर मुद्दे को हिन्दू मुस्लिम, हिंदुस्तान पाकिस्तान में ना उलझाया होता और हुकूमत की नाकामी पर हक़ सवाल किया होता तो हालात इतने बदतर नहीं होते। 

जो मालदीव एक अरसे तक भारत का एक मोतबर इतिहादी और हिमायती रहा था उसने तक भारत के तमाम फ़ौजिओं को हकाल दिया।  उसकी वजह है हुकूमत के दिलो दिगाम में भरा हुआ ज़हर।  मुस्लिम अवाम के साथ नाइंसाफ़ी उनकी हक़तल्फ़ी, नस्ल कूशी, फौज, पुलिस, अदलिया, इन्तेज़ामियाँ का फिरकावाराना मुज़ाहेरा उसके ऊपर मीडिया का मुतस्सिब चेहरा। 

माह नवंबर २०२३ में मोहम्मद मुइज्जू मालदीव के ९वें सदर मुंतख़िब किये गए।  उन्होंने अपनी तंज़ीम के मेनिफेस्टो में इस बात का वादा किया था की इंतेखाब में फतह हासिल करने के बाद हर एक भारत के फौजी को चुन चुन के इस पाक सरज़मींन से बाहर हकालेगें।  उन्हें इस वादे पर चुना गया था जिसका उन्होंने पूरा पासो लिहाज़ रखा और ज़ाफ़रानी दहशत के हामी मुसलमानों इस्लाम के दुश्मन भारतीय फ़ौजिओं को मालदीव से हकाल दिया गया है।  गटर और फ़िरक़ापरस्ती से पैदा हुई गंदगी को गटर में ही फ़ैंक दिया गया है।  भारत के तमाम फौजी मालदीव से वापिस गए।  जिस तरह से चीन ने भारत के तमाम मीडिया सहाफियों को देश निकाला कर दिया था।  सब वापिस आ गए थे।  

अब इस्लामिक जज़ीरे मालदीव से तमाम गंदगी का हुक्का पानी बंद हो गया।  मुहम्मद माइज़्ज़ु की भारत के फ़ौजिओं से गुस्से का वोह आलम था की उन्होंने सादे कपड़ों में भी भारत के फ़िरक़ा परास्त ज़ेहनियत दहशत के हामी फ़ौजिओं को अपनी सरज़मीं पर बर्दाश्त नहीं किया।  मतलब साफ़ है इस गंदगी की औक़ात मुहम्मद माइज़्ज़ु अच्छे से जान गए थे की कितना आलूद इन ज़ालिमों के ज़ेहन के अंदर भरा है।  हो सकता है इन ज़ालिमों ने मालदीव में अपनी गंदी हरकरतेँ की होंगी।  जैसे जासूसी, मुस्लिम अवाम को परेशान करना बुर्का पॉश मुस्लिम खातूनों के ऊपर गंदी नज़र रखना।  टीवी मुबाहिसों में इस्लाम, ट्रिपल तलाक़, हिजाब, कसरत अज़वाज, आबादी जैसे मुद्दों पर वहीँ झूठी संघी ज़ेहनियत का मुज़ाहेरा किया होगा जो आम सक़ाफ़त भारत में इन संघी जानवरों की मुसलमानों और इस्लाम की निस्बत से होती है।

फ़िर जिस हिसाब से जासूसी करते हुए भारतीय रॉ, नेवी और फौज के अफसर तमाम आलम में पड़के गए हैं और भारत के माशी दहशतगर्द दुबाई, उक्रैन, इंग्लैंड, पाकिस्तान में पकडे गए हैं इन फ़ौजिओं की भी कुछ मशकूक हरकत हुकूमत  मालदीव की नज़र में आई होगी।    कई भारतीय नौजवान अमेरिका, कनाडा, इनलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, रूस में मारे गए हैं। 

फ़िर काश्मीर में जो ज़ुल्म किया था इन ज़ालिमों ने वोह किसी से पोशीदा नहीं है।  २०२१ में उत्तर प्रदेश में और २०२४ में उत्तराखंड में एहतेजाज करते हुए निहत्ते मासूम मुस्लिम अवाम पर धना धन गोलियां बरसाना

नामनिहाद सुपर पावर भारत के सामने मालदीव छोटा सा जज़ीरा है। मोदी को अब तक भारतीयों में  सबसे सख़्त तरीन वज़ीर ए आज़म माना जाता है। लेकिन सच तो यह है कि वह बहुत डरपोक और अब तक के किसी भी भारतीय द्वारा देखे गए सबसे कमजोर, नाहेल, निकम्मे  वज़ीर ए आज़म साबित हुए हैं। उनकी हुकूमत में हमसायों के साथ रिश्ते अपने सबसे कड़वे दौर में पहुंच गए हैं।  ख़ारजा पालिसी तबाह हो कर सबसे निचली पायदान पर पहुंच गई वहीँ दहशतगर्दी, नाइंसाफ़ी अपने उरूज पर पहुंच गया।

आज ज़ाफ़रानी भक्त मण्डली मोदी और बीजपी हुकूमत की कामयाबी में काश्मीर से ३७० और ट्रिपल तलाक़ ख़तम करने बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों को बताती है। जबकि यह कामयाबी नहीं बल्कि मोदी हुकूमत की नाकामी है।  काश्मीर से ३७० दस्तूर का क़तल कर के ख़तम की गई।  दस्तूर में ३७० की निस्बस्त से किया लिखा है।  जब काश्मीर की चुनी हुई हुकूमत मरकज़ को ३७० ख़तम करने की सिफारिश करेगी तभी यह दफ़ा ख़तम की जा सकेगी।  दूसरी बात काश्मीर का भारत में विलय ही ३७० की बुनयाद पर हुआ था।  ३७० ख़तम मतलब काश्मीर भारत से अलग।   ट्रिपल तलाक़ और बाबरी मस्जिद पर इन्साफ का क़तल किया गया उससे आलमी बरादरी में अदालत और हुकूमत की बोहोत बेइज़्ज़ती हुई है।  बाबरी मस्जिद में अकसरिय्यत अक़ीदे की बुनयाद पर ना की दस्तावेज़ों की बुनयाद पर फैसला दिया।  ट्रिपल तलाक़ एक सिविल क़ानून में पीनल एक्शन ३ साल की क़ैद।  तो ऐसे तमाम मामले आलमी बरादरी माइक्रोस्कोप लगा कर देख रही है जिससे हुकूमत की साख को भारी बट्टा लगा है। 

इसी वजह से भारत से आलमी बरादरी ने ख़ास अरब और क्रिस्टी मुमालिकों ने अपने एक्सपोर्ट मुहायदे केंसल कर दिए हैं।  जब फॉरेन एक्सचेंज ही नहीं होगा तो मुल्क तरक़्क़ी कैसे करेगा।  लेकिन लंगूर भक्त अभी तो नहीं समझ पा रहे हैं लेकिन जब पूरी तरह बर्बाद हो जायेगें तब इनकी आखों से गफलत का चश्मा उतरेगा।  

आज कल बेरुन मुल्क जो भी इज़्ज़त मोदी को मिल रही है वोह उसकी अपनी नहीं है बल्कि बाप दादा की कमाई इज़्ज़त एक बदकार औलाद को मिल रही है लेकिन वोह भी कब तक मिलेगी आखिर में इज़्ज़त का भी टोंटा हो जाएगा।  भले ही मीडिया ढिंढोरा पीटा करे अमेरिकी सदर इंतज़ार कर रहे थे, फ्रांस में भारी गर्म जोशी से इस्तक़बाल, इंग्लैंड में गूंजे नमो नमो के नारे लेकिन ऐसी खबरे हक़ीकत से कोसों दूर हैं। 

अगर इतनी ही इज़्ज़त थी तो मालदीव जैसे एक छोटे से जज़ीरे ने कैसे मोदी की पुंगी बजा दी जिसके सामने अमेरिकी सदर इंग्लैंड के वज़ीर ए आज़म रूस के पुतिन बोने लगतें हैं, उसने कड़क वज़ीर ए आज़म और एक अज़ीम मुल्क भारत को बोना बना दिया।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

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