अज़ीज़ नाज़रीन,
अदालत ए उज़मा की इलेक्टोरल बांड पर तमाम सियासी जमातों की सारंगी बजा दी है. जिसमे सबसे ज़्यादा लूट और डकैती ज़ाफ़रानी हुकुमरान जमात बीजेपी ने मचाई है. मुख़ालेफ़ीन क ग्रेस, सपा, एन सी पी, राजद, जेडीयू भी पीछे नहीं हैं।नाज़रीन मेने अपने कई मज़्मूनों में ज़ाफ़रानी हुकुमरान और मुख़ालिफ़ों की निस्बत से यही बात लिखी है। “सब एक ही हम्माम मे नंगे हैं।
शफ़्फ़ाफ़ छवी है तो वोह एक ही तंज़ीम की है "कूल हिन्द इत्तेहादुल मुस्लेमीन" जिसके ऊपर तमाम भाजपा और मुख़ालेफ़ीन जुम्मन ग़लत फ़हमी पैदा करते थे। भाजपा के लिए काम करतें हैं, अमित शाह से पैसे खाये। भाजपा को जीतवाने के लिए मुस्लिम और सेक्युलर वोट काटने की करोड़ों की सुपारी ली। जुम्मनों का अपना कुछ ज़ाती मफ़ात होता होगा या वोह ज़ाफ़रानी तंज़ीम के गुलाम होते होंगे।
तमाम सियासी जमातों का सियासी मेयार और काम करने की हिकमत ए अमली एक जैसी है। वतन के असासों की लूट, अक़लियतों ख़ास मुस्लिम, क्रिस्टी, सिखों की हक़तल्फ़ी, डाका, नाइन्साफ़ी अपनी वह वाही वग़ैरा। कोई कम तो कोई ज़्यादा लेकिन हैं सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे।
नाज़रीन वतन के असासों पर जो डाका डाले और बातें बड़ी बड़ी करे मतलब वही सियासी जमात आपके बच्चों के मुस्तक़बिल की दुश्मन है। सभी तंज़ीमें एक जैसी सियासत कर रही हैं। अब साफ़ शफ़्फ़ाफ़ छवी वाली तंज़ीम को जिता कर देखिये आपके तमाम मसले हल हो जायेगें। १९४७ से आपने तमाम तंज़ीमों को देख लिया जिसमे सबसे ज़्यादा इक़्तेदार में कांग्रेस और बीजेपी ही रही है। और इन दोनों तंज़ीमों को चंदे से मिलने वाली रक़म का कच्चा चिठ्ठा अदालत ए उज़मा में खुल गया है।
भारत में बढ़ते हुए इस अक्सरीयती हिन्दू दहशत और अक़लियतों पर होने वाले हमलो पर अब तो अमेरिका के सीनेट में भी बातें होने लगी हैं।
नाज़रीन जिस हिसाब से आज के नए भारत में हर दस्तूरी इदारों को गुलाम बना कर क़ानून की ताख में रख कर एक तरफ़ा राजा की जानिब से फैसले लिए जा रहें हैं वोह भारत की सालमियत के लिए खतरा है। फिर जिस हिसाब से अक़लियतों ख़ास मुस्लिम, क्रिस्टी अवाम को हरासा किया जाता है वही सूरत ए हाल अब सिखों के साथ हो रही है। जिस नमाज़ से हिन्दू अक्सरियत को तकलीफ होती है तरावीह की नमाज़ पर बवाल काटते हैं। उस ही तरावीह की नमाज़ को न्यू योर्क टाइम्स स्क्सेयर रोड पर मुसलमानों को अदा करते हुई वीडियो वायरल है। अमेरिका में ना किसी पुलिस ने लात मारी ना किसी को आने जाने मे तकलीफ़ हुई ना किसी का मज़हब ख़तरे मे पड़ा। ज़ेहन मे गोबर भरा हो तो ज़हर छोटी सी बात पर पैदा होगा। अमेरिका क्रिस्चियन अक्सरियत मुल्क है जहाँ मुस्लिम आबादी महज़ १.५% से है २% के क़रीब होगी लेकिन मज़हबी आज़ादी देखो। वहीँ भारत में मुस्लिम आबादी २०% है भारत को अंग्रेज़ों से आज़ाद करवाने मे बड़ा योगदान रहा लेकिन यहाँ की हालत देखो।
नाज़रीन इन तमाम नाइंसाफ़ी, हक़तल्फ़ी, क़त्ल, ज़हर, दहशत से अगर मुल्क को आज़ाद करना है तो मजलिस का साथ दें, मजलिस के ऊपर किसी भी क़िस्म का कोई इलज़ाम नहीं है, ना ही वतन के असासों पर डाका डालने का ना ही दस्तूर, इंसाफ़ का क़तल करने का और ना ही बड़ी बड़ी फेंकने का। जो बात है वोह हक़ और खरी।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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