Sunday, 7 February 2021

भारत पर भारी रहेगा बाबर और बाबरी. क़िसास पूरा होगा जब मारे जायेगें तमाम हक़तलफ़ अनासिर.

अज़ीज़ नाज़रीन, 

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Muslims are shining across the world. 

क़िसास पूरा हो रहा है आगे भी पूरा करेंगें इंशाल्लाह।  एक और शिद्दत पसंद लंगूर हलाक। नाज़रीन जैसा की इस सहाफी ने पहले ही वाज़े कर दिया है की हर उस शख़्स को अल्लाह के हुज़ूर अपने जुर्म का  जवाब देना होगा जो मुस्लिम दिल आज़ारी, अवाम की हक़तल्फ़ी, नाइंसाफी, क़त्लो ग़ारत करता है, और वही हो रहा है।  नाज़रीन इस सहाफी ने वाज़े अलफ़ाज़ में कई मज़मूनों और मिडिया के तब्सिरों में कहा था, सियसतदांओं और शिद्दत पसंद अवाम के बाद  लंगूर लँगूरनियों का नंबर लगेगा।  जब इन लंगूर और लँगूरनियों ने तब्लीग़ी जमात पर तोहमत लगाई थी और मौलाना साद साहब पर बेहद अदना दर्जे की छींटा कशी कर के "भगोड़ा, क़ातिल, यहाँ तक की आतंकी जैसे अलफ़ाज़ बोल कर उनके विक़ार और रूहानियत को ठेस पहुंचाई थी तभी इस सहाफी ने अपने पुराने मज़मूनों का हवाला दिया था और कहा था तुम लोग मरते मर जाओगे लेकिन मौलाना साद साहब की परछाई तक को नहीं छु सकते जैसा की ज़ाकिर भाई, हाफिज सईद, मौलाना अज़हर मसूद साहब के पीछे झूटी और फरेबी ख़बरें चलाते रहे लेकिन ख़ुद  ही ज़लील हुए वैसे ही साद साहब पर ज़लील होंगे।  

फिर अप्रैल २०२० में कुछ लंगूर और लँगूरनियों को हमारी अदालत ने नाम बनाम मौत का फरमान जारी किया था।   उस फरमान को लंगूर और लँगूरनियों ने हलके में लिया लेकिन उसके बाद तो छोटे मोठे लंगूर और लँगूरियों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया जो अब बड़े पैमाने पर पहुंच चूका है।  

रिपब्लिक टी.वी. का ख़ासम ख़ास लंगूर विकास शर्मा ६ फ़रवरी २०२१ को मौत की आग़ोश में चला गया।   उसकी मौत से तमाम शिद्दत पसंद, बीजेपी वाले, संघी और लंगूर लँगूरनियाँ सकते में और ख़ौफ़ज़दा हैं के कहीं अगला नंबर उन्ही का तो नहीं होगा।   इस लंगूर विकास शर्मा ने तब्लीग़ी मुद्दे पर गुजिश्ता साल मौलाना साद साहब के लिए बेहद अदना और निचले दर्जे के अलफ़ाज़ के साथ टी.वी. शो किया था। 

नाज़रीन अभी गुजिश्ता इतवार बा तारीख ३१ जनवरी २०२१ को इस सहाफी को कमिश्नर ऐ टी अस और दो आला ओहदेदारों के दरमियान गुफ्तगू करने का मौक़ा मिला था।  कमिश्नर साहब और तमाम ऐ टी अस की टीम ने बोहोत ही आला ख़ैर मक़दम किया और अक्रॉस दी टेबल गुफ्तगू बोहोत ही उम्दा अंदाज़ में हुई।  ऐ टी अस के ओहदेदारों का इस सहाफी के लिखे हुए कुछ तल्ख़ मज़मूनों और हुकूमत के ख़िलाफ़ उसकी बढ़ती हुई मुख़ालेफ़त और नाइत्तेफ़ाक़ी की वजह दरयाफ्त की थी।   इस ज़िम्न में कश्मीर से ले कर पाकिस्तान, मुस्लिम हक़तल्फ़ी, नाइंसाफी, मस्तूरातों (हाथरस) ज़िना, कठुआ गिरोह गरदाना ज़िना,  किसान, बाबरी, लव जिहाद, गौ कुशी, गौ तस्करी, दिल्ली दंगों और 'का' ऐन.आर.सी. के बाद मुस्लिम नौवजवानों की गिरफ्तारी, उत्तर प्रदेश में अमनपसंद एहतेजाज करते हुए मुस्लिम अवाम पर पुलिस का निशाना लगा कर गोली मारना और दो अफ़राद को हलाक करना फिर उनको गिरते हुए देख कर हसी मज़ाक करना, साधू का दिल्ली में उस गोली मारने पर अपनी हुकूमत की हौसला अफ़ज़ाई करना और बोलना अभी यूपी में मारा है आगे दिल्ली में मरेंगे, गोली मारो बयान की बात करना, जामियां और अलीगढ़ मुस्लिम दारुल ओलूम (यूनिवर्सिटी) के तालिबे इल्मों स्कॉलर्स की गिरफ्तारी, मौलाना जोहर अली यूनिवर्सिटी पर साधू का डाका, आज़म खान की ना जाइज़ गिरफ्तारी मुस्लिम सियासतदानों को हरसा करना  जैसे तमाम आतिशी मुद्दों पर बोहोत ही नतीजा कुन बहस हुई।

तमाम बेहेस के बाद कमिश्नर साहब ने हल पुछा तो इस सहाफी का जवाब था इन्साफ  करो हर मसले का हल सिर्फ और सिर्फ इन्साफ की पैरवी करना और इन्साफ देने से ही हो जाएगा।  कश्मीर मुद्दे पर साफ़ अलफ़ाज़ में कहा वोह भारत का लाज़मी हिस्सा नहीं है बरक़्स १९४७ से मुतनाज़िया ज़मीन है. जिसकी तस्दीक़ अब तो अक़वामे मुताहिदा, OIC और बरतानिया की ऐवान भी कर चुकी हैं और मान चुकी है की कश्मीर में कुछ तो ग़लत हो रहा है जिसको अगर दुरुस्त नहीं किया गया तो उसकी तलाफ़ी कभी ना हो सकेगी।  कश्मीर को अज़ाद करना ही होगा या पाकिस्तान के साथ ज़म. 

साल २०१७ के इक्तेदाम तक यानी नवंबर-दिसम्बर के आस पास और २०१८ के दरमियान इस साहाफी ने आज तक, नवभारत टाइम्स के कई खबरनामों में इस बात का ज़िक्र किया था की भारत ५ हिस्सों में तक़सीम होगा।   जिसकी मज़ीद वज़ाहत अपने मज़मूनों में की गयी है।   नाज़रीन यह बात दर हक़ीक़त है ऐसा होगा आज नहीं तो कल हर हाल में ऐसा होगा।   

जिस अंदाज़ में जालसाज़ी, झूट और धोखेबाज़ी से बाबरी मस्जिद की ज़मीन पर डाका डाला गया है और उसको ना जाइज़ हिकमते अमली इख़्तेयार कर के क़ब्ज़े में किया है उसका ज़वाल तो आएगा और हर हाल में आएगा।  जिस बाबर के नाम से शिद्दत पसंदों, संघी और बीजेपी वालों को अंगार लगती थी उसी बाबर से शाकिस्त होगी।  जिस बाबर के नाम को शिद्दत पसंद तारीख़ के सफों से मिटाने के लिए बेताब थे उनको भी बाबर का नाम लेने पर मजबूर होना पड़ेगा। 

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