Sunday, 21 February 2021

ज़ाफ़रानी सियासी इश्क़।

मुक़ाम : नई बंबई हिन्द 

तारीख़ २१ फरवरी २०२१ बरोज़ इतवार वक़्त सुब ११:३३ मिनिट.


अज़ीज़ नाज़रीन और मेरे हमवतनों,

मरकज़ी ज़ाफ़रानी हाकिमों का दोहरा रुख़ बखूबी अवाम के सामने आ चूका है।  जिस सिख अवाम को सियासी मोहरे के जैसे इस्तेमाल करते आये थे यह ज़ाफ़रानी भारतीय जनखा पार्टी (बीजेपी) के कारकून अब वही सिख समाज उनको तकलीफ का सामान नज़र आने लगे हैं।  ज़ाफ़रानी मीडया के ग़ुलाम लंगूर और लँगूरनियों के सामने हर ज़ाफ़रानी या संघ का मुहाफ़िज़ १९८४ को बखूबी याद करता था और उनकी सिख मोहब्बत परवान चढ़ती थी लेकिन महज़ ९ महीनों में सिख अवाम ने ऐसा क्या कर दिया की वोह तुम्हारे, वतन के, इंसानियत के दुश्मन हो गए।  कहीं ऐसा तो नहीं जिस विकास को पापा पैदा करना चाहते थे सिख अवाम ने  लँगूरनियों के साथ मिल कर पैदा कर दिया, तभी सिखों से इतने ख़फ़ा दिख रहे हो।

अब हालात ऐसे हो गए की मरकज़ी ज़ाफ़रानी हुकूमत ने साका श्री ननकाना साहिब का सदी के इजलास में शामिल होने के लिए पाकिस्तान जाने वाले सिखों के जत्थे पर रोक लगा दी है।  मरकज़ी ज़ाफ़रानी हुकुम से सूबे पंजाब में मज़हबी ख़ुमार चढ़ने लगा है।   जिसकी ज़द में अब हिन्दू मज़हबी इजलास कुंभ के भी आने का खदशा है।   श्री अकाल तख़्त के जत्थेदार जनाब ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस फैसले को फौरी वापिस लेने की गुज़ारिश की है साथ ही उन्होंने इस बात को भी दोहराया है, अगर करोना वबा के चलते ही यह सब किया है तो हुकूमत मार्च में होने वाले हिन्दू मज़हबी रिवायत कुंभ पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही है।  

जत्थेदार जनाब ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एक सहाफी इजलास में कहा साका श्री ननकाना साहिब का इस सदी का इजलास सिखों के लिए एक तारीखी मरहला है।  इजलास में शरीक होने के लिए एक सदी तक इंतज़ार करने वाले सिख अवाम के जज़्बात और उनके मज़हबी रिवायत का मरकज़ को क़द्र करनी चाहिए।  तारिख से जुड़ा हुआ यह पल अब एक सदी के बाद आएगा उन्होंने आगे मज़ीद कहा।   अकाली सियासी रहनुमा विक्रम सिंह मजीठिया ने भी इस मौज़ूं पर मरकज़ के लिए अपना ग़ुबार निकाला उन्होंने कहा मरकज़ का यह फैसला सिख मुखालिफ है।  उन्होंने मज़ीद कहा मरकज़ ने जत्थे को पकिस्तान जाने पर रोक लगा कर सिख मज़हबी क़ियादत के जज़बात को इज़ा पहुंचाई है और उनकी दिल शिकनी की है।  हुकूमते हिन्द किसान एहतेजाज का क़िसास और गुस्सा सिखों पर निकाल रही है। 

आज ज़ाफ़रानी हाकिम अपने हर महाज़ पर और उलटी गिनती गिनने के सबब रूसवा और ज़लील हो रहें हैं।   हर उस मुद्दे पर ज़लालत इनका मुक्क़द्दर बन गई है, जिसको यह अनासिर अपना सबसे मज़बूत और मेहफ़ूज़ क़िला समझ कर अवाम के ज़ेहनों में शक-शुकूक, वस्वसे और ज़हर पेवस्त करते थे।    पहले इनकी जंग मुसलमानों से हुई और हर मुद्दे पर हर मुद्दे पर सख़्त ज़लील हुए, सल्तनते मुग़लिया, राम मंदिर तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनवाई, वतन परस्ती, वन्दे…….., भारत………, गौ कुशी, गौ तस्करी, लव जिहाद, ट्रिपल तलाक़, अज़ान, कसरते अज़वाज, दहशतगर्दी, तब्लीग़ी, पाकिस्तान, कश्मीर, दरन्दाज़ (घुस्पेठिये), शहरियत क़ानून, हिन्दू अक़लियत हो जायेगें.   

जब यह ज़ाफ़रानी अनासिर मुसलमानों से जंग में सख़्त तरीन शिकस्त खा गए तो अब अपने ही मुहाफिजों और हम ख़याल अवाम पर तशद्दुत और जब्र करने लगे।  जैसा की अमूमन इन ज़ाफ़रानियों के लिए  "ग़ द्दा री" लफ्ज़ वक़्फ़ है,  हस्बे रिवायत पहले मराठा सूबे की सियासी तंज़ीम शिव सेना के साथ ग़द्दारी की और जंग से क़ब्ल किये हुए मुहायदे की ख़िलाफ़वर्ज़ी जिसके तहत शिव सेना के वज़ीरे आला होना ते क़रार पाया गया था।    लेकिन जंग फतह होने के बाद कर दी ग़द्दारी क्योंकि जंग में ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने ज़्यादा क़िले फतह किये थे और शिव सेना ने कम, बस हो गया नफ़्स हावी और शुरू हो गयी नफ़्स और हक़ के दरमियान जंग।  फिर हुआ वही जो होता आया है शैतान जब किसी भी शख़्स के पीछे पड़ता है तो उसको बर्बाद कर के ही छोड़ता है।   ज़ाफ़रानियों के नफ़्स के जंजाल में उनके नफ़्स की जीत हुई और हक़ की हार।   फिर यहाँ से शुरू होता है क़ुदरत का खेल और नफ़्स की जंग में हारे हुए उस ग़ुलाम अफ़राद का ज़वाल।   सच्चाई के रस्ते पर चलना बड़ा ही कठिन है और उसपर चलने वाले को बेशुमार तकलीफों का सामना करना होता है। 

महाराष्ट्र के बाद बिहार में वही हालात बने थे लेकिन ज़ाफ़रानियों की महाराष्ट्र में इतनी रूस्वाई हो चुकी थी की मज़ीद सेहेन करने की ताप और क़ुव्वत बाक़ी नहीं बची थी तो अब मरता क्या ना करता वाले फलसफे पर अमल करते हुए दरी चादरे उठाने और कुर्सी लगाने का काम भी इन ज़ाफ़रानियों को माक़ूल लगा, और बावजूद ज़्यादा क़िले फतह करने के दोयम दर्जे के शहरी बनने पर मजबूर हो गए।  

बिल आख़िर जंग अपने हतमी मरहले को पहुंच गई और अब मुक़ाबले में सिख ब्रादरान हैं।  किसान एहतेजाज में जिस हिसाब से सिखों को हदफ़ बनाया और झूटी बातों पर उन पर निशाना लगाया ऐसे ही हालात कभी मुस्लिम अवाम के साथ थे।  हर मुद्दे पर कहीं ना कहीं से मुस्लिम नज़र आ ही जाते थे।   किसान एहतेजाज में सिर्फ सिख नहीं बल्कि हरयाणा का जाट, राजिस्थान का गुज्जर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश का हिन्दू, और तमाम मुल्क का मुस्लिम किसान एहतेजाज का हिस्सा है।  लेकिन गोली चली तो किस पर सिर्फ सिख किसानों पर इलज़ाम लगा तो किस पर सिर्फ सिख समाज पर किसान एहतेजाज की क़यादत खालिस्तानी दहशतगर्द कर रहें हैं।   

नाज़रीन इस बात को मन्ज़रे आम करने में इस सहाफी को ज़र्रा बराबर शक नहीं की अगले ५० साल मुस्लिम अवाम के लिए ऊरूज देने वाले साबित होने वाले हैं।   अगले ५० साल मुस्लिम अवाम के लिए सुनहरे होंगे और वह तमाम आलम में अपने हदफ़ को पाएंगे, इल्म, रूहानियत, मज़हब, तिब्बी, साइंस-टेक्नोलॉजी, तारिख़, जोग्राफिया, ज़ाहानत हर हदफ़ पर मुस्लिम अवाम चढ़ाई करेंगे और यह सिलसिला अगले ५० साल तक जारी रहेगा जिसका ज़िक्र इस सहाफी ने अपने कई अंग्रेज़ी मज़मूनों में किया है।  जिसमे से एक हाल ही में लिखे Muslims are shining across the world.  मज़मून में है।  जब मुस्लिम फौजी पहाड़ की चोटी पर चढ़ जायेगे तब एक सेचुरेशन (saturation) के हालात बनेगे।  फिर मुस्लिम कब तक उस हालात पर मुक़ीम होंगे सिवाए मालिके कायनात के कोई नहीं जानता।  

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करीना भाभी ने पाटोदी खानदान और सैफ भाईजान को दिया एक और फ़रज़न्द।  सहाफी जुबेर ने अपने ही अंदाज़ में दी मुबारक बाद   

  

सल्तनते मुग़लिया के आमद की सुगबुगाहट मुबारक हो। 

Zuber Ahmed Khan

21 February at 11:53 am   
 

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सल्तनते मुग़लिया के आमद की सुगबुगाहट मुबारक हो।

बाबर बाबर बाबर तैमूर के बाद बाबर. सैफ भाई क्या करीना भाभी से मुग़लिया सल्तनत की नई नीव रख रहे हो. अगर ऐसा है तो आपका ख़ैरमक़दम है, शिद्दत पसंदों से हरगिज़ ख़ौफ़ज़दा ना होना। हक़ और इन्साफ में अपने रब से डरते रहो दुनिया तुमसे डरेगी। रब की रस्सी मज़बूती से थाम लो, दुनिया इज़ा पहुंचने से पहले १००० बार सोचेगी।

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