अज़ीज़ नाज़रीन,
ऐसा कहतें हैं जो जितना बड़ा ज़ालिम होता है और झूट फरेब के ऊपर अपना महल बनाता है, दोग़ला चेहरा अवाम के सामने रखता है हर मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाता है तो मालिके कायनात उसको उस ही ग़ार में गिराता है जो वोह दूसरों के लिए खोदता है। नाज़रीन आपको चार्ली एब्दो के पैग़म्बर सल्लम और इस्लाम मुख़ालिफ बयानात और कार्टून का इल्म तो होगा, लेकिन उन कार्टून को जब हूकूमते फ्रांस की जानिब से हर हूकूमती इमारतों पर चस्पा किया गया तो आलमे इस्लाम में सख़्त तशवीश और गुस्से को देखा गया। अब यह कैसे मुमकिन होता की मुस्लिम दिल शिकनी की बात हो इस्लाम मुख़ालिफ बात हो पैग़म्बर की बेहुरमती हो और कुफ्रिस्तान (भारत) का हिन्दू शिद्दत पसंद, संघी दहशतगर्द और हुकूमत उस मसले पर इज़हारे खुशी ना ज़ाहिर करे। होना क्या चाहिए था ऐसी बेहुरमती पर इज़हारे ख़्यालात की दोहाई देने और फ्रांस हुकूमत के हमक़दम खड़े होने के बजाये उन ना मुरादों को अपने हमवतन मुस्लिम अवाम की दिल अज़ारी में उनके शाना बा शाना खड़े होना था।
ख़ैर मुस्लिम अवाम के साथ जो होना था हो गया अब दिल अज़ारी की बारी उन हिन्दू शिद्दत पसंदों की थी जो फ्रांस के चार्ली एब्दो कार्टून पर खुशी का इज़हार कर रहे थे। ऊपर वाले की लाठी बे आवाज़ है और जब ज़ालिमों, जल्लादों, शिद्दत पसंद काफिरों पर पड़ती है उनको तड़पने का मौक़ा भी नहीं मिलता है और जगह पर ही ढेर हो जातें हैं।
नाज़रीन इस जंग में भारत के ऊपर हॉलीवुड अदाकारा और पॉप सिंगर रिहाना का किसान मुद्दे पर ट्वीट बम की तबाही का हुकूमत जायज़ा भी ले पाती के रिहाना ने एटम बम से भारत के ऊपर हमला कर दिया है। दरअसल रिहाना ने लॉन्जरी ब्रांड के लिए फोटोशूट कराया है. इस फोटोशूट में वो टॉपलेस पोज दे रही हैं. और उन्होंने गणेश की मूर्थी को पहन रखा है। यह हमला तमाम हिन्दू मज़हब के मानने वालों के मज़हबी अक़ीदे के ऊपर है। ठीक उसी तरह जिस तरह से फ्रांस ने तमाम आलम के इस्लाम मज़हब के मानने वालों के मज़हबी अक़ीदे के ऊपर हमला किया था।
अब यह सहाफी उन तमाम शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम,
संघी दहशतगर्द दहशतगर्दों से कहना चाहेगा की तुम लोग तो चार्ली
एब्दो के साथ खड़े थे, और उसके कार्टून सराह रहे थे। ख़ास हूकूमते
झांसाराम से सवाल करता है, जिसने इस्लाम के पैग़म्बर की बेहुरमती पर हूकूमते फ़्रांस की हिमायत की थी, तो क्या अब भी उसका अक़ीदा इज़हारे राये और तासुरात
ख़यालात की आज़ादी पर क़ायम है।
अब क्या कहोगे झांसा राम। क्या अब फ्रांस के जैसे रिहाना के
साथ खड़े हो या अपनी आदत के हिसाब से जैसा की हर बार ग़द्दारी करते हो इस बार भी गद्दारी
करोगे,
और अपने फ्रांस वाले बयान के साथ ना खड़े हो कर रिहाना पर लानत
भेजोगे ताके गुजरात बल्दिया, उत्तर प्रदेश, वेस्ट बंगाल असेंबली में उसका फायदा मिल सके।
अब तुम्हारे आगे कुँवा और पीछे खाई वाली बात हो गई है। अगर रिहाना पर लानत भेजते हो तुम गद्दार साबित
होंगे,
अवाम तुमको एक जनखा तसव्वुर करेगा जो अपनी कही हुई बात पर एक
महीना भी क़ायम नहीं रह सकता। दूसरी बात जिस
रिहाना के किसान मुद्दे पर ट्वीट बम पर तुम उसको अपने मुल्क के अंदुरुनी मसलों में
मुदाख़ेलत बोल रहे थे तो अगर तनक़ीद की तो वोह अमेरिका के अंदुरुनी मुद्दों पर मुदाख़ेलत
जैसा होगा। और अगर लानत नहीं भेजी अपने गुजिश्ता
बयान फ्रीडम ऑफ़ स्पीच एंड एक्सप्रेशन पर क़ायम रहे तो हिन्दू तुमसे झिटक जाएगा।
कुल मिला कर यह सहाफी इतना ही कहना चाहेगा की हर शख़्स को अपना मज़हब अपने मज़हबी रहनुमा अज़ीम और मक़बूल होतें हैं उनसे मोहब्बत होती है। दूसरों के मज़हबी रहनुमाओं पर ऐसी नाज़ेबा हरकत पर अगर तुम तास्सुरात और ख़यालात की आज़ादी का कफ़न डालोगे फिर जब तुम्हारे ऊपर वही हालात आये तो क्या करोगे। इसीलिए हमेशा हक़ का साथ दो जो सच्चा है उसके साथ खड़े रहो और तास्सुरात की आज़ादी का दायरा महदूत करो क़ानून बनाओ उसमे तास्सुरात और खयालात की आज़ादी में कोई भी मज़हबी रहनुमा ना आता हो।
अभी हाल ही में जनवरी २०२१ में ख़्वाजा गरीब नवाज़ मोईनुद्दीन चिस्ती रेहमतुल्लाह अलैहे के खिलाफ एक ज़ाफ़रानी साधू बेहद अदना दर्जे की बात कर रहा था और उनके ऊपर झूठे बोहतान लगा रहा था ज़िनाकार, आतंकी और ना जाने कैसे कैसे अलफ़ाज़ बोल रहा था उसके ऊपर क्या हिकमते अमली की है। इतना सब होने के बाद तुम बेशर्मों की तरह ख़्वाजा साहब के दर पर चादर पेश करते हो। यह तो वही मिसाल हो गई, मुँह में राम बगल में छुरी।
अरे जब तुम उस भगवा साधू को गिरफ्तार नहीं कर सके तो तुमको कोई हक़ नहीं था की तुम गरीब नवाज़ के दर पर हाज़िर होते। किस हैसियत से तुमने चादर भेजी है। जब तुम्हारे अपने पालतू तो उनकी शान में बेहद अदना झूटी बात करतें हैं, तोहमत लगाते हैं।

No comments:
Post a Comment